Wednesday, 28 October 2020

आज तक, ज़ी न्यूज़, News 24, ABP न्यूज़, Times Now व India TV ने माफ़ी क्यो माँगी ?

जैसा कि आपको पता है कि भारतीय मीडिया किस तरीके से फर्जी, भ्रामक, अर्धसत्य व कुछ राजनीतिक दलों को फायदा पहुँचाने के लिए खबरों को बनाता व चलाता रहता है - 
2016 में ज़ी न्यूज़ ने कन्हैया कुमार का फर्जी वीडियो चला करके पूरे JNU को बदनाम करने की कोशिश की थी,  
अभी हाल ही में तबलीगी जमात के कुछ सदस्यों के कोरोना पॉजिटिव होने पर मीडिया ने पूरे मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की कोशिश की थी, जिस पर कई उच्च न्यायालयों ने मीडिया व सरकार को फटकार भी लगाई थी - 

ताजा मामला सुशांत सिंह राजपूत केस का है जिसमे मीडिया ने बची खुची मर्यादाओं को भी ताक पर रखते हुए खुलामखुला गंध मचाया था - 
इसी बीच महाराष्ट्र पुसिल ने TRP घोटाले का खुलासा किया, कई अन्य लोगो ने पहले से ही NBSA व कोर्ट में शिकायत कर रखी थी - तो अब इन्ही पुराने व नए मामलों में NBSA ने इन न्यूज़ चैनलों से माफी मांगने को कहा है ।  

न्यूज़ बॉर्डकास्ट‌िंग स्टैंडर्ड अथॉर‌िटी ( NBSA ) ने इलेक्ट्रॉनिक समाचार चैनलों, आजतक, ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 24, इंडिया टीवी आदि को निर्देश दिया है कि वे असंवेदनशील रिपोर्टिंग और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को सनसनीखेज बनाने के लिए माफी मांगने के ‌उसके आदेश का अनुपालन करें - 
ब्रॉडकास्टरों ( न्यूज़ चैनलों ) को बाकायदा माफी का पाठ, तारीख और समय दिया गया था । 

1. रजत शर्मा के इंडिया टीवी ने दिवंगत अभिनेता का शव दिखाने के लिए 27 अक्टूबर को सार्वजनिक माफी मांगी - 

 अथॉरिटी ने पाया कि इंडिया टीवी को NBSA के दिशा-निर्देशों का इस हद तक "उल्लंघन" किया था कि उसने अपने प्रोग्राम में बार-बार शव के होंठों के रंग और अभिनेता की गर्दन पर पड़े निशान का वर्णन किया था। इसने कथित रूप से शव को एक कपड़े से ढंका दिखाया, जिसे अपार्टमेंट से बाहर ले जाया जा रहा था ।

2. ज़ी न्यूज़ को भी अभिनेता की मौत को सनसनीखेज बनाने के लिए 27 अक्टूबर 2020 को सार्वजनिक माफी मांगने को कहा गया है । 

2016 मे ज़ी न्यूज़ ने ही गौहर रजा व अन्य के कविताओं को अफजल गैंग का कविता पाठ करार दिया था , जिसके लिए ज़ी न्यूज़ ने अब माफ़ी मांगी है । 

लिंक - गौहर रजा ने ट्वीट करके व्यस्त किया खुशी . 

3. न्यूज 24 अभिनेता की मौत के असंवेदनशील और सनसनीखेज कवरेज के लिए 29 अक्टूबर को सार्वजनिक माफी मांगे - 

4. नकली ट्वीट्स को दिवंगत अभिनेता का बताने और उन्हें उनके अंतिम ट्वीट के रूप में रिपोर्ट करने के लिए आजतक 27 अक्टूबर को रात 8 बजे माफी मांगें और एक लाख रुपए का जुर्माना भरे - 

5. अभिनेता की मृत्यु के कवरेज के आपत्तिजनक वीडियो को हटाने के निर्देश का एबीपी न्यूज अनुपाल करे - 

6. Times Now ने लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता संजुक्ता बासु के खिलाफ अभ्रद भाषाओं का उपयोग किया था जिसके खिलाफ "बासु" ने NBSA में शिकायत किया था , कार्ययवाही ना होते देख Sanjukta Basu ने सुप्रीम कोर्ट में अपील किया था , फिलहाल NBSA ने Times Now से माफी माँगने को कहा है । 

लिंक - हालांकि संजुक्ता सुप्रीम कोर्ट से अपने याचिका को वापस नहीं लेंगी .

