Wednesday, 24 June 2020

क्या बारकोड के शुरुआती तीन अंकों से Made In China का पता लगाया जा सकता है ? क्या "690 से लेकर 699 तक से शुरू होने वाले बारकोड" चीनी उत्पादों के हैं ? पढ़िए सच

क्या बारकोड के शुरुआती तीन अंकों से Made In China का पता लगाया जा सकता है ? क्या "690 से लेकर 699 तक से शुरू होने वाले बारकोड" चीनी उत्पादों के हैं ?

वायरल पोस्ट क्या है? 
वायरल पोस्ट के मुताबिक, “690 से लेकर 699 तक से शुरू होने वाले बारकोड चीनी उत्पादों के हैं क्योंकि यह संख्या चीन का कंट्री कोड है।” पोस्ट में यह भी कहा जा रहा है कि “अगर कोई बारकोड 890 से शुरू होता है तो यह भारत का कंट्री कोड है । ”
क्या दावा किया जा रहा है? 
दावा किया जा रहा है कि इस बारकोड से हिंदुस्तानी मेड इन चाइना चीजों की पहचान कर सकते हैं। यह पोस्ट फेसबुक पर हैशटैग “#boycottchinaproducts” के साथ वायरल हो रही है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो काफी शेयर किया जा रहा है ।  

फैक्ट चेक
वायरल पोस्ट भ्रामक है, बारकोड संख्या के पहले तीन अंक उस देश की ओर इशारा नहीं करते, जहां उस प्रोडक्ट का निर्माण हुआ है। यह सही है कि बारकोड के शुरू में लगने वाले अंक (prefixes) 690 से 699 तक चीन को मिले हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जितने प्रोडक्ट्स में ये प्रीफिक्स जुड़े हों, वे सभी चीन में बने हैं ।  

कैसे काम करता है बारकोड?
किसी प्रोडक्ट पर काली सफेद रेखाओं की एक पट्टी होती है, जिसे बारकोड कहते हैं। यह दुनिया भर में सभी कंज्यूमर प्रोडक्ट पर होता है। बारकोड्स, प्रोडक्ट के आंकड़े को विजुअल फॉर्म में पेश करने की एक विधि है जिसे मशीन द्वारा पढ़ा जा सके। आम तौर पर इसके ठीक नीचे प्रोडक्ट नंबर भी लिखा होता है। इस यूनीक नंबर को ग्लोबल ट्रेड आइटम नंबर (GTIN) कहते हैं, जिससे किसी प्रोडक्ट की पहचान होती है।
बारकोड के साथ इस्तेमाल होने वाले इस यूनीक नंबर को GS1 नाम की संस्था उत्पादकों को जारी करती है। यह संस्था एक वैश्विक गैर-लाभकारी संगठन है । 

क्या दर्शाते हैं बारकोड प्रीफिक्स?
किसी बारकोड संख्या में पहले तीन अंक काफी अहम हैं। वे यह नहीं दर्शाते हैं कि प्रोडक्ट किस देश में निर्मित हुआ है, बल्कि यह दर्शाते हैं कि यह कंपनी किस देश में स्थित है। जब कोई कंपनी GS1 प्रीफिक्स के लिए आवेदन करती है तो वह सिर्फ यह बताती है कि वह कहां स्थित है और प्रीफिक्स प्राप्त करने के बाद वह दुनिया में कहीं भी अपने प्रोडक्ट का निर्माण कर सकती है। 
इसका मतलब यह हुआ कि जहां के लिए उसे प्रीफिक्स नंबर मिला है, वहां उसका हेडक्वार्टर या दफ्तर है, लेकिन उसके प्रोडक्ट दूसरे देशों में भी बनाए जा सकते हैं।
GS1 की वेबसाइट के मुताबिक, “GS1 प्रीफिक्स यह नहीं बताते कि प्रोडक्ट विशेष तौर पर किस देश में बना है या किस विशेष कंपनी ने बनाया है; ये प्रोडक्ट दुनिया में कहीं भी बनाए जा सकते हैं।”
यह सही है कि GS1 प्रीफिक्स संख्या 690 से लेकर 699 तक चीन को मिली है और ‘890’ भारत को मिली है, लेकिन इन संख्याओं का यह मतलब नहीं है कि यह प्रोडक्ट इन्हीं देशों में बना है। GS1 कंपनियों को प्रीफिक्स का आवंटन कंट्री कोड के आधार पर करती हैं।
उदाहरण के लिए, अगर भारतीय कंपनी ने चीन से कोई प्रोडक्ट आयात किया और उसे ​रीपैकेज करके बांग्लादेश को निर्यात किया, तो इस प्रोडक्ट पर भारत का बारकोड होगा। ऐसे में एक बांग्लादेशी खरीदार को पता नहीं चलेगा कि दरअसल, इस प्रोडक्ट का निर्माण कहां हुआ है। 

