Tuesday, 24 December 2019

कट्टरता से दूर रहे !!


कुछ कट्टर हिन्दू बोलते है कि हम सूली पर मरे हुए ईशा के लिए Christmas नहीं मनाएंगे , हम भीष्म पितामह तो भगवान नहीं मान सकते तो ईशा को भगवान क्यो माने ?
★ क्या आपको पता है कि ईशा सूली पर क्यो चढ़े थे ?  लोगो को अन्याय से बचाने के लिए । ... ईशा ने महिलाओं के सम्मान के लिए बहुत सारे कार्य किये है . मैं एक हिन्दू हूँ और सच्चाई के प्रतीक , मानवता के त्यौहार क्रिसमस को जरूर मानूंगा ।
★ और भीष्म पितामह ने तो तुष्ट / अधर्मी कौरवों का साथ दिया था और दुष्टों का साथ देने वाला भी दुष्ट ही होता है ... द्रोपदी के चीरहरण के समय भी भीष्म पितामह मजा ले रहा था , जो अपने कुल के बहु - बेटियों के लिए आवाज नहीं उठा सकता उसकी पूजा क्यो की जाए ??

" धर्म चाहे जो हो हर त्यौहार मनाना अच्छी बात है " - 

#BhartenduVimalDubey


#BVD26  #MerryChristmas

Monday, 23 December 2019

प्रदर्शनकारियों को मेरा सन्देश

प्रिय प्रदर्शनकारी !!
आप CAA व NRC का विरोध कर रहे हैं कीजिए ये आपका संवैधानिक अधिकार है लेकिन आप से निवेदन है कि कृपया एक बार माननीय प्रधानमंत्री व माननीय गृह मंत्री को भी गौर से सुनिए , एक बार बिल को जरूर पढ़िए … और गांधी के देश में हिंसात्मक प्रदर्शन के लिए स्थान नहीं है … शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना आपका अधिकार है ना कि बसों को जलाना !!
आप अपने स्थानीय प्रतिनिधियों यथा विधायक ( MLA / MLC ) , राज्यसभा सांसद व लोकसभा सांसद से बात कीजिए लेकिन हिंसा ना कीजिए …
शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कीजिए , सब कुछ कीजिए लेकिन अपने बीच के उपद्रवियों को पहचानिए जो आपके प्रदर्शन को खराब करने चाहते है ।
अपने बीच के नकाब पोशों को पहचानिए जो आपके प्रदर्शन को हाइजैक करना चाहते है ।

धन्यवाद
 #BVD26  

कुछ नहीं पता लेकिन प्रदर्शन जरूर करना है ? CAA

CAA के द्वारा बंग्लादेश , अफगानिस्तान व पाकिस्तान से आये ऐसे गैर - मुसलमानों  को नागरिकता दिया जाएगा जो 31 दिसम्बर 2014 तक भारत मे आ चुके है ।   अतः वे लोग अभी भी भारत मे रहते है ।
अतः CAA 2019 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है ।

#BhartenduVimalDubey

 देखिए इन तस्वीरों को की किस तरह लोगो को कुछ भी पता नहीं है ।





Sunday, 22 December 2019

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में गोदी मीडिया व बीजेपी की हार !!

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 सम्पन्न हो गया और 23 दिसम्बर 2019 को इसकी गणना भी होगा ... अब तमाम टीवी स्टूडियो , समाचार पत्रों आदि माध्यमो से इसपर विश्लेषण किया जाएगा लेकिन तमाम विश्लेषणों में कुछ मूलभूत प्रश्नों को छोड़ दिया जाएगा , मैं उन्ही मूलभूत प्रश्नों के तरफ आपका सबका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ ।

1.  टीवी चैनलों व समाचार पत्रों में सबसे अधिक कवरेज किस पार्टी को मिला ?
2. किस पार्टी द्वारा सबसे अधिक पैसा खर्च किया गया ?
3. किस पार्टी के कितने स्टार प्रचारकों ने प्रचार किया ?
4.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , अमित शाह व अन्य शीर्ष नेताओं ने कहाँ - कहाँ कितनी रैलियां की ?
5. ऐसे कितने प्रत्याशी चुनाव में विजयी होते है जिन्हें टीवी चैनलों व समाचार पत्रों में 0 % भी कवरेज नहीं दिया गया ?
◆ 6. क्या विधानसभा चुनाव भी राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़े जा सकते है ?
7.  झारखंड को बने 20 साल हुए ... वहाँ किस सीट से , कितने सालों तक , कौन विधायक रहा है ?
★ क्या चुनाव सभाओं में झूठ बोला जा सकता है कि कांग्रेस ने पिछले 50 सालों में झारखंड के लिए कुछ नहीं किया , जबकि झारखंड को बिहार से अलग हुए मात्र 20 साल हुए है और अधिकतर समय वहाँ किसकी सरकार रही है ?
● 8.  एक तरफ एक देश - एक चुनाव की बात की जा रही है और दूसरी तरफ 81 विधानसभा सीट वाली झारखंड का चुनाव 5 चरणों मे होता है ,  क्या यह दोहरा चरित्र नहीं है ?
9.  क्या चुनाव आयोग अपने जिम्मेदारियो को सही से निभा रहा है ?
★ एक तरफ महाराष्ट्र जैसे राज्य का चुनाव एक चरण में सम्पन्न होता है और झारखंड के चुनाव 5 चरणों मे !!  इसके पीछे क्या कारण है ?
10.  क्या आम नागरिक पार्टीयों के घोषणा पत्र को पढ़ती है ?
 आम जन मानस में जागरूकता के लिए सरकारें क्या कर रही है ? 

 और बहुत सारे ऐसे प्रश्न है जिन पर चर्चाएं नहीं होती है क्योंकि 90% न्यूज़ चैनलों व समाचार पत्रों का झुकाव किसी न किसी राजनीतिक दल के तरफ होता है और कुछ समाचार एजेंसिया तो खुलेआम पार्टी विशेष का प्रचार करती है ।
 भारत देश के अधिकांश मतदाताओं में राजनीति की बिल्कुल समझ नहीं होती है , सब के सब मुद्दों पर नहीं बल्कि जुमलों पर मतदान करते है ।

#BhartenduVimalDubey 

Friday, 20 December 2019

NRC में नागरिकता साबित नहीं करने पर क्या होगा ? NRC से समस्या क्यो ?

 बीजेपी व गोदी मीडिया कह रही है कि CAA से किसी भी भारतीय का कुछ लेना देना नहीं है ... अरे ये तो हम सबको पता है तीन पेज का CAA कानून है सब लोग पढ़े है ...
 मुख्य मुद्दा यह कि खुद गृह मंत्री ने कहा था कि CAB के ठीक बाद NRC आएगा ( CAB अब CAA है )

 ★ जो गैर मुस्लिम NRC में नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे उन्हें CAA का लाभ होगा और उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगा लेकिन ऐसे मुसलमानों का क्या जो नागरिकता नहीं साबित कर पाएंगे ?
उन्हें शरणार्थी कैम्प में भेज दिया जाएगा , उनके जमीन , घर आदि सरकार द्वारा जब्त कर लिया जाएगा !!

■  नोटबन्दी तो याद ही होगा ??  किस तरह सभी लोगो को लाइन में लगना पड़ा था ?
 खैर लाइन में तो सबको लगना पड़ेगा चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम !!
◆ NRC से सबसे अधिक समस्या किसको होगा ?
अनाथालय में रह रहे बच्चे अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे ?
 झुग्गी बस्तियों में रहने वालों के पास कागज कहाँ से आएगा ?

तो क्या सरकार इन सभी दलित - बंचित लोगो को शरणार्थी कैम्प में मरने के लिए छोड़ देगी ?

और भी बहुत सारी समस्याएं है
 कितना खर्चा होगा ?
 अर्थव्यवस्था नेगेटिव में चला जायेगा !!

#BhartenduVimalDubey

भारत के आत्मा शून्य लोग ? सब केवल देश भक्ति का दिखावा करते है !!

★ कुछ लोग तो आजादी के समय भी गूंग बने पड़े हुए थे तो आज खाक बोलेंगे ?  मुझे उमीद भी नहीं 😏 , तुम बस सैड स्टेटस अपडेट करो और गर्ल फ्रेंड को खुश रखो !!
◆  देश भक्ति दिखाने के लिए केवल " भारत माता की जय " बोल देना और क्या 🤷‍♂️
  ●  सब यही सोचते है कि सरकार ने मेरे लिए क्या किया ? कभी आपने सोचा है क्या कि ... देश मे क्या हो रहा है ?
 जो कुछ भी हो रहा है उससे आप सहमत है या नहीं ? जो भी हो परंतु " लाश " की तरह शांत तो मत रहिए !!
◆ खैर भारतीय तो सदा से " भाग्य " पर ही विश्वास करते रहे है , इसीलिए ना तो राजतंत्र के खिलाफ कुछ बोला और ना तो अंग्रेजों के खिलाफ !!
  और अगर " भाग्य " के जगह " कर्म " पर विश्वास किया होता तो भारत इतने वर्षों तक विभिन्न सत्ताओं के अधीन गुलाम ना रहा होता ...
खैर  रोटी खाइए , कपड़ा पहनिए और सो जाइये , बाकी सब जो होगा देखा जाएगा ...