नोट - Times Now व अन्य न्यूज़ चैनलों ने माफ़ी माँगते हुए भी चालाकी दिखाने का प्रयास किया है । न्यूज़ चैनलों ने माफ़ी माँगते हुए NBSA के सभी निर्देशों का पालन नहीं किया है । अब यह देखना दिलचस्प होगा कि NBSA व याचिकाकर्ताओं का अगला कदम क्या होता है । 

नोट - अर्नब गोस्वामी का Republic नेटवर्क NBA का सदस्य नहीं है इसीलिए NBSA सबसे जहरीले Republic व R भारत के खिलाफ कोई फैसला नहीं दे सकता है । 

हालांकि Republic नेटवर्क TRP धोखाधड़ी का मुख्य आरोपी है जिसके खिलाफ मुंबई पुलिस का जाँच जारी है । कुछ लोगो ने न्यायालय में भी याचिका दायर की है । 

गौरतलब हो कि इसके पहले Republic News के अर्नब गोस्वामी ने 9 बजे के प्राइम टाइम में गुजरात चुनाव के दौरान ABP न्यूज़ के पत्रकार को गुंडा कहने के लिए माफ़ी मांगी थी, इसके अलावा भी Republic नेटवर्क कई अवसरों पर माफ़ी मांग चुका है । अर्नब ने माफ़ी माँगी - जनसत्ता

 NDTV जैसे कुछ गिने चुने ब्रॉडकास्टर को छोड़ करके लगभग सभी न्यूज़ चैनल हमेशा On Air अपराध करते है और फिर माफ़ी माँगते है । सोशल मीडिया पर NDTV ने भी कई बार MLA को MP बताने जैसा छोटी - मोटी गलतियां कर चुका है । भाजपा सरकार में NDTV पर एक दिन के लिए प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लेकिन ऑथोरिटी ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया था । 

YouTube पर अनेकों बड़े बड़े चैनल है जो अक्सर फर्जी, भ्रामक, असत्य, अर्धसत्य खबरों को दिखाते है, Twitter, Facebook, Instagram पर भी प्रोपेगैंडा फैलाने वाले एकाउंट है, जिन पर कोई लगाम नहीं है । विपक्ष के प्रोपेगैंडा वाले एकाउंट पर तो कार्यवाही भी हो जाता है लेकिन सत्तापक्ष के प्रोपैगैंडा पर कोई रोक नहीं है । 

सोत्र / इनपुट  - LiveLaw.in , BarAndBench.com . 

आप हमारे दूसरे आर्टिकल / ब्लॉग को भी पढ़े - 

Word Press - Bhartendu Vimal Dubey . 

YouTube - Bhartendu Vimal Dubey . 



Thursday, 22 October 2020

ओवैसी व मायावती का चुनावी गठबंधन, तेजस्वी के रैली में जबरदस्त भीड़, सृजन घोटाला, सुशील मोदी का सेल्फगोल, पुराने Tweets व Videos के निशाने, जनता का मूड :- हाल ए बिहार विधानसभा चुनाव 2020 ( Part - 2 )

अभी तक आप जान चुके है कि कौन सी राजनीतिक दल कितने सीटो पर चुनाव लड़ रही है, प्रथम चरण के लिए कितने प्रत्याशी मैदान में है, कितने प्रत्याशी दागी है

1. CAA, 370 पर भाजपा सरकार के विरोधियों व समर्थकों का अनैतिक गठबंधन :- 
 
जैसा कि आप सभी को पता है कि असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन "AIMIM", CAA, 370 जैसे मुद्दों पर भाजपा नीत केंद्र सरकार का जबरदस्त विरोध की थी , ओवैसी ने तो लोकसभा में CAB को फाड़ दिया था 
तो ऐसे में ये दोनों पार्टियां साथ मे बिहार चुनाव क्यो लड़ रही है ? क्या यह जनता के साथ धोखा नहीं है ? क्या ओवैसी किसी भी मुद्दे पर केवल ध्रुवीकरण करके भाजपा को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से बोलते है ?  