ये निकला नतीजा 
बारकोड के प्रीफिक्स से यह नहीं पता चलता है कि कोई प्रोडक्ट कहां बना है। इसलिए किसी प्रोडक्ट के बारकोड के तीन अंकों के आधार पर चाइनीज प्रोडक्ट का बहिष्कार करने का आह्वान भ्रामक है।  

नोट :- यह फैक्ट GS1 के वेबसाइट पर आधारित है । 
BBC News, Asianet News हिंदी, आज तक जैसे न्यूज़ वेबसाइटों ने भी अपने फैक्ट चेक में वायरल पोस्ट को "आधा अधूरा सच" बताया है । 
अतः आप सभी से अनुरोध है कि कुछ भी शेयर करने से पहले "फैक्ट चेक" जरूर कर लिया करे क्योकि आज कल "verified" accounts के द्वारा भी "गलत" खबरे साझा किया जाता है । 
सावधान रहें - सतर्क रहें !! 


YouTube 👇 

धन्यवाद 
#BhartenduVimalDubey 

Sunday, 14 June 2020

आखिर सुशांत सिंह राजपूत जैसे लोग आत्महत्या क्यो करते हैं ? जरूर पढ़ें और जुड़े "खुदकुशी के खिलाफ मुहिम" से

आखिर सबकुछ ( नेम, फेम, प्रसिद्ध, धन - दौलत ) होने के बाद भी #सुशांत_सिंह_राजपूत ने #Sucide क्यों किया होगा ?
इस गम्भीर प्रश्न पर विचार करने से पहले #SushantSinghRajput को भावभीनी श्रद्धांजलि 🙏 #RIP

आइए अब हम कड़ी दर कड़ी इस भयानक समस्या पर विचार करें ...
हाल ही में सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर #दिशा_सलियन ने भी #मुंबई में 12वीं मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली थी । वह मंगेतर संग मुंबई के मलाड में रहती थीं । घटना की जानकारी मिलते ही उन्हें #बोरिवली के हॉस्पिटल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।


 #सुसाइड या #आत्महत्या, जान-बूझकर खुद की जान लेने की कोशिश का नाम है। ज्यादातर लोगों की आत्महत्या के लिए कई तरह मेंटल डिसऑर्डर जैसे, डिप्रेशन, बायपोलर डिसऑर्डर , सिजोफ्रेनिया, पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, एंग्जाइटी डिसऑर्डर आदि जिम्मेदार होते हैं। इसके अलावा बहुत से लोग ज्यादा शराब पीने या नशे के शिकार होने के कारण भी आत्महत्या कर लेते हैं।

कुछ आत्महत्या के मामलों के पीछे इंसान की बेकाबू भावनाएं जिम्मेदार होती हैं। कई बार लोग स्ट्रेस, आ​र्थिक समस्याओं, #रिलेशनशिप की समस्याओं जैसे #ब्रेकअप या #प्रताड़ना से तंग आकर सुसाइड जैसे कदमों को उठा लेते हैं । सुसाइड का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है जिन्होंने पहले कभी खुदकुशी की कोशिश की हो ।
आत्महत्या का किसी व्यक्ति की संपन्नता या विपन्नता से कोई संबंध नहीं है। इन दिनों तो हर आयु वर्ग में भी आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं ।
#विश्व_स्वास्थ्य_संगठन (#WHO) के मुताबिक दुनियाभर में हर साल करीब 8 लाख लोग #खुदकुशी करते हैं । इस हिसाब से हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान देता है । WHO के मुताबिक #भारत उन देशों में शामिल है जहां खुदकुशी की दर सबसे ज्यादा है । वैसे तो आत्महत्या की कोई विशेष उम्र नहीं है, लेकिन दुनियाभर में 15 से 29साल के लोगों के बीच आत्महत्या, मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह है । ये आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि #नौजवान आत्महत्या की ओर अधिक बढ़ रहे हैं।
 #राष्ट्रीय_अपराध_रिकॉर्ड_ब्यूरो ( #एनसीआरबी ) की 2018 की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि भारतीयों में आत्महत्या करने की दूसरी सबसे बड़ी वजह बीमारी है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में कुल 1 लाख 34 हजार 516 लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें 23764 लोगों ने बीमारी से तंग आकर आत्महत्या की ...
विश्व स्वास्थ्य संगठन ( #डब्ल्यूएचओ ) के अनुसार भारत की 135 करोड़ की आबादी में 7.5 प्रतिशत (10 करोड़ से अधिक) मानसिक रोगों से प्रभावित हैं। वहीं भारत में एक लाख की आबादी पर 0.3 #मनोचिकित्सक, 0.07 #मनोवैज्ञानिक और 0.07 सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वहीं विकसित देशों में एक लाख की आबादी पर 6.6 मनोचिकित्सक हैं। मेंटल हॉस्पिटल की बात करें तो विकसित देशों में एक लाख की आबादी में औसतन 0.04 हॉस्पिटल हैं जबकि भारत में यह 0.004 ही हैं।

