भ्रम और अफवाह बहुत ही जल्दी फैलता है लेकिन फैक्ट नहीं
पता नहीं लोग व्हाट्सएप ( सोशल मीडिया ) पर वायरल खबरों पर कैसे विश्वास कर लेते है,
हाथ मे मोबाइल है कम से कम गूगल ही कर किया करो, अगर वायरल फ़ोटो, वीडियो या खबर सही होगा तो किसी ना किसी वेबसाइट पर मिल ही जायेगा !!
भाजपा : मुस्लिम पुराने नियमो के अनुसार भारत की नागरिकता ले सकते है ।
अतः भारत में बहुत पहले से ही नागरिकता देने का कानून है ।
CAA 2019 केवल नागरिकता कानून 1995 में संसोधन मात्र है इससे पहले भी मूल कानून में संसोधन हुआ था लेकिन उनमें " धर्म " का जिक्र नहीं था ।
नागरिकता " संसद " का विषय है , " विधानमंडलों " का नहीं ।
प्रदर्शकारियों के अनुसार CAA 2019 तो मात्र ऐसे हिंदुओ को नागरिकता देने के लिए लाया गया है जो " असम के NRC " से बाहर हो गए थे ।
विकिपीडिया :-
पता नहीं लोग व्हाट्सएप ( सोशल मीडिया ) पर वायरल खबरों पर कैसे विश्वास कर लेते है,
हाथ मे मोबाइल है कम से कम गूगल ही कर किया करो, अगर वायरल फ़ोटो, वीडियो या खबर सही होगा तो किसी ना किसी वेबसाइट पर मिल ही जायेगा !!
भाजपा : मुस्लिम पुराने नियमो के अनुसार भारत की नागरिकता ले सकते है ।
प्रदर्शनकारी : तो फिर धर्म के आधार पर CAA 2019 लाने की जरूरत क्यो पड़ी ?
जिस नियम से मुसलमानों को नागरिकता दे रहे है, उन्ही नियम से अन्य लोगो को भी नागरिकता दीजिए ।
भारत मे नागरिकता का कानून तो बहुत पहले से ही है ।
भाजपा अपने ही तर्को में उलझती नजर आ रही है ।
भाजपा के अनुसार प्रदर्शनकारियों को कुछ नहीं पता है जबकि भाजपा नेता खुद CAA को CCA लिखते है
और लोगो को समझाने के बजाए केवल रैली करते है और कहते है कि यह नागरिकता लेने का नहीं बल्कि देने का कानून है
जबकि मंत्री जी ने ही CAA 2019 + NRC का क्रोनोलॉजी समझाया था
और लोगो को इसी क्रोनोलॉजी से दिक्कत है ।
खैर "असम" और "पूर्वोत्तर भारत" की समस्या और व्यापक है ।
CAA 2019 का मतलब Citizenship Amendment ACT ( नागरिकता संसोधन कानून ) ।
पूरे नाम से ही स्पष्ट है कि यह एक संसोधन कानून कानून है ना कि मूल कानूनअतः भारत में बहुत पहले से ही नागरिकता देने का कानून है ।
CAA 2019 केवल नागरिकता कानून 1995 में संसोधन मात्र है इससे पहले भी मूल कानून में संसोधन हुआ था लेकिन उनमें " धर्म " का जिक्र नहीं था ।
नागरिकता " संसद " का विषय है , " विधानमंडलों " का नहीं ।
प्रदर्शकारियों के अनुसार CAA 2019 तो मात्र ऐसे हिंदुओ को नागरिकता देने के लिए लाया गया है जो " असम के NRC " से बाहर हो गए थे ।
विकिपीडिया :-
भारतीय राष्ट्रिकता विधि (इंडियन नेशनैलिटी लॉ) के अनुसार भारत का संविधान पूरे देश के लिए एकमात्र नागरिकता उपलब्ध कराता है। नागरिकता से सम्बन्धित प्रावधानों को भारत के संविधान के द्वितीय भाग के अनुच्छेद 5 से 11 में दिया गया है। प्रासंगिक भारतीय कानून नागरिकता अधिनियम 1955 है, जिसे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 1986, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 1992, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2003 और नागरिकता (संशोधन) अध्यादेश 2005 के द्वारा संशोधित किया गया है, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2003 को 7 जनवरी 2004 को भारत के राष्ट्रपति के द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी और 3 दिसम्बर 2004 को यह अस्तित्व में आया। नागरिकता (संशोधन) अध्यादेश 2005 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किया गया था और यह 28 जून 2005 को अस्तित्व में आया।
इन सुधारों के बाद, भारतीय राष्ट्रीयता कानून, क्षेत्र के भीतर जन्म के अधिकार के द्वारा नागरिकता (jus soli) के विपरीत काफी सीमा तक रक्त के सम्बन्ध के द्वारा नागरिकता (jus sanguinis) का अनुसरण करता है।
धन्यवाद
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