2. पुराने Tweets व Videos को कैसे छिपाएंगे ? :-  जैसा कि आप सभी को पता है कि 2015 में BJP और JDU + आमने सामने थी, ऐसे में उस समय भाजपा के नेताओ ने सभी नीचताओ को पार करते हुए नीतीश कुमार पर प्रधानमंत्री मोदी के हत्या तक का आरोप लगाया था 
  गिरिराज सिंह जी अब केंद्रीय कैबिनेट मंत्री है - ये कह रहे है कि नीतीश कुमार का सम्बंध IM से है, अब अगर IM कोई उग्रवादी संगठन है तो मोदी सरकार इसे प्रतिबंधित क्यो नहीं करती है ?
प्रीति गांधी भाजपा महिला मोर्चा IT Cell प्रमुख है .
ये लोग रेखा शर्मा, अमित मालवीय आदि की तरह अपने पुराने ट्वीट डिलीट ना कर दे इसीलिए हमने Archive कर लिया है - BJP बनाम JDU . 

3. सुशील मोदी ने BJP के पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार दी ? :- 
  जब तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर RJD + कांग्रेस + Left गठबंधन सत्ता में आएगी तो हम 10 लाख से अधिक लोगो को रोजगार देंगे  तो भाजपा ने प्रधानमंत्री मोदी, स्मृति ईरानी व अन्य के फर्जी डिग्री को भूलते हुए कहा कि जो खुद 9वी फेल है, वह दुसरो को नौकरी कैसे देगा .
उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने तो यहाँ तक कहा था कि ये केवल डपोरशंखी वादा है, उतना बिहार का बजट ही नहीं है 
और अब जब भाजपा ने 19 लाख रोजगार देने का वादा किया है तो फिर सुशील मोदी को जबाब देते नहीं बन रहा है . 
अब कोई पूछो कि भाजपा 116 हजार करोड़ रुपये कहा से लाएगी ? 

4.      नीतीश से ऊब गए है लेकिन दूसरा विकल्प नहीं  :- 
         
  मैं Bhartendu Vimal Dubey चाहता हूँ कि बिहार में भाजपा की या JDU की सरकार ना बने,
नीतीश सरकार ने सृजन घोटाले समेत 55 से अधिक घोटालों के अलावा किया ही क्या है ?
लेकिन BJP + नही तो कौन ? विपक्ष ट्वीटर के अलावा है ही कहा
Ground Reporters के बातो को सुनने से लग रहा है कि लोग "BJP + JDU सरकार" से तो बहुत नाराज है किंतु उनको कोई बेहतर विकल्प ही नहीं दिख रहा है । 
"Work From Home" अभी कोरोना काल मे चालू हुआ है लेकिन भारत की विपक्षी पार्टियां मई 2014 से ही Work From Home कर रही है ।
विपक्षी नेताओं ने ट्वीट करने के अलावा और किया ही क्या है ?
Lockdown के समय मे तेजस्वी यादव ने कुछ जगहों पर "पूड़ी" बाटीं थी, बस ... 
पिछले पाँच सालों में बिहार या देश के कितने बड़े नेताओं ने लोगो के मुद्दों को उठाया है ? क्या किसी भी बिहारी को विपक्षी नेता जमीन पर दिखा है ? जवाब है नहीं । 
कुछ इलाकों में पप्पू यादव जी का क्रेज है लेकिन वोटों में तब्दील नहीं हो पायेगा क्योकि पप्पू यादव जी तो फेमस है लेकिन इनकी पार्टी नहीं,  पप्पू यादव ने Lockdown में भी प्रवासी मजदूरो की मदद की थी । 
ऐसा बिल्कुल नहीं है लेकिन नीतीश सरकार ने बिहार को लंदन बना दिया है, अभी भी बिहार बहुत पिछड़ा हुआ है .. सड़को में गड्ढे नहीं है बल्कि गड्ढों में सड़के है .. बेरोजगारी चरम पर है .. भ्रष्टाचार, महँगाई, पलायन सब चरम पर है 
किंतु सवाल वही है कि BJP + से अच्छा विकल्प ही कहा है ?
युवा पीढ़ी "RJD + कांग्रेस + लेफ्ट" के पक्ष में दिख रही है किंतु बड़े लोग लालू राज से तुलना कर रहे है इसीलिए वे BJP + के पक्ष में है । 
आप खुद सोचिए कि राहुल गांधी या बिहार कांग्रेस के नेता, तेजस्वी, कुशवाहा आदि ने कितने धरना प्रदर्शनों में भाग लिया है ? 
मानदेय पर काम करने वाले कर्मी, आंगनवाड़ी कार्यक्रतियों, छात्रों, बेरोजगारों, नर्शो आदि ने अनेकों धरना प्रदर्शन किया है, लेकिन क्या कोई भी विपक्षी नेता इन धरना प्रदर्शनों में शामिल हुआ है ? 
अब तुलना कीजिए कि मई 2014 से पहले क्या भाजपा के बड़े नेता भी केवल ट्वीट ही करते थे, नहीं बिल्कुल नहीं ... भाजपा का बड़े से बड़ा नेता अधिकांश समय सड़को पर लोगो के बीच मे ही रहता था, गैस, पेट्रोल का दाम बढ़ना हो, महँगाई, भ्रष्टाचार कोई भी मुद्दा हो भाजपा सड़को पर रहती थी ...
कुछ राजनीतिक दल तो ऐसे है जो ना तो सत्ता पक्ष के है और ना ही विपक्ष के, वे बस मौकापरस्त है, "बिन पेंदी के लोटे" .. खैर ये दूसरी बात है । 
चुनाव बाद भी BJP - कांग्रेस को छोड़ करके और कोई भी दल कभी भी एक दूसरे से मिल करके सरकार बना सकती है, महाराष्ट्र, हरियाणा, 2015 बिहार का उदाहरण है ही ... राजनीति सम्भावनाओं का खेल है, इसका नाम ही है - "राज" करने की "नीति" ... सेवानीति थोड़े है । 
वैसे सरकार के लिए कांग्रेस या आम आदमी पार्टी और विपक्ष के लिए भाजपा से बेहतर विकल्प कोई और नहीं है । 