#टीवी_एक्टर #मनमीत_ग्रेवाल ने लॉकडाउन के दौरान आर्थिक तंगी की वजह से पिछले महीने खुदकुशी कर ली थी।
#टीवी_एक्ट्रेस #प्रेक्षा_मेहता ने भी #लॉकडाउन के दौरान इंदौर के घर में #फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पिछले महीने उनकी बॉडी सुबह पंखे से लटकी मिली थी। अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

आखिर "आत्महत्या" रूपी इस विकराल समस्या का समाधान क्या है ?
अपने मन से "छिछक" और "हिनता" के भावना को निकाल दे .. सभी के पास सब कुछ नहीं होता है, इस बात को समझने का प्रयास करें .. बेशक अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश करे, असफल होने पर फिर से प्रयास करे .. दिन में कम से कम एक बार अपने परिजनों से जरूर बात करें ..
एक - दूसरे के बातों को ध्यान से सुने और समझने का प्रयास करे ..
हमेशा एक ही काम ना करे मतलब लगातार बैठ करके ना तो मोबाइल चलाए और ना ही लगातार बैठ करके पढ़ाई करे ... हमेशा एक ही तरह के "चैनल" ना देखे ... हमेशा एक ही "पक्ष" को ना सुने
...
सुसाइड रोकने का सबसे कारगर उपाय आत्महत्या के साधनों जैसे हथियारों, दवाओं और जहर तक पहुंच को सीमित बनाना है । इसके अलावा किसी इंसान में आत्महत्या की भावनाएं मेंटल डिसऑर्डर और कुछ हद तक मानसिक प्रताड़ना की वजह से भी भड़क सकती हैं।
प्रत्येक वर्ष 10 सितंबर को #वर्ल्ड_सुसाइड_प्रिवेंशन_डे ( #WorldSuicidePreventionDay ) मनाया जाता है ।

याद रहे "खुदकुशी किसी भी समस्या का हल नहीं है"

यह पोस्ट #AdvocateManojKumarDubey के पेज से लिया गया है   https://www.facebook.com/AdvocateManojKumarDubey/

धन्यवाद
#BhartenduVimalDubey


Tuesday, 9 June 2020

"लव जिहाद" का रोना रोने वाले भाजपा व RSS नेताओं के अपने "लव जिहादी संतान" -

हम पहले ही स्पष्ट कर दे कि हिंदुओं के मुस्लिम रिश्तेदार हो या फिर मुसलमानों के हिन्दू रिश्तेदार , इससे हमें कोई आपत्ति नहीं है । 
हम मानते है कि इस्लामिक त्यौहार ईद और सनातनी त्यौहार करवा चौथ, गणेश चतुर्थी आदि एक ही चंद्रमा को देेख करके ही मनाया जाता है । 
सभी धर्म / सम्प्रदाय के लोगो के खून का रंग लाल ही होता है । 
मैं यह ब्लॉग केवल हिन्दू राष्ट्र व मुस्लिम राष्ट्र की राजनीति करने वालो को आईना दिखाने के लिए लिख रहा हूँ । 
आरएसएस व भाजपा के तमाम समर्थक गौरी , करीना कपूर  , शर्मिला टैगोर आदि  हिन्दू महिलाओं पर मुस्लिम व्यक्ति से विवाह करने के लिए तरह - तरह के आरोप लगाते हैं
 लेकिन आरएसएस / भाजपा  नेताओं के मुस्लिम रिश्तेदार पर कोई सवाल नहीं करते हैं ,
 क्या ऐसे लोगो के लिए  ही "Hypocrisy" / पाखंड शब्द बना है ?  
अब इस फोटो को ज़ूम करके देखिए :- 


