Saturday, 19 September 2020

बेरोजगारों को बदनाम करने वाले सोशल मीडिया मैसेज का छोटा सा जबाब -

 भाजपा समर्थकों के द्वारा एक मैसेज हर जगह "चेपा" जा रहा है, मेरे whatsapp में भी ये मैसेज चेपा गया - मैंने ध्यान से पढ़ा तो पाया कि उसमें लिखा है कि रोजगार देना सरकार का काम नहीं है, आप खुद आत्मनिर्भर बनिए - 

#BhartenduVimalDubey ने मैसेज चेपने वालो के लिए छोटा सा जबाब रूपी सवाल लिखा है, पहले उसे पढ़िए फिर अंतिम में उस चेपे हुए मैसेज को भी देखिए -  और खुद से तुलना कीजिए - 

#BhartenduVimalDubey के जबान रूपी सवाल - 

1. आपके हिसाब से लोग BA / MA कर लिए है फिर भी उनके पास कोई हुनर नहीं है ? तो क्या इसके लिए केवल छात्र ही जिम्मेदार है ? स्कूल, अध्यापक की कोई जिम्मेदारी नहीं है ?
2. और अगर आपके हिसाब से BA / BSC / B. Com करने के  बाद लोगो मे कोई टैलेंट नहीं आता है तो फिर सरकार इन डिग्रीयों को बंद क्यो नहीं कर दे रही है ?
3. शिक्षा मंत्रालय को एक सर्कुलर निकालना चाहिए कि BA / BSC करने के बाद किसी को नौकरी नहीं मिल सकती है इसीलिए आप लोग नीचे मेंशन कुछ काम सीखे ।
4. जो लाखो युवा सरकार द्वारा आयोजित परीक्षाओं को पास करने के बाद भी बेरोजगार है, उनका क्या ? क्या वे अब फिर से शुरुआत करे ?
5. अगर सरकार को नौकरी देना ही नहीं है तो फिर आवेदन निकाल करके फॉर्म क्यो भरवाती है ? केवल अपना खजाना भरने के लिए ?
6. और अगर नौकरी देना सरकार का काम नहीं है तो फिर मई 2014 के पहले मोदी जी व भाजपा तत्कालीन सरकार से सवाल क्यो करती थी ?
7. मोदी जी व अन्य भाजपा नेताओं के मई 2014 के पहले वाले tweets व videos मौजूद है । 


8. युवा बेरोजगार केवल हमारे ही देश मे है क्योकि हमारे यहाँ की सरकार ध्यान भटकाने के अलावा कुछ और करना ही नहीं चाहती है ।
9. यहाँ के युवा नहीं बल्कि नेता कुर्सी गरमाते है ।
10. ऐसे राजनेता सच मे देश के लिए अभिशाप है जो चुनाव के पहले किए गए वादों को पूरा नहीं करते है
11. शर्म आनी चाहिए खुद के नाकामी को "युवाओं की अकर्मण्यता" कहते हुए ।
12. और अगर डिग्री से नौकरी नहीं मिल सकती है तो फिर हमारे माँ - बाप डिग्री के लिए लाखों पैसा क्यो बर्बाद करे ? बंद कर दीजिए डिग्रीयों को और डिग्रीयों के स्थान पर कुछ ऐसा चालू कीजिए जिससे रोजगार मिले -
13. और अगर सरकारें रोजगार उपलब्ध नहीं करवा सकती है तो जनता Directly - Indirectly हजारों रुपये टैक्स क्यो दे ? 

तो मेरे प्यारे देशवासियों, समय रहते ऐसे झूठे राजनेताओं को पहचानिए जो चुनाव के दौरान किए गए वादों को नहीं पूरा करते है , अन्यथा ये ऐसे ही अपने नाकामियों को आपके "कर दाता" माता - पिता और आपके मथे मढ़ते रहेंगे ।

विश्व के 50 से अधिक देशों में काबिलियत के अनुसार रोजगार उपलब्ध करवाने का काम सरकार का है, रोजगार ना मिलने पर सरकारें "उचित बेरोजगारी भत्ता" देती है । 

अमेरिका, कनाडा जैसे देशों की सरकारे अपने यहाँ के युवाओं को अनेकों सुविधाएं मुहैया करवाती है और हम यहाँ 25 - 26 साल का युवा वर्ग केवल नेताओ का जय - जयकार करके समय बर्बाद कर रहे हैं । कुछ नहीं होने वाला इससे । कितना ही नेताओ का "जप नाम जप नाम" करते रहिए,
चुनाव के समय सही को चुनिए, जो अपने वादों को पूरा करे 

नोटबन्दी, किसान विरोधी बिल, अम्बानी निर्भरता ( आत्मनिर्भरता ) का समर्थन केवल इसीलिए मत करो क्योकि इस का जिक्र उस व्यक्ति ने किया है जिसे आप किसी कारणवश "देश से भी बड़ा" मानते हो । 

पसन्द तो लोग दारू - सिगरेट को भी करते है, परन्तु स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है ना -?