5. जमीन पर तेजस्वी और मीडिया में नीतीश :- 

तेजस्वी के रैलियों में जबरदस्त भीड़ हो रही है, NDA के रैलियों में कुर्सियां खाली पड़ी रह जा रही है 
फिर भी मीडिया के सर्वे में NDA आगे है ... 
क्या चुनाव के बीच मे रिजल्ट के पहले के एग्जिट पोल किसी विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुँचाने के लिए किया जाता है
TRP घोटाला सामने आने के बाद मीडिया पर भरोसा करना मुश्किल है, 
वैसे भी प्रेस इंडेक्स में भारत एकदम पीछे होते जा रहा है । 

6. सृजन घोटाला बिहार का व्यापमं घोटाला है ? :- 

यह घोटाला एक एनजीओ, नेताओं, सरकारी विभागों और अधिकारियों के गठजोड़ की कहानी है । 
इसके तहत शहरी विकास के लिए भेजे गए पैसे को गैर-सरकारी संगठन के एकाउंट में पहुंचाया गया और वहां से बंदरबांट हुई । 
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी छानबीन में पाया कि एक छोटा सा एनजीओ सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड भागलपुर जिला प्रशासन के आधा दर्जन सरकारी विकास योजनाओं का पैसा चोरी कर रहा था . 
यह सब अधिकारियों, बैंक कर्मियों और सृजन के सदस्यों द्वारा किया जा रहा था . 
आखिर क्यों और कैसे आॅडिटर्स ने सरकारी पैसे की इस ठगी को नजरअंदाज किया ?

नोट - नीतीश कुमार ( JDU ) कांग्रेस, भाजपा, LJP, RJD चारो पार्टीयों के सहयोग से सरकार बना चुके है ...
तेजस्वी यादव घोटाला करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ 2015 में उपमुख्यमंत्री भी रह चुके है । 



धन्यवाद 
Contact  :- Bhartendu Vimal Dubey 

Wednesday, 21 October 2020

मुस्लिम शासक, मुगल या अंग्रेज कौन विदेशी थे ? क्या RSS / BJP इस सम्बंध में भी झूठ बोलती है ?

ताजमहल को लेकर छिड़े विवाद में मुस्लिम शासकों और उनके दौर पर भी बहस चल रही है. भारतीय जनता पार्टी के कई नेता मुग़लों से जुड़ी पहचानों पर सवाल उठाते रहे हैं. इसमें चाहे ताजमहल हो या सड़कों के नाम :- 

इस तरह की बहस भारतीय राजनीति में कोई नई नहीं है. लेकिन इस बार की बहस में ख़ास बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी काफ़ी मज़बूत है. केंद्र के साथ ज़्यादातर राज्यों में भी उसकी सरकार है. ऐसे में बीजेपी का कोई नेता बयान देता है तो उसके कई मायने निकाले जाते हैं.

सवाल यह उठता है कि बीजेपी नेता मुग़ल शासकों को लेकर जो बाते कहते हैं उनका आधार क्या होता है? उन बातों का सच से सरोकार कितना होता है?