 तो आइए जानते हैं कि हिन्दू - मुस्लिम करने वाले ऐसे भाजपा / आरएसएस नेताओं के बारे में जिनके रिश्तेदार मुस्लिम है ?  

1. मुख्तार अब्बास नकवी की पत्नी का नाम सीमा है । 
  2.. मोदी की भतीजी की शादी मुस्लिम से हुई है. 
 3. लाल कृष्णा आडवानी की बेटी ने दूसरी शादी मुस्लिम से की है.
 4. सुब्रह्मनियम स्वामी की बेटी “सुहासिनी ” ने मुस्लिम से शादी की है.  
5. मुसलमानों के खिलाफ सबसे ज़्यादा ज़हर उगलने वाला विहिप का नेता प्रवीण तोगडि़या की बहन से शादी करने वाला मुस्लिम आज बहुत बड़ा रईस है. तोगड़िया आज भी अपनी बहन से मधुर सम्बन्ध रखता है.  
6. संघ से जुडे और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल की भतीजी ने एक मुस्लिम लड़के से विवाह करने का फ़ैसला किया है.
इस विवाह अवसर में कई दिग्गज जुटे जिसमें योगी सरकार के कई मंत्री और पार्टी के कई दिग्गज मौजूद थे.  

7. BJP नेता श्री शहनवाज हुसैन की पत्नी रेणु शर्मा एक हिन्दू है । 

यह लिस्ट बहुत लंबा है ... 

निष्कर्ष :- गौरी ने शाहरुख खान से, अमृता व करीना ने सैफ अली खान से, रेणु शर्मा ने श्री शाहनवाज हुसैन से या किसी ने किसी से शादी किया यह सबका अपना व्यक्तिगत जीवन है । 
 भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहाँ सबको अपने मन-मुताबिक शादी - विवाह करने की छूट है 
और यकीन मानिए लोकतांत्रिक / मानवतावादी व्यवस्था से अच्छा कोई दूसरी व्यवस्था नहीं है । 

विशेष :- कृपया सोशल मीडिया के किसी भी मैसेज पर आंख बंद करके विश्वास ना करे । 
सोशल मीडिया पर तमाम तरह के एडिटेड वीडियो क्लिप, आधे - अधूरे खबर, गलत क्लेम के साथ फोटो आदि घूमते रहते हैं । 
आप मेरे blogs का भी क्रॉस चेक कर सकते है । 


 Instagram :- 

धन्यवाद 
 #BhartenduVimalDubey 

Friday, 5 June 2020

केरल में गर्भवती हथनी के मौत को इतना तूल क्यो दिया जा रहा है ?

आखिर भारत की मीडिया व आई०टी० सेल कुछ गिने चुने मामलों को हद से अधिक तूल क्यो देता है ? 

देखिए हम यह नहीं कह रहे है कि केरल में गर्भवती हथिनी के साथ जो हुआ वो सही हुआ ... ब्लॉग के शीर्षक को पढ़कर किसी भी निष्कर्ष पर ना पहुंचे ... हम गलत को सही नहीं कह सकते हैं ।

अगर किसी विधायक, नेता, सांसद ने ऐसा कुछ किया होता तो क्या तब भी आप इस मामले को इसी तरह उठाते ? 

1. शायद इस घटना पर आपका खून नहीं खौला था 😡
 👉  जब देहरादून में बीजेपी विधायक गणेश जोशी ने जानबूझ कर पुलिस के घोड़े को लाठी से मारा था जिसके चलते उसकी मौत हो गईं थी , क्या वो भारतीय संस्कृति  है ? घोड़ा तो रामायण में भी स्थान पाता है ना? तब धर्म , सभ्यता भूल गए थे आप ? 