आत्मनिर्भरता के कमियों पर नजर डालो, उन्हें पहचानो, समझो और विरोध करो ।
आत्मनिर्भरता के नाम पर लाभ में रहने वाले PSUs को भी उद्योगपतियों को दे करके देश को गुलाम बनाया जा रहा है - 
भ्रमजाल से निकलिए की "आत्मनिर्भरता" से आपको या देश को लाभ होगा ।
पिछले 4 सालों से देश की अर्थव्यवस्था नीचे खिसक रही है लेकिन कुछ व्यक्तियों की संम्पति इतनी बढ़ रही है कि वे दुनिया के चौथे - पांचवे नम्बर के धनी व्यक्ति बन गए है ।

💐 जय भारत - जय भारती 💐
#BhartanduVimalDubey 
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अब एक नजर चेपे हुए मैसेज पर - 

*आइये मिलकर बढ़ती बेरोज़गारी के कारणों पर एक नज़र डालें...*


किसी बेरोज़गार से सवाल करो...

1. मजदूरी करोगे....? 

    - नहीं

2. दुकान पर काम करोगे..? 

    - नहीं

3. बाइक / कार का काम जानते हो..?

    - नहीं

4. बिजली मैकेनिक बनोगे...?

    - नहीं

5. पेंटिंग का काम आता है..?

    - नहीं

6. मिठाई बनाना जानते हो...? 

    - नहीं

7. प्राइवेट कंपनी में काम करोगे? 

     - नहीं... 

8. मूर्तियां, मटके, हस्तशिल्प वगैरह कुछ बनाना आता है? 

     - नहीं.

9. तुम्हारे पिता की ज़मीन है?

     - हाँ.

10. तो खेती करोगे ?

     - नहीं!!!! 


ऐसे 10 - 20 प्रश्न और पूछ लो जैसे - सब्ज़ी बेचोगे ? फ़ेरी लगाओगे? प्लम्बर, बढ़ई / तरखान, माली / बागवान, आदि का काम सीखोगे ??

      - सब का जवाब ना में ही मिलेगा।।


फिर पूछो...

11. भैया किसी  कला मे निपुण तो होगे...?

    - नहीं।। पर मैं B. A. पास हूँ , M.A. पास हूँ I    

      डिग्री है मेरे पास।।

12. बहुत अच्छी बात है पर कुछ काम जानते हो ? कुछ तो काम आता होगा सैकड़ों की संख्या में काम है ?

    - नहीं.  काम तो कुछ नहीं आता I😇


बताओ अब ऐसे युवा बेरोज़गार सिर्फ हमारे ही देश में क्यूँ है?

 क्योंकि हमारा युवा दिखावे की जिंदगी जीने का आदी हो गया है l यहां सबको कुर्सी वाली नौकरी चाहिए जिसमें कोई काम भी ना करना पड़े l ऐसा युवा सच में देश के लिए अभिशाप ही है l जहां अपनी आजीविका के लिए भी काम करने से हिचकिचाता है l

शर्म आनी चाहिए खुद की कमजोरी को बेरोजगारी का नाम देते हुए l

हर साल लाखों बच्चे डिग्री लेके निकलते है पर सच कहूँ तो सब के हाथ में काग़ज़ का टुकड़ा होता है हुनर नहीं l जब तक आप खुद में कुछ हुनर पैदा करके उसको आजीविका अर्जन में प्रयोग मे नहीं लाते तब तक ख़ुद को बेरोजगार कहने का हक़ नहीं है किसी का भी l

रही बात सरकारों की ये तो आती रहेंगी जाती रहेंगी कोई भी सरकार 100% सरकारी रोज़गार नहीं दे सकती l तो मेरे प्यारे देशवासियों, समय रहते भ्रामक दुनिया से निकलने का प्रयत्न करो और अपनी काबिलीयत के अनुसार काम करना शुरू करो l अन्यथा जीवन बहुत मुश्किल भरा हो जाएगा l