भारत माता की जय
 #BhartenduVimalDubey 

भारत के गद्दार कौन है ?

पार्ट 1 ( इतिहास के संदर्भ में भूमिका के लिए ) 

● थोड़ा हम इतिहास में झांक करके देखते है ... अपना भारत सदियों से गुलाम रहा है ... हर राजा दूसरे राजा पर अधिकार करने के लिए तत्पर रहता था , किसी भी राजा को प्रजा हित से कोई मतलब नहीं था , सब के सब अपने स्वार्थों को पूरा करने में व्यस्त थे चाहे शिवाजी महाराज हो या औरंजेब हो या कोई अन्य !! ... फिर मुगलो ने भारत को गुलाम करके रखा था और अंग्रेजों ने पूरे देश पर एकछत्र राज किया था . भारत उन चंद राज्यों में शामिल है जिस पर सदियों से विदेशी शासन था ।
अब यहाँ यह सवाल जरूरी है कि भारत इतने वर्षों तक गुलाम क्यो रहा ? अर्थात भारत के गद्दार कौन है ?

◆  जब - जब भारत ने अपने आप को स्वतंत्र करवाने की कोशिश की थी तब तब किसी गद्दार ने भारत को धोखा दिया था ।   महाराणा प्रताप सिंह हो या रानी लक्ष्मीबाई सभी लोग अपने गद्दारों के धोखा देने के कारण ही परास्त हुए थे ।

● स्वतंत्रता संग्राम के दौर में भी तमाम ऐसे भारतीय थे जो चंद रुपयों के लिए अपने देश से गद्दारी करते थे । ... अंग्रेजों के भारतीय लोग इतने भक्त थे कि वे स्वतंत्रता सेनानियों के विरुद्ध गवाही भी देते थे । 

◆ जापान अपने लोगो के देश भक्ति के कारण आज एक उत्कृष्ट राष्ट्र बन गया है लेकिन मुझे कहने में जरा भी गुरेज नहीं है कि भारत के लोग बहुत स्वार्थी होते है , भारत के अधिकांश लोग केवल अपने हित के बारे में सोचते है !!

 पार्ट 2 : स्वतंत्र भारत / वर्तमान भारत 

 ● भारत के अधिकांश लोग इतने गरीब व अनपढ़ है कि वे केवल रोटी - कपड़ा और मकान में लगे रहते है ... आज के युग मे नौजवान सैड स्टेटस अपडेट करने में व्यस्त है !!

◆  यहाँ लोकतंत्र का मजाक बनाया जाता है क्योंकि यहाँ चुनावों में अधिकतम 50 - 60% मतदान होता है , अधिकांश मतदाताओं को अपना नाम भी लिखने नहीं आता है , चुनाव / काउंटिंग की व्यवस्था दोषपूर्ण हैं ।

●  यहाँ लोग खुद गलत को गलत बोलते नहीं है , अगर कोई गलत के खिलाफ आवाज उठाता भी है तो लोग उसे ही रोकने लगते है कि तुम से क्या करना है ?

 2012 का निर्भया कांड याद ही होगा !! तमाम लोग चुप्पी साधे हुए थे ... तमाम तथाकथित बड़े लोग भी ऐसे मुद्दों पर चुप हो जाते है एकदम सन्न ... खैर उनकी सुरक्षा के लिए देश की 40 % फ़ोर्स ( पुलिस , अर्धसैनिक बल ) रिज़र्व है , उनकी बेटियां एकदम सुरक्षित है ।

★ आज दिसम्बर 2019 में कुछ लोग CAA / NRC का विरोध कर रहे हैं और कुछ लोग इसका समर्थन भी कर रहे है ... परंतु आज भी अधिकांश युवा लोग सैड स्टेटस अपडेट करने में व्यस्त है , आज भी अधिकांश लोग सोच रहे है कि इससे मुझे क्या ? जो होगा देखा जाएगा ..!  जैसे कि भारत के लोग गुलामी सहने के लिए पैदा हुए है ... कभी राजतंत्र की गुलामी तो कभी लोकतंत्र के नाम पर नेहरू - गांधी परिवार की गुलामी  और  आज देश हित के झूठे वादे के नाम भी  मोदी - शाह की गुलामी ..!

★ क्या लोकतंत्र में सत्ता कुछ गिने चुने लोगो की गुलाम हो सकती है ?
 मुझे भारत बहुत प्यारा है इसीलिए मैं समझता हूँ कि हमे हर एक मुद्दे पर खुल करके अपनी व्यक्तिगत राय रखनी चाहिए  ( आपकी राय पक्ष में या विपक्ष में हो सकती है , यह आपको तय करना है ) ।

★  लोकतंत्र में सरकार का विरोध करना , देशद्रोह नही होता है ।
 यह राजतंत्र नहीं है कि राजा के विरोध को देशद्रोह मान लिया जाए । 
 गरीब व अनपढ़ लोगो की बात छोड़िए , तमाम ऐसे पढ़े लिखे लोग भी है जो अपने विचार को नहीं प्रगट करते है ।
    ऐसे पढ़े लिखे लोग " पशुओं " से भी अधिक बेकार है ।

क्या केवल " भारत माता की जय " बोलना ही देश भक्ति है ?

#BhartenduVimalDubey

Thursday, 19 December 2019

जामिया का दोषी कौन ? गोदी मीडिया !

◆ जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे … अगर आप मोदी मीडिया यथा ज़ी न्यूज़ , रिपब्लिक न्यूज़ , ABP न्यूज़ , इंडिया टीवी , आज तक जैसे चैनल देखेंगे जिसके मालिक व पत्रकार प्रत्यक्ष रूप से बीजेपी व आरएसएस से जुड़े हुए है तो आप समझ ही नहीं पाएंगे कि वास्तव में क्या हो रहा है क्योंकि ये सारे न्यूज़ चैनल व पत्रकार अपने मालिक ( बीजेपी / आरएसएस ) के दिशानिर्देश का पालन करते है ।
● अभी तक किसी भी सरकारी पदाधिकारी ने यह नहीं बताया है कि आखिर दिल्ली पुलिस यूनिवर्सिटी के लाइब्रेरी , टॉयलेट व बालिका छात्रावास में क्यो घुसी ?
अगर सब कुछ सही है तो इंटरनेट क्यो बंद किया जा रहा है ?
◆ मेरे विचारों से ये सब असली मुद्दों से भटकाने के लिए जान बूझ करके किया जा रहा है !! आप बीजेपी आईटी सेल के पोस्ट को देखिए , पूर्णतः साम्प्रदायिक होता है ।
● जामिया के प्रदर्शन को बाहरी ताकतों ने हाइजैक कर लिया था ? ये सब गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री व गुजरात के पूर्व गृह मंत्री का चाल है ।
◆ नोटबन्दी तो याद ही होगा ? जो फायदा नोटबन्दी से हुआ था ठीक वही फायदा NRC से होगा ….

 #BhartenduVimalDubey 

CAA से बिहारियों को क्या फायदा होगा जो सालों से असम में है ?

आखिर नागरिकता कानून 2019 लाने की जरूरत क्यो पड़ी ?
इसका एकदम सरल भाषा मे जबाब दिया जाए तो इसीलिए की असम में NRC से बाहर हुए गैर मुस्लिम लोगो को शामिल किया जा सके  इसीलिए आप CAA व NRC अलग अलग करके नहीं देख सकते है ।
क्या आपको पता है कि उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे राज्यो से जा करके हजारों हिन्दू परिवार असम में रह रहे हैं , तो ऐसे हिन्दू लोगो को CAA से क्या फायदा होगा ??
 
अगर आप इस नागरिकता कानून अर्थात CAA 2019 को पढ़ेंगे और गृह मंत्री एवं गोदी मीडिया के बातो को सुनेंगे फिर विचार करेंगे तो आपके सभी प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलेगा !!

#BhartenduVimalDubey 

Monday, 16 December 2019

CAB / CAA पर कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ ?

  एक तरफ गृह मंत्री व प्रधानमंत्री कहते है कि नागरिकता कानून 2019 नागरिकता देने का कानून है , किसी का नागरिकता लेने का नहीं ... और दूसरी तरफ कहते है कि पूरे देश मे एनआरसी लागू होगा । ...
गौरतलब हो कि CAB / CAA में केवल मुस्लिम शामिल नहीं होंगे और NRC में केवल मुस्लिम शामिल होंगे ।

आम जनता तो परेशान है , अधिकतम मीडिया घरानो का पत्रकारिता और निष्पक्षता से कोई लेना देना नहीं है ।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया हिंसा मामला :- दिल्ली पुलिस कुछ और बोल रही है व जामिया की प्रशासन कुछ और बोल रही है ।

गृह मंत्री अमित शाह कुछ और बोल रहे हैं , भाजपा नेता कुछ और बोल रहे है , प्रधानमंत्री कुछ बोल ही नही रहे है , विपक्षी पार्टियों की अलग राय है ...