भारत मे साम्प्रदायिकता ब्रिटिश शासन की देन है क्योंकि इससे पूर्व अर्थात मुस्लिम शासकों के राज्य में इस प्रकार की प्रवृत्ति का अभाव था, मुस्लिम शासकों के वंशज यहीं भारत में ही बस गए 
फिर भी RSS व भाजपा मुगलों को विदेशी, शत्रु, बुरा, विनाशकारी कहते हुए कोसती है और जो अंग्रेज भारत को लूट करके वापस यूरोप चली गए उसे हितकारी कहती है । 
मुस्लिम शासकों व हिंदुओ के मध्य वैवाहिक संबंध भी थे । 
यह बात सही है कि मुस्लिम शासकों में से अधिकतर ने हिंदुओ के प्रति कभी बहुत उदारता, सहयोग तथा मानवता की नीति का पालन नहीं किया और इतना ही नहीं, उनमें भी अनेक के व्यवहार क्रूर और अमानवीय थे परंतु मुस्लिम शासकों के इस प्रकार के व्यवहार के बावजूद हिन्दू और मुसलमानों के बीच साम्प्रदायिकता की कोई भावना नहीं थी क्योंकि रक्त व वंश की दृष्टि से मूलतः दोनों एक ही थे  
बाहरी मुसलमानों के आक्रमण और उसके शासन की स्थापना कब पूर्व लगभग सभी भारतीय हिन्दू थे । यह सही है कि हिन्दू समाज विभिन्न मत - मतान्तरों में बंटा हुआ था, सवर्णों कब द्वारा दलितों पर अत्याचार होते थे किंतु उनके बीच कभी साम्प्रदायिकता की भावना नहीं पनपी । 
यही कारण है कि आपसी घृणा, कटुता और अविश्वास के बावजूद मुस्लिम शासनकाल में हिंदुओं तथा मुसलमानों के उस साम्प्रदायिकता का जन्म व विकास नहीं हुआ जिसका ब्रिटिश शासन में उसकी 'फूट डालो और शासन करो' की नीति के कारण बीजारोपण तथा विकास हुआ । 
भारत मे किसी तरह साम्राज्यवादी शासन कायम रखने की बदनीयती के कारण ब्रिटिश शासकों ने साम्प्रदायिकता की जो आग लगाई, वह आज जंगल की बन पूरे भारतीय समाज को राख कर देने का कार्य कर रही है । 
यह वीडियो इसका साक्ष्य है - मुस्लिम होने के कारण नौकरी नहीं मिल रहा है . 
जर्मन-अमरीकी इतिहासकार एंड्रे गंडर फ्रैंक ने 'रीओरिएंट: ग्लोबल इकॉनमी इन द एशियन एज' नाम की किताब 1998 में लिखी थी. फ्रैंक का कहना था कि अठारहवीं शताब्दी के दूसरे हिस्से तक भारत और चीन का आर्थिक रूप से दबदबा था. ज़ाहिर है इसी दौर में सारे मुस्लिम शासक भी हुए. 
अब आप खुद सोचिए, पूर्वाग्रह को छोड़ करके सोचिए - 
 ''मेरे लिए हैरान करने वाली बात यह है कि जो अकबर से नफ़रत करते हैं, उन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी के रॉबर्ट क्लाइव से समस्या नहीं है. जो जहांगीर से नफ़रत करते हैं उन्हें वॉरेन हेस्टिंग से दिक़्क़त नहीं है जबकि वो वास्तविक लुटेरे थे.'' 
हरबंस मुखिया कहते हैं, ''मध्यकाल में आर्थिक प्रगति जमकर हुई थी. इसका अंदाज़ा हम इसी से लगा सकते हैं कि उस वक़्त चीन और भारत की जीडीपी दुनिया की कुल जीडीपी की क़रीब 50 फ़ीसदी थी. मध्यकाल में टेक्नोलॉजी भी काफ़ी बदली. मध्यकाल की कुछ टेक्नोलॉजी तो आज तक चल रही है. रेहट और कोल्हू मध्यकाल में ही आए. आज भी कोल्हू के नाम पर तेल बेचा जा रहा है.'' 
अगर इतना कुछ था तो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के मन में नकारात्मकता क्यों है ? 
क्या बीजेपी की असल समस्या मुग़लों के मुसलमान होने से है ? 
हालांकि गिने चुने दक्षिणपंथी इतिहासकारों के अनुसार - ''मुग़ल वंश में अकबर ने लैंड रेवेन्यू पॉलिसी बनाई थी. उस दौर में कई विदेश यात्री भारत आए थे. इन्होंने भारत के कई हिस्सों को देखा था. इन्होंने लिखा है कि किसान मुश्किलों के कारण खेती का काम छोड़ रहे थे. डच ट्रेडर पेनसार्ट और पीटर मुंडी ने लिखा है कि खेती उजड़ रही थी. यूरोपियन यात्रियों ने उस दौर के बारे में लिखा है कि ग्रामीणों और किसानों की स्थिति ठीक नहीं थी.'' 