जापान और चाइना जैसे देशों में छोटा सा बच्चा अपने खर्च के लिए कमाने लग जाता है l और हम यहां 25-26 साल का युवा वर्ग केवल सरकारों की आलोचना करके समय की बर्बादी कर रहा है l कुछ नहीं होने वाला इनसे। कितने भी आंदोलन कर लीजिए किसी सरकार को कुछ फर्क़ नहीं पड़ने वाला l अंततः परिश्रम अपने आप को ही करना पड़ता है l 

किस्मत रही तो आपको भी जरूर सरकारी नौकरी मिलेगी l लेकिन सिर्फ इसके भरोसे मत बैठो l 


आत्मनिर्भरता के मूल मंत्र का विरोध केवल इस लिये मत करो क्योंकि इस का ज़िक्र उस व्यक्ति ने किया है जिसे आप किसी कारणवश पसंद नहीं करते हो। 


पसंद तो कोई कड़वी दवाई या पीड़ादायक इंजेक्शन को भी नहीं करता परन्तु स्वास्थ्य लाभ के लिए उन्हें लेना ही पड़ता है। 


आत्मनिर्भरता के लाभों पर नज़र डालो, उन्हें पहचानो, समझो और अपनाओ। सरकारी नौकरी के भ्रमजाल से निकल कर नौकरियां मांगने के बजाय नौकरियां पैदा करने की ओर ध्यान दो। रोज़गार मांगने के बजाय ऐसे उपाय करो कि अपने जैसे लाखों को रोज़गार दे पाओ।

🌷🌷 *जयश्रीकृष्णा*🌷🌷

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Thursday, 17 September 2020

प्रधानमंत्री को खुला पत्र !

आदरणीय प्रधानमंत्री जी । 
आपके कुशल नेतृत्व के कारण ही आज देश में खुशहाली हैं ।
जिस प्रकार आपने lockdown मे मजदूरों की मदद की 
उनके घर जाने का प्रबंध किया 
उन्हें भोजन आवास की सुविधा प्रदान की, जिसके कारण किसी मजदूर की मौत नहीं हुई
 कोई पैदल नहीं चला, भूखा नहीं सोया
 किसी बच्चे के पैर में छाले नहीं पड़े कोई मालगाड़ी से कटा नहीं..?
आपके युवा सोच के कारण ही आज देश में कोई युवा बेरोजगार नहीं, किसी की नौकरी भी नहीं गई, 
अर्थव्यवस्था भी मजबूत हैं
और कोरोना के मामले में हम दुनिया मे दूसरे स्थान पर नहीं है

देश में आज भाईचारे का माहौल है धर्म के नाम पर दिल्ली मे कोई दंगे नही हुये,
 किसानों पर हरियाणा में लाठियां नहीं बरसाई गई, 
असम बिहार में बाढ़ ही नहीं आई इसलिए राहत पैकेज की जरूरत ही नहीं पड़ी,
महंगाई तो छूमंतर हो गई हैं और गरीबों के अच्छे दिन भी आ गए हैं
देश सुरक्षित हाथों में है..? 

आपसे बहुत कुछ कहना है लेकिन आपके पास समय नहीं होगा इसीलिए संक्षिप्त में आपने बातो को कह रहा हूँ ।

इसीलिए आपकी भाजपा "सरकार" से सवाल पूछने वाले सभी लोगो को "विदेशी" या "देशद्रोही" कहती है ।
 इसीलिए दिनांक 17 सितंबर को राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस पर ट्वीट करने वाले सभी लोगो को आपकी पार्टी विदेशी व देशद्रोही कह रही है ।
जब कि आपके खुद के 60% Twitter Followers फेक है ।

वैसे भी कभी आप कहा कुछ करते है ?
सब तो नेहरू का किया धरा है ना ?
नेहरू प्रधानमंत्री ना होते तो आज "नेपाल" भी भारत मे होता, वैसे नेपाल भारत मे कब था ?