अब आम जनता कैसे समझे कि क्या हो रहा है ?
इंटरनेट सेवा को क्यो प्रतिबंधित किया जा रहा है ?
न्यूज़ चैनलों पर केवल पाकिस्तान की खबर ही क्यो दिखाई जाती है ?
मिड डे मील का हाल आपको पता ही है ।

#BhartenduVimalDubey 

नाथूराम गोडसे पूजनीय क्यो ?

◆ कुछ ब्राह्मण समाज के लोग रावण को अपना आदर्श मानते है और उनके लिए रावण पूजनीय भी है , वह भी मात्र इसीलिए की वह एक ब्राह्मण था ।
ठीक उसी प्रकार ● कुछ कट्टर हिन्दू नाथूराम गोडसे को पूजनीय मानते है , वह भी मात्र इसीलिए की वह एक हिन्दू था ।
इसी क्रम में ◆ कुछ अति कट्टर मुस्लिम समुदाय के लोग औरंगजेब की तारीफ करते है और अकबर की बुराई ।
● अधिकतर इतिहासकारों के अनुसार जिस प्रकार अन्य राजाओं ने सत्ता के लिए लड़ाई - झगड़े किये थे ठीक उसी प्रकार वीर शिवा जी महाराज भी सत्ता के लिए कई जगह लूट पात किये थे ।
मैं भी एक हिन्दू ( ब्राह्मण ) हूँ लेकिन मैं केवल जाती - धर्म के आधार पर रावण व नाथूराम गोडसे की पूजा नहीं कर सकता हूँ । .. अगर आप निष्पक्ष रूप से मानवता के आधार पर विचार करेंगे तो आप को उपरोक्त में से हर कोई निंदनीय लगेगा । … मैं मानवता के आधार पर निष्पक्ष रूप से सोचता हूँ इसीलिए मुझे रावण , नाथूराम गोडसे , औरंगजेब आदि सभी अच्छे नहीं लगते है ।
नोट : कट्टरता से ही सभी प्रकार के समस्याओं का जन्म होता है । .. ये मेरा निजी मत है , आप इससे सहमत या असहमत हो सकते है ... असहमत होने का यह अर्थ नहीं है कि आप कमेंट में मेरे माँ - बाप को गाली देने लगे … कुछ लोग इतने कट्टर होते है कि कुतर्क करने लगते हैं ।
धन्यवाद
 #BhartenduVimalDubey 

Sunday, 15 December 2019

हिंसात्मक प्रदर्शन के पीछे कौन है ? CAA भाजपा का गंदा खेल !!

कृपया किसी भी प्रकार के अफ़वाहों पर ध्यान ना दे ( पुलिस व सरकार के तरफ से शांति - व्यवस्था बनाए रखने की अपील की जा रही है )

All About CAB 2019 ( नागरिकता कानून 2019 : पूरी जानकारी )

    नागरिकता संसोधन बिल 2019

                  नागरिकता कानून 2019 

→ नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019 लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया और फिर महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ये विधेयक कानून का रूप ले चुका है , अब इस कानून को खत्म करने के लिए केवल दो रास्ता है ; पहला :- अगर यह कानून संविधान विरोधी है तो सुप्रीम कोर्ट इसे शून्य कर देगी और दूसरा :- अगर सरकार संसद के द्वारा इसमें परिवर्तन करे या इसे वापस लेले ।

 आइए समझते है कि इस विधयेक ( अब कानून ) का विरोध क्यो हो रहा है ?

◆ असम के संदर्भ में :- असम के लोग इस बात से नही नाराज है कि इस बिल में मुस्लिमों को क्यो नहीं शामिल किया गया है !  असम के प्रदर्शनकारी चाहते है कि किसी भी घुसपैठियों को नागरिकता ना दिया जाए , असम को डर है कि अगर बाहरी लोगों को नागरिकता दी जाएगी तो असम में ही आसामी लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे ।


● पूर्वोत्तर भारत :- उत्तर भारत के इतर पूर्वोत्तर भारत मे ये लड़ाई हिन्दू - मुस्लिम की ना हो करके संस्कृति बचाने की लड़ाई है !   पूर्वोत्तर भारत का समाज उत्तर भारत से बिल्कुल अलग है इसीलिए संविधान में इन राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है ...

 इसीलिए इस बिल में कुछ क्षेत्रों को छूट भी दिया गया है

प्रायः जिन बाहरी लोगों को नागरीकता दी जाएगी वो इनके समाज ( संस्कृति ) के नहीं होंगे  चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम या कोई अन्य !!



◆ NRC से सम्बंध :- गृह मंत्री ने कहा है कि पूरे देश में एनआरसी लागू होगा !   इस बिल के कानून बन जाने के बाद सभी गैर - मुस्लिमों ( अर्थात हिंदुओ को , ईसाइयों को , बौद्ध , पारसी , जैन सिख लोगो ) को नागरिकता मिल जाएगा , चाहे उनके पास कागज ( दस्तावेज ) हो या नहीं ।

 इस प्रकार देखा जाए तो इस बिल का एनआरसी से घनिष्ठ संबंध है ।   एनआरसी से केवल ऐसे मुस्लिम शरणार्थी बाहर होंगे जो अपनी नागरिकता साबित नही कर पाएंगे ।

अतः NRC का वही लाभ होगा जो नोटबन्दी का हुआ था !


● पूर्वोत्तर भारत को छोड़ दे तो यह लड़ाई संवैधानिक है ... प्रदर्शनकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के 13 जजो की पीठ ने एक फैसला दिया था जिसके अनुसार धर्मनिरपेक्षता भारत के संविधान का मूल है अतः कोई भी कानून धर्मनिरपेक्षता के कानून का उल्लंघन नहीं कर सकता है ।

सरकार का तर्क है कि यह बिल / कानून संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नही करता है ।



◆ अगर आप नागरिकता संसोधन बिल 2019 और एनआरसी को अलग - अलग मानेंगे तो आपको इस कानून में कोई भी दिक्कत नहीं दिखेगा लेकिन आप ऐसा नहीं कर सकते है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में असम में एनआरसी की प्रक्रिया हुई थी , तथाकथित तौर पर उसमे 19 लाख लोग अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पाए थे जिसमें से 13 लाख गैर मुस्लिम थे , अब सरकार इस कानून के माध्यम से इन गैर मुस्लिमों को निर्बाध रूप से नागरिकता देना चाहती है ।



विशेष आग्रह :- किसी भी बिल का समर्थन या विरोध करने से पहले बिल के कॉपी को जरूर पढ़ ले , लोकसभा व राज्यसभा में पक्ष व विपक्ष के नेताओं के चर्चा पर गौर कर ले और माननीय मंत्री जी के जबाब को भी देख ले, उसके बाद आप निश्चित करे की आप को किस बिल का समर्थन करना है और किस बिल का विरोध करना है ।

नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019 

              पक्ष और विपक्ष में पूरी जानकारी



● इस विधयक के कानून बन जाने के बाद सभी गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी ।

◆ गौरतलब हो कि भारतीय संविधान के हमारे देश के संसद ( लोकसभा + राज्यसभा ) में समय समय पर विधेयक आते रहते हैं और फिर संसद से पारित होने के बाद और महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाते है लेकिन कोई भी विधेयक हमारे संविधान के खिलाफ नही हो सकता है ।

 ● इस विधेयक में साफ साफ लिखा है कि सिख धर्म , ईसाई धर्म , पारसी धर्म , हिन्दू धर्म , जैन धर्म , बौद्ध धर्म के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलेगा ।

◆ अगर साफ शब्दों में कहाँ जाए तो यह विधेयक मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता से वंचित करने के लिए लाया गया है

 और यह विधेयक हिंदुओं को एनआरसी से बचायेगा ।

● मेरे विचार में यह विधयेक भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्षता सिद्धांत के खिलाफ है ।

हम धर्म - जाती , लिंग - भेद , गोरा - काला के आधार पर बनाये गए सभी कानूनों का विरोध करते है ।


हिन्दू - मुस्लिम में फर्क क्यो ? : नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019


मैं नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019 का समर्थन करने वाले लोगों से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ ।

●  क्या हिन्दुओं और मुसलमानों के खून का रंग अलग - अलग होता है ?

◆  क्या मुसलमानों के ईद का चांद और हिंदुओं के करवा चौथ , गणेश चतुर्थी के चांद में अंतर होता है ?

●  क्या हिंदुत्व और शरीयत मानवता से बड़ी है ?

◆  क्या इस बिल को पेश करने से पहले मुस्लिम विद्वानों से विचार विमर्श किया गया है ?

●   क्या आपको नहीं पता  है कि इस बिल का विरोध केवल मुस्लिम ही नही बल्कि हिन्दू समेत अन्य समुदाय के लोग भी कर रहे है ?

◆  क्या आपको पता नहीं है कि असम जैसे राज्यों के अधिकांश लोग ( हिन्दू भी ) इस बिल का विरोध कर रहे हैं ?

●  क्या आपको नहीं पता है कि इससे भारत की जनसंख्या में कितनी वृद्धि होगी ?