2. ✍️ केरल में हाथी की मौत, उसे साम्प्रदायिक बनाने की कोशिश! बिहार में अभी से चुनावी अभियान, 7 को विरचुअल चुनावी रैली।  क्या बीजेपी के लिए राजनीति में कोई लक्ष्मण रेखा है ? Who is the vulture here BJP ? 

3. 👉 केरल में हथनी के मौत का एक पहलू यह भी है :- 
अगर आप किसान परिवार से हैं तो पता होगा कि हाथी की मौत कैसे हुई है। फसलों को जानवरों से बचाने के लिए कई तरह के ट्रैप लगाए जाते हैं। जिनके लिए ट्रैप लगाया जाता है, उसके अलावा कभी कोई और फँस जाता है। बवाल इसलिए है क्योंकि पिछले तीन महीने से दुनिया में केरल की तारीफ़ हो रही है।  
 एंकर और पत्रकार ज़्यादातर शहरी है। गाँव के बारे में बिल्कुल मूर्ख हैं। मान लीजिए कि किसान ने फसल बचाने के लिए कँटीली तार लगाई। तार में फँसकर नीलगाय या कोई और जानवर मर गया। तो क्या किसान क्रूर है? हत्यारा है?  

4. 👉 NDTV समेत कई मीडिया संस्थानों ने बताया कि केरला के मलप्पुरम में हथिनी की मौत हो गयी. जबकि घटना पलक्कड़ की है. मौत की वजह विस्फोटकों से भरा फल जानबूझकर खिलाना बताया गया और सम्प्रदाय विशेष को निशाना बनाया गया जबकि इसकी जांच अभी चल रही है. |  


5. अब जहाँ तक बात है इस घटना की तो ... इस घटना की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है । 
 "गलत" को "सही" नहीं कहा जा सकता है ।  
मामला "लेफ्ट"शासित "केरल" का हो या "भाजपा" शासित "मध्यप्रदेश" का ... "गलत" करने वालो को "भारतीय संविधान" के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए । 


6. इंसानों में अब इंसानियत बची भी है क्या ?? 
जाती, धर्म, ऊँच - नीच, अमीर - गरीब आदि भावनाओं ने मनुष्यों में से "मानवता" को ही खत्म कर दिया है ।  

 देहरादून के बीजेपी विधायक गणेश जोशी के लाठी मारने से पुलिस के घोड़े की मौत हो गयी थी , क्या विधायक जी पर कोई कार्यवाही हुई थी ? या विधायक जी अब मंत्री बन गए हैं ? या फिर विधायक गण कानून से ऊपर होते हैं ? 

7. पूरे केरल राज्य में अगर कोई भी घटना होगी तो सवाल सीधा @RahulGandhi जी से पूछा जायेगा,लेकिन प्रधानमंत्री जी के क्षेत्र क्योटो (वाराणसी) में चुनावी जल्दबाज़ी के कारण निर्माणाधीन पुल गिरेगा लोग मरेंगे तब भी किसी से कुछ नहीं पूछा जाएगा। 
 क्यूँ मेनका गांधी जी सही कहा ना मैंने ? 

8. टीवी ऐंकरों के सामान्य ज्ञान के लिए ;

1. गर्भवती हथिनी की हत्या -पालक्काड़ की है।
2. टीवी इसे ग़लत मल्लपुरम की घटना बता रहा है 
3. राहुल गांधी वायनाड से सांसद हैं 

और ये तीनों अलग-अलग संसदीय क्षेत्र है । 

निष्कर्ष :- सभी समस्याएं एक - दूसरे से सम्बंधित होती है । 
खुद को नम्बर 1 न्यूज़ चैनल कहने वाले भी बड़े आराम से फेक न्यूज़ फैला देते हैं ।
 कुछ "पक्षकार" तो हर एक खबर को अपने "पक्ष" में मोड़ने के लिए "सूत्रों" का सहारा लेते है । 
कुछ आधी - अधूरी बातो को ही बताते हैं । 
प्रेस कॉन्फ्रेंस से अधिक "मनगढ़ंत" व "फिक्स्ड" इंटरव्यू का चलन आम हो चुका है । 
बाकी आप खुद समझदार है ☺️😊 
ध्यान रहे :- "सभी समस्याएं एक - दूसरे से सम्बंधित होती है और उनके समाधान भी एक - दूसरे से सम्बंधित होते हैं " 