आपकी आईटी सेल "महिला आयोग" व "महिला व बाल विकास मंत्रालय" के सहमति से महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक शब्दो का इस्तेमाल करती है, उमीद है कि आपकी भी सहमति होगी ।

वैसे भी आपकी सह पर चलने वाली उत्तर प्रदेश सरकार नया रॉलेट एक्ट ले करके ही आयी है । 
किसान अध्यादेश को आप उसी प्रकार किसानों व छोटे व्यापारियों के हित मे बता रहे है , जैसे नोटबन्दी और GST को बता रहे थे -
अब ये तो सबको पता है कि नोटबन्दी, Privatization, GST आदि से किसको फायदा हुआ है या होगा -

धन्यवाद 


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 Boycott Godi Media ... 
Support True Journalists ... 

( रवीश कुमार से प्रेरित )

Monday, 14 September 2020

आज़ाद भारत का रॉलेट एक्ट - UP SSF

आखिर हम UPSSF को आजाद भारत का रॉलेट एक्ट क्यो कह रहे है ? 
और "उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल" ( UPSSF ) क्या है ? इसका विरोध क्यो हो रहा है ? क्या UPSSF लोकतंत्र के लिए घातक है ? 

आइए पहले थोड़ा फ़्लैश बैक में चलते है और याद करते है कि किस तरह भाजपा ( सरकार ) ने बड़े जोर-शोर से 13 अप्रैल 2019 को जलियांवाला बाग नरसंहार की 100वीं बरसी मनाया थी 
...  ...   ... 
...  ...   ... 

1. ये जलियांवाला बाग हत्याकांड क्या है/था 

जालियाँवाला बाग हत्याकांड भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के निकट जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 ( बैसाखी के दिन) हुआ था। रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं, जिसमे अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 1000 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए । 
यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था। माना जाता है कि यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी । 

१९९७ में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी । २०१३ में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। विजिटर्स बुक में उन्होंनें लिखा कि "ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी ।  

2. रॉलेट एक्ट में ऐसा क्या था कि इतने बड़े पैमाने पर उसका विरोध हो रहा था ? 

रॉलेट नामक कानून 1919 ई. में अंग्रेजी सरकार द्वारा भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से निर्मित कानून था ।  
रॉलेट एक्ट का सरकारी नाम The Anarchical and Revolutionary Crime Act of 1919 था । 
इसे काला कानून भी कहते है ।

इसके द्वारा ब्रिटिश सरकार को यह अधिकार प्राप्त हो गया था कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए उसे जेल में बंद कर सके 
मतलब अगर कोई मुकदमा ना किया हो तो भी "अफसर" ऐसे ही किसी को "उठा" सकते थे क्योकि इस क़ानून के तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाले का नाम जानने का प्रारंभिक अधिकार भी समाप्त कर दिया गया था ।  
वास्तव में क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलने के नाम पर ब्रिटिश सरकार भारतीयों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को समाप्त कर देना चाहती थी । इस कानून द्वारा वह चाहती थी कि भारतीय किसी भी राजनीतिक आंदोलन में भाग न ले । 
कुल मिलाकर इस कानून का उद्देश्य देश और सरकार के बीच के अंतर को समाप्त करके, लोगो के मौलिक अधिकारों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और बचे खुचे लोगो को भी पूर्ण गुलाम बनाना था । 

3. अब बात करते है कि "UPSSF" क्या है

मानसून सत्र में विधान मंडल से पारित "उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल विधेयक, 2020" को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह अधिनियम की शक्ल में लागू हो गया है । 
 "इमेज - अमर उजाला ब्यूरो"  

प्रस्तुत इमेज व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी गई सूचना के आधार पर कुछ मूलभूत सवाल / आपत्तियां -

a. इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के मद्देनजर यूपी एसएसएफ के गठन का निर्णय किया गया है । 
इसके क्या मायने है ? 
क्या कोर्ट भी "रॉलेट एक्ट" जैसे कानून का समर्थन करता है ? ठहरिए मैं न्यायालय पर सवाल नही खड़े कर रहा हूँ और ना ही मैं न्यायालय की अवमानना नहीं कर रहा हूँ बल्कि मैं संविधान द्वारा दिये गए अधिकारों का उपयोग करते हुए अपनी शंकाएं व्यक्त कर रहा हूँ
 ( आज के दौर में बताना जरूरी है कि सवाल करना हमारा संवैधानिक अधिकार है और संविधान सभी कानूनों व सरकार से ऊपर है । ) 

b. निजी कम्पनियां भी लाभ ले सकेंगी मतलब SSF भी अंबानी व अडानी के लिए ही काम करेगा ? 
अरे, अधिकांश कंपनियों के मालिक विश्व के चौथे नंबर के धनी व्यक्ति व "भाजपा के प्रिय" अंबानी व अडानी ही है ना ? 