जैसा कि आपको भी पता है कि ये स्थिति आज भी है । व्यापारियों को MRP मिलता है किंतु किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य ( MSP ) नहीं मिल पाता है । 

बाबर बाहर से आए थे और हुमायूं का भी जन्म भारत से बाहर हुआ था. लेकिन अकबर समेत जितने मुग़ल शासक हुए सबका जन्म यहीं हुआ था. ये कभी विदेश नहीं गए जबकि अंग्रेज आये , लुटे और चले गए । 
 ''हर शासक अपने साम्राज्य का विस्तार करता है. अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य से लेकर अकबर तक ने यही किया.'' 
मैं RSS / BJP का विरोध या वामपंथियों का समर्थन नहीं कर रहा हूँ । मेरा कहना केवल इतना है कि फर्जी खबरों पर विश्वास ना करे । खुद से सत्यता की परख करे । नेताओ के बयानों पर आंख बंद करके विश्वास ना करे । 
आप मेरे द्वारा लिखे गए इस ब्लॉग के तथ्यों को भी जांच - परख ले । 


Instagram :- Bhartendu Vimal Dubey

Tuesday, 20 October 2020

जब तक रेखा शर्मा जैसे लोग महिला आयोग की अध्यक्ष रहेंगी तब तक बलात्कार होते ही रहेंगे :- वैसे तो मोदी सरकार व भाजपा / RSS की ही सोच समानता व महिला विरोधी है ?

 "महिला आयोग" का नाम सुना ही होगा, ये महिलाओं के अधिकारों के रक्षा के लिए एक संवैधानिक संस्था है । 
रेखा शर्मा इसकी तत्कालीन अध्यक्ष है । 
माजरा ये है कि रेखा शर्मा के पुराने ट्वीट वायरल हो रहे है जिसमे वे नरेंद्र मोदी, प्रियंका गांधी, कुमार विश्वास, अरविंद केजरीवाल आदि के खिलाफ घटिया टिप्पणी की है । 
1. यहाँ तक कि अपने एक ट्वीट में रेखा शर्मा ने हिन्दू धर्म के पुजारियों के खिलाफ़ अभ्रद टिप्पणी की है । 
एक तरफ भाजपा हिन्दू - मुस्लिम / राम मंदिर के नाम पर वोट माँगती है और दूसरी तरफ हिंदू धर्म के सुधाओ के खिलाफ ऐसे ट्वीट करती है 
जैसा कि आप जनाते है कि बिना प्रधानमंत्री मोदी व अमित शाह के मर्जी के ये महिला आयोग की सदस्य और फिर अध्यक्ष नहीं बनी होंगी । 

2. इस ट्वीट में रेखा शर्मा जी अरविंद केजरीवाल और उनकी पत्नी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है
ये वही रेखा शर्मा है जो Alt News के मोहम्मद ज़ुबैर को फर्जी मामले में नोटिस भेजी थी । 

3. मतलब RSS के शाखा में सिखाया जाता है कि किसी महिला को "दीदी" या "बहन" मत कहना -  
सब संस्कारो का खेल है । 
वैसे भी भाजपा, करणी सेना आदि हमेशा बलात्कारियों व अपराधियों के पक्ष में ही खड़े होते है । 
ऐसे ही चिन्मयानंद केस में पीड़ित पक्ष पर दावाब डाल करके, उसका बयान बदलवाया जा रहा है । 

हालांकि अमित मालवीय, तेजस्वी सूर्या आदि भाजपा नेताओं के भांति इन्होंने भी अपने ट्वीट डिलीट कर दिए है, 
किंतु आप यहाँ देख सकते है - रेखा शर्मा के घटिया ट्वीट - स्क्रीशॉट लिंक . 


इसके पहले ऐसे ही भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय , पायल रोहतगी , तेजस्वी सूर्या आदि के पुराने घटिया ट्वीट / वीडियो वायरल हुए है । 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्मृति ईरानी आदि के भी पुराने ट्वीट / वीडियो वायरल होते रहते है । 


गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के ट्वीट आज चीख - चीख करके वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल कर रहे है -- अब इन दो इन सवालों के जवाब . 
मोहम्मद ज़ुबैर ( Alt News ) - भाजपा की घटिया सोच  . 
ट्विटर ट्रेंड लिंक - रेखा शर्मा इस्तीफा दो ... SachRekhaSharma . 