◆  दुनिया मे ( पाकिस्तान , बंग्लादेश और अफगानिस्तान में भी ) अधिकांश ऐसे लोग रहते है जो किसी भी धर्म को नही मानते है ।

तो इस बिल में नास्तिक अल्पसंख्यको के लिए कोई प्रावधान क्यो नही किया गया है ?


ऐसे तमाम ऐसे प्रश्न है जिनके बारे में इस बिल में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है ।
 ________________


> पहला भाग

◆  अल्पसंख्यक शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है , अल्प मतलब थोड़ा और संख्यक मतलब जनसंख्या !!  यह बहुसंख्यक का विलोम है ।

 ऐसी मानव आबादी ( धर्म , भाषा आदि के आधार पर ) जो किसी देश या राज्य के बाहुल जनसंख्या से कम कुछ सीमित प्रतिशत में हो , उसे अल्पसंख्यक कहते है ।

● भारत मे सबसे बड़ी आबादी हिंदुओ की है और उसके बाद मुस्लिमो की , प्रायः लोग मुस्लिमो को अल्पसंख्यक कहते है लेकिन ज्ञात हो कि भारत मे मुस्लिम अल्पसंख्यको में बहुसंख्यक आबादी है ।

◆ अल्पसंख्यक केवल जाती - धर्म के आधार पर नही बल्कि भाषा , पहनावा आदि के आधार पर भी होते है , सभी प्रकार के अल्पसंख्यको को भरतीय संविधान में उचित सरंक्षण दिया गया है

● अल्पसंख्यक समुदाय : मुस्लिम , जैन , बौद्ध , पारसी , ईसाई  इत्यादि … नास्तिकों को भी अल्पसंख्यक माना जा सकता है ।

> दूसरा भाग

◆  अल्पसंख्यको की सबसे बड़ी समस्या है अपने तौर तरीकों की रक्षा करना ,  अपने भाषा को जीवित रखना  इसीलिए भारत सहित लगभग दुनिया के सभी देशों के संविधानों में अल्पसंख्यको के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं ।
______________

धर्म बताओ नागरिकता पाओ

● पक्ष : नागरिकता संसोधन बिल 2019 का समर्थन करने वाले कह रहे है कि हिन्दू शरणार्थी कहाँ जाएंगे ? क्योकि विश्व मे कोई भी हिन्दू राष्ट्र नही है और मुस्लिमों के लिए बहुत सारे इस्लामिक देश है ।

 विपक्ष  : तो फिर इस बिल में ईसाइयों को नागरिकता देने की बात क्यो की गई ? क्या ईसाइयों के लिए भी कोई देश नहींं है ?



◆ पक्ष : ये बिल तीन देेेश के अल्पसंख्यक समुदाय को नागरिकता देगा !

 विपक्ष  :  तो फिर इस बिल में नास्तिक लोगो को स्थान क्यो नहीं मिला है ?

#BVD26

🔴 👉 मसला है की CAB जैसे सरकारी हरकत पर भक्त खुश क्यों हैं ..?

जबकि तय है कि कोई भी भक्त इस बिल का देशहित में एक भी फायदा बता नहीं सकते।

तो भक्त खुश क्यों जाते हैं ..?

रहस्य नहीं बल्कि सामान्य सी बात है। समझ तो उन्हें भी है कि फायदा कुछ होना नहीं। उन्हें यह भी मालूम है कि इस सरकार ने पूर्व में भी जो निर्णय लिए हैं देश का नुकसान ही हुआ है। चाहे नोटबन्दी हो या जीएसटी

या फिर ढह गई अर्थव्यवस्था जो 1.5% पर जीडीपी पहुंच गई।

तो भक्त CAB पर भक्त खुश क्यों हैं ...?

क्यों कि CAB के देशहित में नफा नुकसान को समझने के बाद जब विपक्षी एवं बुद्धिजीवियों ने इसका विरोध शुरू किया तो भक्त खुश हो गए। भक्तों का मानना है कि अगर विपक्षी एवं बुद्धिजीवी सरकार की किसी हरकत का विरोध कर रहे हैं तो ये अच्छा ही होगा।

और सरकार को भक्तों की इस भावना का भान है। उसे भी भक्तो की ज्ञान स्तर की बखूबी अंदाजा है। इसलिए किसी भी तरह की जाहिली बेवकूफी देश विरोधी निर्णय लाती है ताकि विपक्ष या बुद्धिजीवी लोग विरोध करें और भक्त इसपर खुश होकर कहें कि वाह सरकार का मास्टरस्ट्रोक ......!

देशहित में CAB का एक फायदा कोई भक्त बता दें।

ये चुनौती है ....!!!!
_________________

नोट : ये मेरे अपने विचार है ।
    मैं किसी भी प्रकार के अफवाहों का समर्थन नहीं करता हूँ और ना तो मैं हिंसात्मक प्रदर्शन का पक्षधर हूँ ।
 कानून व्यवस्था बनाये रखें ।
  धन्यवाद

#BhartenduVimalDubey

नागरिकता कानून 2019 पर पूर्वोत्तर भारत का अलग नजरिया !

            नागरिकता संसोधन बिल 2019 
                  नागरिकता कानून 2019   

आखिर इस कानून का विरोध क्यो रहा है ? आइए समझते है ...
असम के संदर्भ में :- असम के लोग इस बात से नही नाराज है कि इस बिल में मुस्लिमों को क्यो नहीं शामिल किया गया है !  असम के प्रदर्शनकारी चाहते है कि किसी भी घुसपैठियों को नागरिकता ना दिया जाए , असम को डर है कि अगर बाहरी लोगों को नागरिकता दी जाएगी तो असम में ही आसामी लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे । 

पूर्वोत्तर भारत :- उत्तर भारत के इतर पूर्वोत्तर भारत मे ये लड़ाई हिन्दू - मुस्लिम की ना हो करके संस्कृति बचाने की लड़ाई है !   पूर्वोत्तर भारत का समाज उत्तर भारत से बिल्कुल अलग है इसीलिए संविधान में इन राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है ...
 इसीलिए इस बिल में कुछ क्षेत्रों को छूट भी दिया गया है 
प्रायः जिन बाहरी लोगों को नागरीकता दी जाएगी वो इनके समाज ( संस्कृति ) के नहीं होंगे  चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम या कोई अन्य !! 

NRC से सम्बंध :- गृह मंत्री ने कहा है कि पूरे देश में एनआरसी लागू होगा !   इस बिल के कानून बन जाने के बाद सभी गैर - मुस्लिमों ( अर्थात हिंदुओ को , ईसाइयों को , बौद्ध , पारसी , जैन सिख लोगो ) को नागरिकता मिल जाएगा , चाहे उनके पास कागज ( दस्तावेज ) हो या नहीं । 
 इस प्रकार देखा जाए तो इस बिल का एनआरसी से घनिष्ठ संबंध है ।   एनआरसी से केवल ऐसे मुस्लिम शरणार्थी बाहर होंगे जो अपनी नागरिकता साबित नही कर पाएंगे ।
अतः NRC का वही लाभ होगा जो नोटबन्दी का हुआ था ! 

● पूर्वोत्तर भारत को छोड़ दे तो यह लड़ाई संवैधानिक है ... प्रदर्शनकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के 13 जजो की पीठ ने एक फैसला दिया था जिसके अनुसार धर्मनिरपेक्षता भारत के संविधान का मूल है अतः कोई भी कानून धर्मनिरपेक्षता के कानून का उल्लंघन नहीं कर सकता है । 
सरकार का तर्क है कि यह बिल / कानून संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नही करता है ।

◆ अगर आप नागरिकता संसोधन बिल 2019 और एनआरसी को अलग - अलग मानेंगे तो आपको इस कानून में कोई भी दिक्कत नहीं दिखेगा लेकिन आप ऐसा नहीं कर सकते है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में असम में एनआरसी की प्रक्रिया हुई थी , तथाकथित तौर पर उसमे 19 लाख लोग अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पाए थे जिसमें से 13 लाख गैर मुस्लिम थे , अब सरकार इस कानून के माध्यम से इन गैर मुस्लिमों को निर्बाध रूप से नागरिकता देना चाहती है ।  


विशेष आग्रह :- किसी भी बिल का समर्थन या विरोध करने से पहले बिल के कॉपी को जरूर पढ़ ले , लोकसभा व राज्यसभा में पक्ष व विपक्ष के नेताओं के चर्चा पर गौर कर ले और माननीय मंत्री जी के जबाब को भी देख ले, उसके बाद आप निश्चित करे की आप को किस बिल का समर्थन करना है और किस बिल का विरोध करना है ।

नागरिकता बिल 2019 को और अच्छे से समझने के लिए मेरे पुराने ब्लॉग्स को जरूर पढ़ें । 

शरद पवार व अजित पवार ने मिल कर भाजपा को सबक सिखाया

क्या शरद पवार ने जान बूझकर अजित पवार को देवेंद्र फडणवीस के पास सरकार बनाने के लिए भेजे था ??



