Thursday, 23 January 2020

केवल CAA से क्या परेशानी है ?

             उत्तर भारत मे CAA का विरोध    

अगर आप CAA को NRC से अगल करके देखेंगे तो आपको निम्नलिखित एक दिक्कत ही मिलेगा ।

भारतीय संविधान के अनुसार भारत में कोई भी कानून धर्म के आधार पर नहीं बन सकता है इसीलिए मुसलमानों व पारसियों को आरक्षण नही मिला था और इस कानून में साफ - साफ धर्मो का उल्लेख है ।
इस कानून के बाद मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर सकता है ।।

[ वैसे किसी कानून के संवैधानिक या असंवैधानिक होने का फैसला भारत की तथाकथित स्वत्रंत न्यायपालिका करती है ]
【 श्रीमती इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा किया था और न्यायपालिका ने उसे संवैधानिक घोषित किया था फिर लोगो ने विशेषकर JP ने आपातकाल का घोर विरोध किया था 】

दूसरी तरफ अगर आप गृह मंत्री अमित शाह के भाषणों पर ध्यान देंगे तो आप पाएंगे कि CAA , NPR और NRC तीनो एक दूसरे से सम्बंधित है ।

        असम व पूर्वोत्तर भारत मे CAA का विरोध  
◆  पूर्वोत्तर भारत विशेष रूप से असम की स्थिति इस से अलग है आप मेरे पुराने ब्लॉग्स में पढ़ सकते है कि किस तरह से CAA का विवाद पूर्वोत्तर भारत के लिए और उत्तर भारत के लिए अलग अलग है ।

आर्टिकल-14 : समानता का अधिकार
भारत के संविधान में यह कहा गया है कि राज्य, भारत के राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता से या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा. भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 के हिसाब से इसका मतलब यह है कि सरकार भारत में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगी. 

Keys :-
 * CAB 2019 = नागरिकता संसोधन बिल 2019 / Citizenship Abetment Bill 2019
* संसद से पारित होने के बाद और महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद CAB , CAA हो गया है
CAA 2019 = नागरिकता संसोधन कानून 2019 / Citizenship Abetment Act 2019

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