बाकी गूगल पर सर्च कीजिए, बहुत कुछ मिलेगा ... लेकिन हाँ, यैसे - तैसे वेबसाइट पर विश्वास मत कीजियेगा । 
धन्यवाद 





Saturday, 17 October 2020

CM की कुर्सी एक , मौकापरस्त गठबंधन 4 और मुख्यमंत्री पद का दावेदार पूरा बिहार :- विधानसभा चुनाव 2020 में किसको वोट देंगे मतदाता ?

जो पार्टीयां अपने दम पर एक भी सीट ना जीत पाती हो, वे लोग ( पार्टी ) भी गठबंधन किए घूम रहे है । 
मने जीरो में जीरो जोड़ने से का मिलता है ? 
जोने पार्टी के नाम, अध्यक्ष का नाम उनके छोड़ के अउर कीहु के ना मालूम हो , वुहो मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बन के घुमत बा .. अरे घुमा घुमा .. के रोकत बा ई सबकर संवैधानिक अधिकार होए ... 
चला ठीक बा अब से भारतेन्दु विमल दुबे भी बिहार मुख्यमंत्री पद का दावेदार है , खुश ना ? 
अरे ऐसे ही तो पुष्पम प्रिया जी ने किया है ... ठीक ठीक , उन करे बारे में पेपरे में आइल रहे ... और हम यहाँ ब्लॉग में लिखत ही .. अरे हमरे लगे उतना पैसा होत तो हमहू पेड न्यूज छपवा देते , पेड इंटरव्यू की व्यवस्था करवा देते । 
फ़ोटो में भावी मुख्यमंत्री लोगन बाटे - पप्पू यादव, तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार, चिराग पासवान, पुष्पम प्रिया चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा । 
फ़ोटो में हम नाही बाटी, लेकिन हमहू होखी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और भी लोग होंगे ही "स्वघोषित" । 

अरे फेमनिस्ट लोगन हम लड़की होने के लिए "प्रिया" जी को टारगेट नहीं कर रहे है, लड़कियां अन्य क्षेत्रों के साथ राजनीति में भी आए अच्छी बात है, लड़कियां लड़को से बेहतर ही होती है किंतु 
सवाल यह है कि इन सभी उम्मीदवारों में से कितने लोगों ने प्रवासी बिहारी मजदूरो की मदद की थी ? 
काहे भूल गइला का की कईसे मजदूर लोग ट्रेन के नीचे दब गए थे ?
 तो क्या एक "शीशी" पर आप सब भूल जाएंगे ? 
जितना खर्चा पुष्पम प्रिया विज्ञापन व पेड इंटरव्यू पर खर्च कर रही है, उतने में तो कितनो की मदद कर दी होती
हाँ, यह सही है कि पप्पू यादव ने लोगो की बहुत मदद की थी । 
बाकी तेजस्वी यादव तो बिहार में ही नहीं थे, कहीं और AC कमरे में बैठ करके केवल ट्वीट ट्वीट खेल रहे थे । 
यूथ कांग्रेस को छोड़ दे तो बाकी कांग्रेस वाले भी गायब ही थे । 
नीतीश कुमार तो भूल ही गए थे कि मैं मुख्यमंत्री हूँ । 
सुशील मोदी तो बेचारे बाढ़ आने पर इतने घबरा जाते है कि सुरक्षा कर्मियों के ऊपर लद करके सड़क पार करते है । 
चिराग पासवान तो अपने पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान की तरह ही है "पानी" जिस वर्तन में डालो उस जैसा, "बिन पेंदी का लोटा" । 
उपेंद्र कुशवाहा ने मदद की थी ये तो शायद उनको ही ना पता हो । 
कन्हैया कुमार तो केवल सभाओं में "हू हा हू हा" करना होता है तभी दिखते है, भीम आर्मी वाले रावण का भी लगभग यही हाल है । 
सोनू सूद राजनीति में ना होते हुए भी लोगो की बहुत मदद की थी । 
अब ऐसे में बिहारी जनता किस पार्टी को वोट दे ? 