c. बिना सरकार के इजाजत के कोर्ट भी नहीं ले सकेगा संज्ञान ... तो क्या योगी सरकार जिसे अपना धुर विरोधी मानती हैै, जिसे बिना SSF के 6 महीनों तक जेल में रखी थी , अरे वही डॉ० कफ़ील खान और अन्य को कभी इज्जात देगी ? 
नहीं ना , मतलब तो ऐसे लोग हमेशा जेल में ही "सड़ते" रहेंगे ? 
 
d. SSF कर्मियों पर केस नहीं ... हॉल ही में एक SP ने एक व्यापारी से 6 लाख की रिश्वत मांगी थी, फिर उस व्याापारी ने एक वीडियो बना करके वायरल किया था , अंत मे उस व्यापारी की मौत हो गई ( न्यूज़ में देखा ही होगा ) ... तो क्या SSF के सभी कर्मी दूध के धुले होंगे ? क्या उनके मन मे सत्ताधारी दल के "वोट बैंक" के मुताबिक काम करके "प्रमोशन" पाने की लालसा नहीं होगी ? ... या क्या कोई SSF कर्मी उस SP की तरह किसी की हत्या नहीं करवा सकता है ? करवा सकता है ना ? तो फिर SSF कर्मियों को जांच से छूट क्यो ? .... 

e. हर कर्मी हमेशा ड्यूटी पर माना जाएगा ... मतलब अगर किसी SSF कर्मी का उसके किसी पड़ोसी के साथ झगड़ा हुआ तो क्या वह SSF कर्मी अपने पद का गलत उपयोग नहीं करेगा
 ( जो वास्तव में ड्यूटी पर नहीं था क्योकि कोई 24 घण्टे की ड्यूटी नहीं कर सकता है ) 
★ 
 4. मुझे पता है कि इन सवालों पर मुझे किस तरीके का जबाब मिलेगा - एक दृष्टि उस पर भी ( सम्भावना )
 सब तेरे तरह नहीं होते है । 
सरकार पर विश्वास करना सीखो । 
तुझे केवल कमियां निकाले ही आता है ।
अरे, सुन ये योगी सरकार है , टोटी चोर अखिलेश या मूर्ति बाज मायावती की सरकार नहीं । 

लेकिन वास्तविकता तो आपको पता ही है कि कैसे एक मामूली सा कांस्टेबल भी लोगो को अपनी धौक दिखाता है ? 
दिल्ली दंगो को ले करके भी दिल्ली पुलिस पर भी कई तरह के सवाल उठ रहे है - 
भाजपा ने खुद सुशांत केस और पालघर केस को ले करके मुंबई ( महाराष्ट्र ) पुलिस पर कई तरह के सवाल खड़े किए है - 
सोचिए जब दिल्ली व मुंबई पुलिस जैसे "काबिल" फ़ोर्स पर सवाल खड़े हो सकते है तो फिर मुँह से "ढाय - ढाय" की आवाज निकालने वाली "यूपी पुलिस" व सरकार तो पक्षपात नाकामियों के लिए बहुत पहले से बदनाम है ।  

5. रॉलेट एक्ट और UPSSF में समानता :- 

रॉलेट एक्ट के तरह ही UPSSF द्वारा "बल" ( सरकार ) को कुछ ऐसी शक्तियां दी गई है जिसे कोर्ट में चुनौती ना दी जा सके और सरकार विरोधी आवाजो को कुचला जा सके ... 
 रॉलेट एक्ट की तरह ही UPSSF का उपयोग पुलिस कर्मी अपने निजी हित के लिए कर सकते है,  कार्यवाही की धमकी दे करके रिश्वत की मांग कर सकते है ... 
गौरतलब हो कि रॉलेट एक्ट का विरोध करते हुए हमारे पूर्वज "जलियांवाला बाग" में शहीद हो गए थे जिससे हम "स्वतंत्रता" पूर्व जीवन जी सके । 
  UPSSF आजाद भारत का रॉलेट एक्ट है या नहीं ? इसका निर्णय आप खुद करे । 

"Uttar Pradesh Special Security Force" जैसे अधिनियम लोकतंत्र के लिए घातक है या नहीं ? इसका निर्णय भी खुद आप ही कीजिए । 
वैसे रॉलेट एक्ट और UPSSF में एक मामूली अंतर है कि रॉलेट एक्ट एक विदेशी सरकार द्वारा लाया गया था जबकि UPSSF "जनता द्वारा चुनी हुई पूर्ण बहुमत वाली सरकार" द्वारा लाया गया है । 