:- हाँ, ऐसा हो सकता है क्योकि इससे शरद पवार को बीजेपी को नीचा दिखाने का मौका मिलता और अजित पवार के ऊपर लगे आरोपो को झुठलाने में सहयोग !



दूसरी बात ये हो सकता है कि पवार का प्लान रहा हो कि अजित पवार बीजेपी के साथ सरकार बना लेंगे तो केंद्र में भी रोल मिल जाएगा और मैं शिव सेना और कांग्रेस से बोल दूंगा की अजित पवार ने धोखा दिया यानी कि साँप भी मर जाये और लाठी भी ना टूटे ।



मतलब की ये तो साफ है कि अजित पवार ने जो कुछ भी किया उसमे शरद पवार की पूर्ण सहमति थी

अगर ऐसा नही होता तो शरद पवार , अजित पवार को इतनी आसानी से पार्टी में उच्च पद नही देते ।



#BVD26

गोडसे / सावरकर पर विवाद क्यो ?

किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को संविधान के खिलाफ बोलने का कोई हक नही है .

केवल धर्म के आधार पर औरंगजेब या गोडसे या किसी अन्य को उचित नहीं कहा जा सकता है ।

हमारे संसद में अधिकतम ऐसे लोग है जिनके ऊपर किसी ना किसी प्रकार के मामले कोर्ट में लंबित है , ऐसे सभी लोगो के ट्रायल को पूरा करके सभी आरोपियों को चुनाव से दूर रखा जाए ।

कभी भी किसी भी प्रकार की कट्टरता किसी का भी भला नही कर सकता है ।

अगर कोई पवित्र संसद में गोडसे जैसे लोगो की महिमामंडन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही किया जाना चाहिए और अगर किसी सांसद के खिलाफ आपत्ति जनक शब्दो का उपयोग करे तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही किया जाना चाहिए ।

मीडिया को भी ऐसे निराधार मुद्दों पर चर्चा ना करके आम जनता के ऊपर वैज्ञानिक आधार पर चर्चा करना चाहिए ।



जिस चाँद को देखकर हिन्दू करवाचौथ , गणेश चतुर्थी अन्य त्यौहार मानते है उसी चाँद को देखकर मुस्लिम अपने त्यौहार ईद इत्यादि मानते है , इसलिए मैं हिन्दू - मुस्लिम से सम्बंधित सभी विवाद से दूर रहने का पक्षधर हूँ । वैसे भी हम जैसे आम लोगो को गोडसे , औरंगजेब , मंदिर - मस्जिद जैसे मामलों से कोई लेना देना नहीं है ।

हमारा उद्देश्य किसी के भावनाओं को ठेस पहुंचाना नही है , ना तो हम किसी की आलोचना कर रहे है ।   हम तो केवल ये चाहते है कि देव - परी के मुद्दों को छोड़करके लौकिक मुद्दों ( रोटी , कपड़ा - मकान ) पर ध्यान दिया जाए और सरकार का यही काम भी है ।

Thursday, 12 December 2019

CAB 2019 से भक्त क्यो खुश है ?

🔴 👉 मसला है की CAB जैसे सरकारी हरकत पर भक्त खुश क्यों हैं ..?
जबकि तय है कि कोई भी भक्त इस बिल का देशहित में एक भी फायदा बता नहीं सकते।
तो भक्त खुश क्यों जाते हैं ..?
रहस्य नहीं बल्कि सामान्य सी बात है। समझ तो उन्हें भी है कि फायदा कुछ होना नहीं। उन्हें यह भी मालूम है कि इस सरकार ने पूर्व में भी जो निर्णय लिए हैं देश का नुकसान ही हुआ है। चाहे नोटबन्दी हो या जीएसटी
या फिर ढह गई अर्थव्यवस्था जो 1.5% पर जीडीपी पहुंच गई।
तो भक्त CAB पर भक्त खुश क्यों हैं ...?
क्यों कि CAB के देशहित में नफा नुकसान को समझने के बाद जब विपक्षी एवं बुद्धिजीवियों ने इसका विरोध शुरू किया तो भक्त खुश हो गए। भक्तों का मानना है कि अगर विपक्षी एवं बुद्धिजीवी सरकार की किसी हरकत का विरोध कर रहे हैं तो ये अच्छा ही होगा।
और सरकार को भक्तों की इस भावना का भान है। उसे भी भक्तो की ज्ञान स्तर की बखूबी अंदाजा है। इसलिए किसी भी तरह की जाहिली बेवकूफी देश विरोधी निर्णय लाती है ताकि विपक्ष या बुद्धिजीवी लोग विरोध करें और भक्त इसपर खुश होकर कहें कि वाह सरकार का मास्टरस्ट्रोक ......!
देशहित में CAB का एक फायदा कोई भक्त बता दें।
ये चुनौती है ....!!!!

#BhartenduVimalDubey
#BVD26

Wednesday, 11 December 2019

ये पत्रकारिता नहीं चाटुकारिता है ! ये गोदी मीडिया है !

    ये पत्रकारिता नहीं चाटुकारिता है ! 
     ये मीडिया नहीं गोदी मीडिया है !!

 भूमिका : लोकसभा और उसके बाद  राज्यसभा से नागरिकता संसोधन बिल 2019 पास हो गया , मैंने सोचा थोड़ा न्यूज़ चैनल देख लिया जाए ... अब आइए बात करते है कि न्यूज़ चैनलों पर क्या दिखाया जा रहा है !!

 ◆1◆ मैंने पहले ABP न्यूज़ लगाया तो देखा कि रुबिका लियाकत एक न्यूज शो कर रही है जिसके पीछे बैनर पर लिखा है " CAB2019 पर सियासत क्यो " मतलब की रुबिका जी पहले से धरणा बना के बैठी है कि इस पर विपक्ष सियासत कर रहा है ।  फिर रुबिका जी कहती है कि कल मेरे डिबेट का टाइटल था कि विपक्ष पाकिस्तान की भाषा बोल रहा है और आज प्रधानमंत्री भी बीजेपी के संसदीय दल के बैठक में कहते है कि विपक्ष पाकिस्तान की बात कर रहा है " ABP न्यूज़ आपको रखे आगे "
रुबिका जी ने एक विपक्ष के नेता से पूछा कि आप लोग राजनीति क्यो कर रहे है ? और फिर जब विपक्ष के नेता ने कहा कि आप के बातों को प्रधानमंत्री कहते है और आप प्रधानमंत्री के बातो को कहती है और किसी की नही सुनती तो फिर रुबिका जी उनके माइक को बंद कर देती है ।
... अब आप खुद समझ सकते है कि ये पत्रकार है या बीजेपी प्रवक्ता ?
रुबिका समेत ABP न्यूज़ चैनल के लगभग सभी पत्रकार पहले से मान करके चलते है कि मोदी व अमित शाह जी जो कह दिए वो पत्थर की लकीर है और उसका विरोध करने वाले पाकिस्तान की भाषा बोलते है ।

 ● यहाँ ध्यान देने योग्य बात है कि बीजेपी आईटी सेल का मीडिया घरानों पर इतना प्रभाव है कि पुण्य प्रसून बाजपेई के " मास्टर स्ट्रोक " के समय ABP न्यूज़ चैनल का प्रसारण बंद हो जाता था और अंत मे पुण्य प्रसून बाजपेई जैसे सच्चे पत्रकार को ABP न्यूज़ और फिर अन्य सभी न्यूज़ चैनलों को छोड़ना पड़ा ।

■  विशेष नोट ★ वैसे भारत मे तो शुरू से ही पत्रकारिता निष्पक्ष नहीं रहा है , सब सत्ता के आगे मजबूर है और सत्ता पैसे के आगे मजबूर है ।   सब राजनीति सत्ता का खेल है , अंतर केवल यह है कि कभी ये कांग्रेस की गुलाम थी और आज बीजेपी की गुलाम है और कल किसी और कि गुलाम होगी ... भारत मे साक्षरता दर बहुत ही कम है और उनमें भी इतने बारीक चीजो को समझने की काबलियत तो मुझ में भी नहीं ... यहाँ संक्षिप्त में कांग्रेस के कुचक्र का उल्लेख करना जरूरी था नहीं तो आप को लगता कि पहले ऐसे नहीं होता था , लेकिन मीडिया आज जितनी गुलाम है उतनी गुलाम तो इमरजेंसी के समय में भी नहीं थी , बीजेपी हमेशा इमरजेंसी काल का जिक्र करती है लेकिन आज की स्थिति उससे बहुत ही बद्तर है , आज तो मीडिया घराना न्यूज़ देने के बजाय सत्ता का गुण गान करने में व्यस्त है , मीडिया के अनुसार जो बीजेपी सरकार के खिलाफ बोले वे सभी देशद्रोही है ।  ... खैर आगे बढ़ते है

•2◆ फिर मैंने 'आज तक' लगाया , उस पर अंजना ओम कश्यप रिपोर्टिंग कर रही थी ।
आपको इनके बारे में पता ही होगा कि ये कितनी बड़ी भक्त है !  ये आज भी मौजूद सत्ताधारी दल बीजेपी से नहीं बल्कि कांग्रेस से प्रश्न करती है । 
  दरसल अंजना के पति को राजनाथ सिंह ने किसी अच्छे पद पर नियुक्ति दे दी है ना !!
अलका लांबा और अंजना का वायरल वीडियो तो आपने देखा ही होगा !!