आइए एक बार कौन सा पार्टी कितने सीटो लड़ रहा है, जान ले - 
1. UPA / महागठबंधनराष्ट्रीय जनता दल ( RJD ) 144 सीटों पर, कांग्रेस ( INC ) 70 सीटों पर, वाम दल ( Left ) कुल 29 सीटों पर (भाकपा माले 19, सीपीआई 6 और सीपीएम 4 सीटों पर) चुनाव लड़ेंगे :- 
तेजस्वी यादव इसी गठबंधन के तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार है । कन्हैया कुमार CPM के ही नेता है । 
शत्रुघ्न सिन्हा का बेटा व सोनाक्षी सिन्हा का भाई लव सिन्हा और AMU के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष मस्कुर उस्मानी कांग्रेस से MLA उम्मीदवार है । 
JNU छात्रसंघ, लेफ्ट, Anti Fascists सभी इसी गठबंधन का समर्थन कर रहे है । 

2. NDA - जनता दल यूनाइटेड ( JDU ) 115 सीटों पर, भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) 110 सीटो पर, मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी ( VIP ) 11 सीटो पर और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ( HAM ) 7 सीटों पर लड़ेगी । 
नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार है । 

3. लोक जनशक्ति पार्टी ( LJP ) भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी, अतः ये भी 122 सीटों पर JDU के खिलाफ लड़ेगी
  नीतीश कुमार को किनारे करने के लिए भाजपा की गुप्त सहयोगी ? 

4. प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस -
 चंद्रशेखर आजाद रावण की आजाद समाज पार्टी + पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी । 
यह गठबंधन तेजस्वी धड़े के लिए वोट कटवा साबित हो सकता है । 

5. ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट :- 
इस गठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा की RLSP, मायावती की BSPदेवेंद्र प्रसाद यादव की जनवादी सोशलिस्ट पार्टी , समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक, सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी और AIMIM शामिल है । 
ओवैसी की पार्टी AIMIM जिसके नाम मे ही मुस्लिमीन जुड़ा हुआ है, वो भी इस "सेक्युलर" फ्रंट का हिस्सा है, इससे बड़ा हास्यास्पद बात और क्या हो सकती है ?
 यह गठबंधन भी तेजस्वी धड़े को नुकसान और BJP + को फायदा पहुँचाएगी । 

6. पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव (Sharad Yadav) की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) ने इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है । 
LJD उपेंद्र कुशवाहा वाले गठबंधन में भी शामिल हो सकती है । 
गौरतलब हो कि शरद यादव की बेटी सुभाषिनी राज राव ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है । 
- हमने शीर्षक में मौकापरस्त शब्द का इस्तेमाल इसीलिए किया है 👇 
देखिए YouTube पर - गंगाधर ही शक्तिमान है . 

7. प्लुरल्स पार्टी की प्रिया चौधरी स्वघोषित सीएम फेस हैं । 
प्लूरल्स ने पहले चरण के चुनाव के लिए 61 उम्मीदवार खड़े किए थे, जिनमें से अब सिर्फ 33 ही मैदान में बचे हैं . बाकी के "परचे" खारिज हो गए । 

8. और भी कोई गुमनाम पार्टी या गठबंधन चुनाव लड़ रहा हो तो हमे नहीं पता ... हाँ, निर्दलीय व डमी तो सभी चुनावों में ताल ठोकते ही है । 
आम आदमी पार्टी "चुनाव" नहीं लड़ रही है । 

नोट -  बिहार में प्रथम चरण में 71 विधानसभा सीटों पर 28 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए कुल 1354 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे, जिनमें दस नामांकन पत्र ऑनलाइन भी दाखिल किए गए थे। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान 264 नामांकन पत्रों को रद्द कर दिया गया । 

अतः अब  कुल 1,066 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं . इनमें से 319 प्रत्याशी पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. 

दूसरे चरण में 94 विधानसभा सीटों पर तीन नवंबर को और तीसरे चरण के लिए 78 विधानसभा क्षेत्र में 7 नवंबर को मतदान होगा । 

आशा ही नहीं, मुझे पूर्ण विश्वास है कि लोग सड़क, बिजली, शिक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान नहीं देंगे और 
शीशी या चंद रुपयों पर अपने वोट बेच देंगे । 
वैसे भी हमारे यहाँ के लोगो के लिए सड़क, पानी, "विकास" से अधिक जरूरी जाति, बिरादरी व धर्म है ना ?
 


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सोत्र - NDTV इनपुट 
विश्लेषण - भारतेन्दु विमल दुबे 
🙏🏿 धन्यवाद 🙏🏿