इस कानून को प्रथम दृष्टया देखने पर जो "कमियां" नजर आई है हमने वही यहाँ लिखा है , 
जब सरकार SSF के लिए नियम - उपनियम बनाएगी, जब इसके बटालियन का निर्धारण होगा , तब कही जा करके इसके मुख्य "लोकतंत्र विनाशी शक्तियां" प्रकाश में आएगी, वैसे उसके लिए भी हमको बहुत मेहनत करनी पड़ेगी क्योकि भारत मे "पत्रकारिता" विलुप्त होने के कगार पर है । 

नोट - योगी आदित्यनाथ जब सासंद थे तो अखिलेश यादव सरकार में पुलिस कार्यवाही से परेशान हो करके भरी लोकसभा में रोए थे, मतलब भारत अभी भी लगभग लोकतंत्र ही है, कही भाजपा सत्ता से बाहर गयी तो फिर नई सरकार भी इस कानून का गलत इस्तेमाल कर सकती है ना ? ( ताकि सनद रहे ) 



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शीषर्क क्रेडिट -  डॉ० श्वेता अग्रवाल 
सोत्र - प्रारंभिक इतिहास और उत्तर प्रदेश सरकार 

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Wednesday, 2 September 2020

कोरोना वायरस :- रिकवरी रेट के नाम पर अपनी पीठ थपथपाने वाली मोदी सरकार आप से झूठ बोल रही है -

कोरोना पर स्वास्थ मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस संकर्मण से ठीक होने वालों की संख्या करीब 75 प्रतिशत है। सोशल मीडिया में भी सरकार समर्थित लोग इस बात का जोरशोर से प्रचार कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार कोरोना से निपटने में कारगर कदम उठा रही है । 
मोदी सरकार recovery रेट के नाम पर अपनी पीठ थपथपा रही है लेकिन भारत recovery रेट के मामले में भी तमाम देशों से पीछे है । 

सबसे पहले उन देशों की बात करते हैं जहां एक लाख से अधिक मामले आ चुके हैं और उनकी रिकवरी रेट दुनिया में सबसे बेहतर है। कतर, तुर्की, चिली, पाकिस्तान और जर्मनी इस सूची में सबसे आगे हैं।

कतर में सबसे अधिक 97.13 प्रतिशत मरीज ठीक हो चुके हैं। वहीं तुर्की में 92.92 प्रतिशत, चिली में 92.70 प्रतिशत, पाकिस्तान में 91.60 प्रतिशत और जर्मनी में 91.08 प्रतिशत मरीज ठीक हो चुके हैं । 

* आंकड़े 10 अगस्त तक के है * 

सोत्र / पढ़े - News Bytes 

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रिकवरी रेट की चादर से मत ढँको कोरोना से 58,390 लोगों की मौत को


डबलिंग रेट के बाद रिकवरी रेट मिल गई है। लेकिन इसमें भी भारत दुनिया में 11 वें नंबर पर है।   रिकवरी रेट के मामले में पाकिस्तान भारत से बहुत आगे हैं। चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। भारत में कोरोना के संक्रमित मामलों की संख्या 31 लाख से अधिक हो चुकी है। अगले 24 घंटे में 32 लाख से अधिक हो जाएगी। पिछले 24 घंटे में  60,975 मामले सामने आए और 848 लोगों की मौत हुई है। 


58,390 लोगों की मौत सामान्य घटना नहीं। इसलिए सतर्क रहें। प्रोपेगैंडा की चपेट में न आएँ। झूठ ने आपको बेरोज़गार किया। झूठ आपकी ज़िंदगी लेना चाहता है। 

* आंकड़े 25 अगस्त तक के है *

सोत्र / पढ़े - रवीश कुमार ( फेसबुक ) 

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 कोरोना से होने वाले मौतों में भी भारत अब तीसरे स्थान पर आ गया है । 

 टोटल केेेस के मामले में भी भारत दूसरे स्थान पर आने वाला है । 

 * आंकड़े 2 सितंबर 2020 तक के * 

बाकी आप खुद समझदार है । 

पढ़े :- ये एंटीजेन और PCR टेस्ट का क्या लफड़ा है ? 

YouTube :- Bhartendu Vimal Dubey 

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