● जब राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे तब अंजना ओम कश्यप उनका इंटरव्यू लिया था और इनका एक प्रश्न था - " आपको नहीं लगता है कि कांग्रेस बहुत ही छोटी राजनीति कर रही है जो अमिताभ बच्चन पर सवाल खड़े कर दी ... " बेटी बचाओ अभियान " तो पूरे देश का अभियान है इसे एक व्यक्ति से जोड़ करके देखना कितना उचित होगा ... इस तरह देखा जाय तो सोनिया गांधी पर भी नेशनल हेराल्ड का केस है "
अब आप खुद निश्चित कीजिए कि ये राजनाथ सिंह जी से सवाल कर रही थी या फिर जबाब दे रही थी ?

( लेख को आगे बढ़ाने से निवेदन है कि आप Facebook , Instagram , Twitter etc. पर हमारे हैशटेग से जुड़े :- #BVD26 और #BhartenduVimalDubey  )

 ●3◆  अब बात ज़ी न्यूज़ ( चैनल ) की करे तो ज़ी न्यूज़ को एसेल ग्रुप चलता है जिसके मालिक सुभाष चंद्रा बीजेपी के समर्थन से राज्यसभा सांसद है   इसीलिए  इस चैनल के पत्रकार जीडीपी , छात्रों के प्रदर्शन , अर्थव्यवस्था इत्यादि को ना दिखा करके राम मंदिर , पाकिस्तान में टमाटर का भाव और किम जोंग उन के भविष्य के प्लान पर चर्चा करते है ।

◆4●  R भारत न्यूज़ चैनल जिसकी पहचान अर्बन गोस्वामी से है जो विपक्ष के लोगो को बोलने का मौका ही नहीं देते है ।
  ज़ी न्यूज़ के तरह ही इस चैनल पर भी प्रायः पाकिस्तान का ही न्यूज़ चलता रहता है ।

  ◆5◆  रजत शर्मा इंडिया टीवी के चेयरमैन है  और  ये इतने बड़े भक्त है कि इनको पद्म पुरस्कार भी मिल चुका , भक्ति के बल पर इनको DDCA में किये गए घोटालों से छुटकारा मिल गया ।


 ... अरे अभी गोदी मीडिया का लिस्ट बहुत बड़ा है , अभी इस लिस्ट में तमाम भक्तों का नाम नही आया है ।
 कृपया अन्य फर्जी पत्रकारों का नाम जोड़ करके इस गोदी मीडिया के लिस्ट को पूर्ण करने का प्रयास करें ।


■★  NDTV जैसे कुछ गिने चुने न्यूज़ चैनलों को छोड़ करके प्रायः सभी न्यूज़ चैनल पहले से ये मान करके चलती है कि अमित शाह जो कह रहे हैं वही सत्य है और जो सरकार से प्रश्न पूछता है वो पाकिस्तान की भाषा बोलता है ।
 यदा कदा अगर कोई पत्रकार सरकार से प्रश्न पूछता भी है तो बीजेपी आईटी सेल में दबाब के कारण सम्बंधित न्यूज़ चैनल पर बाबा रामदेव विज्ञापन देना बंद कर देते हैं और फिर उस पत्रकार को न्यूज़ चैनल मैनेजमेंट बाहर का रास्ता दिखा देता है ।   फिर भी कुछ पत्रकार अपने नौकरी को ताक पर रख करके निडरता से जनता के मुद्दे को उठाते है ।

★■  बीजेपी आईटी सेल के दबाब के कारण एनडीटीवी इंडिया जैसे चैनलों को बहुत ही सुस्त होना पड़ा   और  अभिसार शर्मा , पुण्य प्रसून बाजपेई  जैसे तमाम सच्चे पत्रकारों को न्यूज़ चैनलों से बाहर होना पड़ा ।
 खैर ये पत्रकार आज भी सोशल मीडिया के माध्यम से आम आदमी के लिए पत्रकारिता करते है ।

बीजेपी आईटी सेल सरकार से मिल करके सोशल मीडिया साइट्स से भी बीजेपी विरोधी तथ्यों को देश विरोधी तथ्य बता करके हटवाने का प्रयास करते रहते है ।

सम्भवतः इस लेख के बाद भक्तों द्वारा मुझे भी देशद्रोही घोषित कर दिया जाए !!

नोट :- आप से निवेदन है कि आप वोट किसी भी पार्टी को दे लेकिन गलत को गलत कहना सीखे ।
हमेशा सत्य के रास्ते पर चले क्योकि यहाँ सत्य के रास्ते पर भीड़ बहुत कम है ।
 कभी भी अपने देश के संविधान का उल्लंघन ना करे .... गौरतलब हो कि हम अपने देश के संविधान का और अपने देश के कानून का पालन करने के लिए बाध्य हैं ना कि  किसी दल विशेष की के विचारधारा को .

 धन्यवाद

 #BhartenduVimalDubey
#BVD26 

Tuesday, 10 December 2019

CAB 2019 पर कुछ गम्भीर सवाल !

   धर्म बताओ नागरिकता पाओ 

पक्ष : नागरिकता संसोधन बिल 2019 का समर्थन करने वाले कह रहे है कि हिन्दू शरणार्थी कहाँ जाएंगे ? क्योकि विश्व मे कोई भी हिन्दू राष्ट्र नही है और मुस्लिमों के लिए बहुत सारे इस्लामिक देश है ।
 विपक्ष  : तो फिर इस बिल में ईसाइयों को नागरिकता देने की बात क्यो की गई ? क्या ईसाइयों के लिए भी कोई देश नहींं है ?

पक्ष : ये बिल तीन देेेश के अल्पसंख्यक समुदाय को नागरिकता देगा !
 विपक्ष  :  तो फिर इस बिल में नास्तिक लोगो को स्थान क्यो नहीं मिला है ? 

भारत में अल्पसंख्यक समुदाय और समस्याएँ

> पहला भाग
◆  अल्पसंख्यक शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है , अल्प मतलब थोड़ा और संख्यक मतलब जनसंख्या !!  यह बहुसंख्यक का विलोम है ।
 ऐसी मानव आबादी ( धर्म , भाषा आदि के आधार पर ) जो किसी देश या राज्य के बाहुल जनसंख्या से कम कुछ सीमित प्रतिशत में हो , उसे अल्पसंख्यक कहते है ।
● भारत मे सबसे बड़ी आबादी हिंदुओ की है और उसके बाद मुस्लिमो की , प्रायः लोग मुस्लिमो को अल्पसंख्यक कहते है लेकिन ज्ञात हो कि भारत मे मुस्लिम अल्पसंख्यको में बहुसंख्यक आबादी है ।
◆ अल्पसंख्यक केवल जाती - धर्म के आधार पर नही बल्कि भाषा , पहनावा आदि के आधार पर भी होते है , सभी प्रकार के अल्पसंख्यको को भरतीय संविधान में उचित सरंक्षण दिया गया है
● अल्पसंख्यक समुदाय : मुस्लिम , जैन , बौद्ध , पारसी , ईसाई  इत्यादि … नास्तिकों को भी अल्पसंख्यक माना जा सकता है ।
> दूसरा भाग
◆  अल्पसंख्यको की सबसे बड़ी समस्या है अपने तौर तरीकों की रक्षा करना ,  अपने भाषा को जीवित रखना  इसीलिए भारत सहित लगभग दुनिया के सभी देशों के संविधानों में अल्पसंख्यको के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं ।

#BVD26

 #BhartenduVimalDubey

Monday, 9 December 2019

हिन्दू - मुस्लिम में फर्क क्यो ? : नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019

हिन्दू - मुस्लिम में फर्क क्यो ? : नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019

मैं नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019 का समर्थन करने वाले लोगों से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ ।

●  क्या हिन्दुओं और मुसलमानों के खून का रंग अलग - अलग होता है ?
◆  क्या मुसलमानों के ईद का चांद और हिंदुओं के करवा चौथ , गणेश चतुर्थी के चांद में अंतर होता है ?
●  क्या हिंदुत्व और शरीयत मानवता से बड़ी है ?
◆  क्या इस बिल को पेश करने से पहले मुस्लिम विद्वानों से विचार विमर्श किया गया है ?
●   क्या आपको नहीं पता  है कि इस बिल का विरोध केवल मुस्लिम ही नही बल्कि हिन्दू समेत अन्य समुदाय के लोग भी कर रहे है ?
◆  क्या आपको पता नहीं है कि असम जैसे राज्यों के अधिकांश लोग ( हिन्दू भी ) इस बिल का विरोध कर रहे हैं ?
●  क्या आपको नहीं पता है कि इससे भारत की जनसंख्या में कितनी वृद्धि होगी ?
◆  दुनिया मे ( पाकिस्तान , बंग्लादेश और अफगानिस्तान में भी ) अधिकांश ऐसे लोग रहते है जो किसी भी धर्म को नही मानते है ।
तो इस बिल में नास्तिक अल्पसंख्यको के लिए कोई प्रावधान क्यो नही किया गया है ?