Instagram :- https://instagram.com/bhartenduvimaldubey2/ 

YouTube :- https://www.youtube.com/channel/UC4Gvn8nTEcKilHRIQLcjZJA 

 Twitter :- https://twitter.com/bvd26/status/1261355522906714113?s=19  

 धन्यवाद 
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Tuesday, 2 June 2020

समानता का सिद्धांत दिखावा मात्र ? पुरुषवादी सोच, थोपने की प्रवृत्ति

कहीं अश्वेत, कहीं श्वेत, कहीँ हिन्दू, कहीँ यहूदी, कहीं मुस्लिम, कहीं महिला, कही पुरूष, कही समलैंगिक, कही LGBTQ + , कही कोई और ... सब तो जुल्म सह रहे है ... इनको समानता कहाँ मिला हुआ है ? 
देशों की सीमाएं अलग है, देशों की शासन व्यवस्था अलग है, देशों के "राजा" अलग है, देशों की संस्कृति आदि अलग है किंतु "कमजोर अलपसंख्यकों" के साथ भेदभाव एक जैसी ही है । 

देखिए मैं "कमजोर" या "शोषित वर्ग" से नहीं हूँ लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं अत्याचार के खिलाफ ना बोलूं । 

आज मैं "शोषित" नहीं हूँ लेकिन क्या पता "हम" से भी ताकतवर कोई आ जाए और "वो" हमारा शोषण करने लगे , ध्यान रहे उस परिस्थिति में आप के लिए भी कोई आवाज नहीं उठाएगा । 

मैं जब भी अपने videos या blogs में  "शोषितों" की बात करता हूँ तो "कुछ लोग" कुतर्क करने आ जाते है . जैसे कि  जब भारत के CAA / NRC के प्रदर्शनों के दौरान मैंने कहा कि "सरकार" को मुसलमानों से / प्रदर्शनकारियों से बात करना चाहिए तो लोगो ने मुझ से कहा कि आप "ब्राह्मण हिन्दू" हो, कश्मीरी पंडितों के समय आप कहाँ थे ? 
मैंने ऐसे सभी "Trolls" को बता दूं कि उस समय मैंने जन्म नहीं लिया था, और अगर उस समय मैंने जन्म लिया होता तो मैं "उसका" भी विरोध करता । 

क्या जाति - धर्म को देख करके किसी "अपराधी" को "निर्दोष" कहा जाना चाहिए ? 
क्या काला - गोरा देख करके "गलत" को "सही" कहा जा सकता है ? 
क्या भाई द्वारा अपने "बहन" पर कुछ थोपा जाना सही है ? 
जब लड़के को उसके मर्जी से कपड़े पहनने आदि की छूट है तो फिर लड़कियों को क्यो नहीं ? 

अब इस तस्वीर को ध्यान से देखिए :- 

सोशल मीडिया पर बहुत सारे लड़के इस तस्वीर को साझा करते हैं, इस तस्वीर के माध्यम से वे कहना चाहते हैं कि लड़कियों को अपने मर्जी से कपड़ा नहीं पहनना चाहिए, लड़कियों को उनके हद में रहना चाहिए, कुछ लोग तो छोटे कपड़ों को ही "बलात्कार" की वजह बताते हैं । 
ऐसे पुरुषवादी सोच वालो से मैं पूछना चाहता हूँ कोई तीन साल की "लड़की" को बुरखा या साड़ी कैसे पहना सकता है ? क्योकि आजकल तो छोटे - छोटे लड़कियों के साथ भी बलात्कार होता है ना !! 
और तो और साड़ी व बुरखा पहनने वाली "महिलाओं" के साथ भी बलात्कार होता है ना ? 
क्या "सेल" से बाहर निकलने का हक केवल ऐसा स्टेटस लगाने वालों को ही है ?
क्या तस्वीर में "She" के जगह पर "He" नहीं लिखा जा सकता है ? 
क्या हम ऐसे समाज का निर्माण नहीं कर सकते है जहाँ कछुओं को भी सेल से बाहर निकल करके दुनिया देखने का हक हो !! 

आखिर पुरुषों को महिलाओं के लिए नियम - कानून बनाने का हक किसने दिया ? 

"थोपने की प्रवृत्ति" को छोड़ करके ही वास्तविक समानता की स्थापना किया जा सकता है । 


अगले ब्लॉग में जारी है ...

सुझावों व टिप्पणियों का स्वागत है

#BhartenduVimalDubey