ऐसे तमाम ऐसे प्रश्न है जिनके बारे में इस बिल में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है ।

#BhartenduVimalDubey 

नागरिकता संसोधन विधेयक ( CAB ) 2019 पर सवाल !

             नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019    
              पक्ष और विपक्ष में पूरी जानकारी  

इस विधयक के कानून बन जाने के बाद सभी गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी
◆ गौरतलब हो कि भारतीय संविधान के हमारे देश के संसद ( लोकसभा + राज्यसभा ) में समय समय पर विधेयक आते रहते हैं और फिर संसद से पारित होने के बाद और महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाते है लेकिन कोई भी विधेयक हमारे संविधान के खिलाफ नही हो सकता है ।
 ● इस विधेयक में साफ साफ लिखा है कि सिख धर्म , ईसाई धर्म , पारसी धर्म , हिन्दू धर्म , जैन धर्म , बौद्ध धर्म के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलेगा ।
अगर साफ शब्दों में कहाँ जाए तो यह विधेयक मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता से वंचित करने के लिए लाया गया है
 और यह विधेयक हिंदुओं को एनआरसी से बचायेगा
● मेरे विचार में यह विधयेक भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्षता सिद्धांत के खिलाफ है ।
हम धर्म - जाती , लिंग - भेद , गोरा - काला के आधार पर बनाये गए सभी कानूनों का विरोध करते है ।

#BhartenduVimalDubey 

Friday, 6 December 2019

भारत की राजनीति व्यवस्था दोष रहित है ?

• विधायकों के खरीद - फरोख्त को रोकने के लिए सबसे पहले राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र स्थापित करने की जरूरत है ।

• संविधान के अनुसार , मुख्यमंत्री का चुनाव विधायक करते है लेकिन वास्तव में ऐसा नही होता है और पार्टी अध्यक्ष द्वारा विधायकों पर मुख्यमंत्री थोप दिया जाता है और फिर व्हिप जारी कर दिया जाता है कि आमुक व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना है , बिचारे विधायक भी दल - बदल कानून के तहत सदस्यता ना जाये इसीलिए वे भी चुप हो जाते है । इस आलाकमान वाले व्यवस्था को बिना हटाये विधयकों के खरीद फरोख्त को नही रोक जा सकता है ।

• आज के आलाकमान वाले युग में विधायकों और सांसदों की अपनी कोई राय ही नहीं है , विधायक और सांसद अपने पार्टी अध्यक्ष के हाथों की कठपुतली मात्र बन कर रह गए है । कब तक नीतियों को बनाने में विधायकों और सांसदों की राय ना जानी जाए तब तक ऐसे अनैतिक कार्य होते ही रहेंगे ।

• ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे राजनीतिक दल केवल अविश्वास प्रस्ताव ( ऐसे प्रस्ताव जिसमें सरकार का बने रहना या गिरना निश्चित होता हो ) के समय ही व्हिप जारी कर सके , बार बार व्हिप जारी करने के स्थिति में विधायक और सांसद कठपुतली मात्र रह जाते है ।


Saturday, 23 November 2019

महाराष्ट्र : शरद पवार NCP को बचाने में हुए कामयाब ?

◆ सरकार ( मुख्यमंत्री ) जनता के वोट से नहीं बल्कि विधयकों के जोड़ - तोड़ से बनती है ।  हमे ये किसने सिखाया ?
: माननीय अमित शाह जी ने

● आधी रात में रक्षक ( सरकार ) भक्षक बन सकते है ।  ये किसने सिखाया ?
:- नरेंद्र मोदी की सरकार ने

◆ आप अपने सभी पापों को कैसे धो सकते है ?
:- बीजेपी जॉइन करके

● आर्थिक मंदी को 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था कौन कह सकता है ?
:- श्रीमती निर्मला सीतारमण जी

◆ ग्लोबल हंगर इंडेक्स को जूठा कौन कह सकता है ?
:- मोदी भक्त

● क्या दिल्ली के प्रदूषण के लिए केवल अरविंद केजरीवाल की सरकार दोषी है ?
:- नहीं, क्योंकि केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्यमंत्री से अधिक उपराज्यपाल का महत्व होता है ।

उपराज्यपाल और राज्यपाल गण महामहिम राष्ट्रपति ( केंद्रीय मंत्रिमंडल ) के प्रति जबाब देह होते है । 

#BVD26

Friday, 22 November 2019

महाराष्ट्र : नेवले और साँप की दोस्ती

वर्तमान राजनीति परिस्थितियों को देखते हुए मैं कहना चाहूंगा कि सरकार को राजनीति शास्त्र के विषय वस्तु से कोरी कल्पना को हटा के यथार्थ को पढ़ाया जाना चाहिए ।

◆ लोकतंत्र की परिभाषा क्या है ?
:- जोड़ो , तोड़ो , पैसे दे कर , EVM हैक करके कुछ भी करके बस सरकार बना लो और जनता के पैसों का इस्तेमाल जनता को सताने के लिए करो 😂

● बीजेपी व अन्य पार्टियों की विचारधारा
:- किसी तरह सत्ता प्राप्त करो ।   सारे फैसले एक - दो लोग मिलकर ही लेते है तो फिर इतने सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों की क्या आवश्यकता है ?

◆ क्या कभी नेवला और साँप की दोस्ती हो सकती है !
:- बिल्कुल हाँ
1. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की दोस्ती
2. बीजेपी और पीडीपी की दोस्ती
3. जेडीयू और आरजेडी की दोस्ती

ये तीनो घटना क्रम देख करके लगता है कि हर किसी की दोस्ती हो सकती है ।

 4. एनसीपी और बीजेपी की दोस्ती
5. जेजेपी और BJP की दोस्ती

अब कांग्रेस और बीजेपी की दोस्ती देखना बाकी है बस  😅

Sunday, 17 November 2019

सबरीमाला मंदिर , मस्जिद , ढोंग , राजनीति और संविधान !!

● क्या आस्था के नाम पर महिलाओं को किसी भी धार्मिक स्थलों पर जाने से रोका जा सकता है ?
:- अगर आप इसका जबाब हाँ में देंगे तो फिर आपके अनुसार आस्था के नाम पर शती प्रथा , बहु-विवाह , बाल-विवाह इत्यादि भी जायज ही होगा ?

◆ मैं ऐसे किसी भी भगवान की पूजा करना पसंद नही करूंगा जो मेरे जन्मदाता अर्थात मेरी माँ , मेरे बचपन की दोस्त अर्थात मेरी बहन , मेरे जीवन संगनी अर्थात मेरी पत्नी व अन्य के साथ भेदभाव करे ।
क्या आप ऐसे भगवान की पूजा करना पसंद करेंगे ?

● एक तरफ आप माँ के ऊपर लिखे कविताओं - गानों को पढ़ करके - गा करके भावूक होने का ढोंग करते है और दूसरी तरफ आप कहते है कि माताओं को सबरीमाला मंदिर , मस्जिदों व अन्य तथाकथित धर्म स्थलों में नहीं जाना चाहिए ।
◆ मेरे हिसाब से आज के 21वीं सदी में आस्था या अन्य किसी भी तथ्यों के आधार पर महिलाओं - पुरुषों या समलैंगिको ( या किसी भी लिंग ) में भेद नहीं किया जाना चाहिए ।
और ना तो हिन्दू - मुस्लिम व अन्य समुदायों में किसी प्रकार का अंतर किया जाना चाहिए । 

Saturday, 16 November 2019

चितम्बरम केस में न्यायधीश बिके हुए है ?

◆ कोई भी केंद्रीय मंत्री सीधे किसी ममले पर फैसला नही करता है, तमाम अधिकारियों और सचिवों के हस्ताक्षर के बाद ही कोई मंत्री हस्ताक्षर करता है तक फिर बिना अधिकारियों पर शक किये डायरेक्ट मंत्री पर शक कैसे किया जा सकता है ? क्या केवल इस लिए की लोकतांत्रिक देशों में जनता राजनीतिकों से डायरेक्ट जुड़ी होती है इसीलिए मंत्री ही जिम्मेदार है ? अब ये कहाँ तक सही है और कहाँ तक गलत इसपर एक छोटे से ब्लॉग में कहना पॉसिबल नही है ।

● हाई कोर्ट ने चितम्बरम से जुड़े एक फैसले में किसी दूसरे केस से जुड़े तथ्यों को कॉपी-पेस्ट किया है इसीलिए तमाम गणमान्य लोगों के द्वारा सवाल किया जा रहा कि क्या न्यायाधीशों को खरीदा जा सकता ??

◆ एक सम्बंधित तथ्य ये भी है कि अक्सर C.B.I और अन्य केंद्रीय एजेंसियों पर सत्ताधारी राजनीतिक दलों के प्रभाव का आरोप क्यो लगता है ?
C.B.I , E.D और अन्य एजेंसियों के काम करने का तरीका क्या है ?
क्या प्रधानमंत्री और सत्ताधारी राजनीतिक व्यक्ति केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग अपने राजनीति फायदे के लिए कर सकते है ?

● क्या वकील संवर्ग हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायधीश नियुक्त होने के लिए " कोलॉजियम " को प्रभावित करने का प्रयास करते है ?
महामहिम राष्ट्रपति की मंत्रिमंडल किस आधार पर " कोलॉजियम " के सिफारिश को ना मंजूर करती है ?

◆ अगला लेख होगा कि आखिर महाभियोग के कानून की क्या आवश्यकता है ?

नोट :- मैं किसी पार्टी विशेष या व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष में नही लिख रहा हूँ । मैं भारतीय संविधान के द्वारा दिए गए अधिकारों व कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए अपने स्वत्रंत विचार रख रहा हूँ । 

Friday, 8 November 2019

फेक न्यूज़ व अफवाहों को कैसे पहचाने ?

हर एक बड़े फैसले के पहले देश के गणमान्य लोगों द्वारा अपील किया जाता हैं कि अफवाहों पर विश्वास ना करे लेकिन यहाँ एक प्रश्न ये उठता कि अफवाहों और रियलिटी में अंतर कैसे करे ? आइए हम समझने का प्रयास करें कि अफवाह और रियलिटी में अंतर कैसे करे ..।
👉 प्रायः अफवाह वाले मैसेज में दिनांक नहीं लिखा होता है :- जैसे की आपको मैसेज मिलता होगा कि किसी राजेश कुमार का 12वीं का रिजल्ट गायब हो गया लेकिन आपको ऐसे मैसेज में डेट नही दिखता होगा कि कब गायब हुआ । प्रायः 2016 के गायब हुए रिजल्ट को 2018 का बता करके वायरल किया जाता है ।
👉 प्रायः अफवाह वाले सूचनाओं में ये नहीं लिखा होता है कि ये सूचना किसके द्वारा प्रेषित किया गया है अर्थात अफवाहों में सोत्रो का नाम नही लिखा होता है ।
👉 आये दिन महीनों पुराने एक्सीडेंट के मामलों को आज - कल का बता करके वायरल किया जाता है लेकिन ऐसे किसी भी अफवाह में डेट और प्रेषित करने वाले का नाम नहीं होता है और ऐसे खबरों में एडिट भी किया होता है ।
👉 आप वायरल खबर को गूगल पर सर्च कर सकते है अगर किसी मीडिया घराने के वेबसाइट पर उस खबर से जुड़ा कोई तथ्य नहीं है तो वो खरब फेक है ।
👉 प्रायः लोग बिना पूरे मैसेज को पढ़े ही फॉरवर्ड कर देते है । अतः बिना पूरे पढ़े - समझे किसी भी खबर को साझा ना करें ।

#BVD26

सिख धर्म और हिन्दू धर्म का कनेक्शन

आज 9 नवम्बर 2019 को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह करतारपुर साहिब के भारतीय हिस्से का करेंगे उद्घाटन और
आज के दिन ही देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी विवाद अयोध्या मामले पर फैसला सुनाएगा ।

यहां बता दे कि सिख धर्म और हिन्दू धर्म का घनिष्ठ संबंध है ।
 ऐसा माना जाता है कि सिख धर्म के धर्म गुरु श्री राम के वंशज थे ।
इस बीच पाकिस्तान पर आरोप लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए कर सकता है ।
इधर नेपाल और पाकिस्तान ने भारत सरकार द्वारा जारी भारत के नए मानचित्र पर सवाल खड़े किए हैं ।

नोट :- सिख धर्म और हिन्दू धर्म मे क्या सम्बंध है और क्या नही हम इसकी पुष्टि नही करते है ।

#BVD26

Monday, 4 November 2019

क्या अयोध्या विवाद का समाधान होगा ?

भला राम - जन्मभूमि से जुड़े विवाद से कौन परिचित नहीं होगा ?
शायद ये दुनिया का सबसे पुराना विवाद है ।

अयोध्या में राम मंदिर बने या फिर मस्जिद मुझे कोई फर्क नही पड़ता है , मैं तो केवल इतना चाहता हूँ कि दंगा - फ़साद में निर्दोष लोगों की जाने ना जाएं ।
किसी स्त्री को बिना कारण विधवा ना होना पड़े ।

क्योकि किसी भी धर्म का सिद्धांत निर्दोष लोगों की जान लेने की आज्ञा नही देता है ।
धर्म एक जीवन शैली है ।
प्रायः सभी धर्मों की मूल - भावना एक ही है :- शांतिपूर्ण वातावरण , परोपकार , मानवता , दयालुता और सभी का भला हो ।

ईश्वर - अल्लहा तेरो नाम , सबको सन्मति दे भगवान ।
सबको सन्मति दे भगवान , सारा जग तेरी सन्तान ।

जारी है ...

नोट :- उपरोक्त लेख से असहमत लोगों से मेरा प्रश्न है कि क्या मंदिर / मस्जिद के लिए लाखों इंसानों को बलि चढ़ाई जा सकती है ??

Team #BVD26 

Thursday, 24 October 2019

मुख्यमंत्री का चुनाव पार्टी नेतृत्व करती है ।

■ सविंधान में लिखा है कि विधायक गण मुख्यमंत्री का चुनाव करेंगे लेकिन यहाँ तो पार्टी के दो चार नेता ( कांग्रेस - सोनिया , राहुल , गुलाम नबी आजाद / भाजपा - अमित शाह और मोदी ) मिल कर सब तय करते है और फिर उसे विधायकों पर लाद देते है और तो और चुनाव खर्च निकालने के लालच में विधायक गण भी कुछ नही बोलते है । क्या यह संविधान का मजाक नही है ? 

त्रिशंकु विधानसभा या त्रिशंकु लोकसभा !!

● त्रिशंकु विधानसभा या त्रिशंकु लोकसभा के स्थिति में सत्ता ऐसे लोगो ( पार्टी ) की कठपुतली बन जाती है जिसे वास्तव में जनता ने नकार दिया हो ।
◆ त्रिशंकु सदन का अर्थ होता है कि किसी भी विशेष पार्टी को पूर्ण बहुमत नही मिला है , ऐसी स्थिति में सरकार का गठन दो या अधिक पार्टीयों या निर्दलीय सदस्यों के सहयोग से होता है
और ऐसे सदस्य मंत्री पद की मांग करते है
और अयोग्य व नकारा हुआ व्यक्ति मंत्री बन जाता है ।
● प्रायः गठबंधन की सरकारे अपना कार्यकाल पूरा नही कर पाती है ।
◆ कई बार त्रिशंकु सदन के स्थिति में फिर से चुनाव कराने की नौबत आ जाती है ।

- #BVD26

Thursday, 17 October 2019

महिला विरोधी त्यौहारों को बंद करना होगा ।

करवा चौथ व्रत जैसे त्यौहार पितृसत्तात्मक समाज के पोषक और प्रतीक है ।
आखिर इस तरह के सभी त्यौहार केवल महिलाओं के लिए क्यो बनाया गया है ??
ज्ञात हो कि मैं यहाँ किसी के धार्मिक भावनाओं को ठेस नही नही पहुँचा रहा हूँ ...
अगर कोई महिला ऐसे व्रतों को अपने मर्जी से करती है तो फिर किसी को आपत्ति नही है
लेकिन अक्सर देखने मे आता है कि तमाम महिलाओं को जबरन ऐसे व्रतों को रखना पड़ता है ।

#BVD26 

महिलाओं को तुक्ष्य क्यो समझा जाता है ?

👉 अभी भी समाज मे महिलाओं को बहुत ही हीन भावना से देखा जाता है , क्या केवल इसीलिए की महिलाओं के पास बच्चे-दानी ( गर्भाशय ) है और पुरुषों के पास नही ?
👉 समाज मे आपको बहुत सारे ऐसे रीति रिवाज दिख जाएंगे जो महिला विरोधी है ।
 क्या महिला विरोधी या कहे तो पुरुष प्रधानता वाले व्रत / रीति रिवाजों को बंद नही किया जाना चाहिए ?
👉 संसार के शाषक वर्ग में भी पुरुषों की ही प्रधानता है ।
अमेरिका जैसे देश मे आज तक कोई भी महिला राष्ट्रपति नही बना है 😱
👉 अभी भी लोग पुरुषों के चाहत में अनेक सन्तान पैदा करते है जिसका सीधा मतलब है कि महिलाओं / लड़कियों को हीन समझा जाता है ।
🤔 सब चाहते है गाय लड़की पैदा करे और इंसान लड़का , क्या केवल इसीलिए की गाय के लड़कियों अर्थात बछिया से स्वार्थ सिद्ध होता है और मनुष्य के लड़कों से ??
👉 मैंने तो यहाँ तक देखा है कि लड़कियों को संतान में भी गिनती नही किया जाता है 🤷‍♂️
👉 और तो और एक महिला खुद चाहती है कि उसके पुत्रो को उसके पुत्रियों से अधिक सुविधाएं उपलब्ध हो । 😱

#BVD26