Sunday, 19 January 2020

अपराधी, निरक्षर व अनपढ़ नेता करेंगे समस्याओं का समाधान ?

 कुछ बुनियादी किंतु गम्भीर प्रश्न :-

  •  एक मतदाता दो जगहों पर मतदान नहीं कर सकता है तो फिर एक व्यक्ति दो जगहों से चुनाव कैसे लड़ सकता है ? 
  •  क्या बलात्कार के आरोपियों को चुनाव लड़ने या वोट देने का अधिकार होना चाहिए ?

सांसदों और विधायकों का मुख्य काम होता है कानून का निर्माण करना ...

  • तो क्या गवार / निरक्षर सांसद व विधायक कानून का निर्माण कर सकते है ? 
  • क्या अपराधी नेतागण अपराध को रोकने का कानून बना सकते है ? 
  • क्या सत्तारूढ़ पार्टी के पास अपने नेताओ के ऊपर लगे आरोपों को वापस लेने का अधिकार होना चाहिए ? 
  • क्या नेताओ के पास खुद के बेटे या रिश्तेदारों को ठेका देने का अधिकार होना चाहिए ? 
न्याय में देरी का अर्थ होता है न्याय का ना मिलना ... आजकल गरीबो के लिए पाना असंभव सा हो गया है ... देरी ... वकीलों का भारीभरकम फीस ... सरकारी वकीलों का सही से काम ना करना ...
 क्लोजिएम प्रणाली में भाई - भतीजावाद ...
सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के जजों पर विश्लेषण कर लीजिए , एकदम मन चाहा नियुक्ति होती है , निश्चित नियम - कानूनों का घोर अभाव है ...
  • निश्चित टाइम में न्याय मिल जाये , इसके लिए व्यवस्था करना चाहिए 
  • पारदर्शी तरीके से जजों की नियुक्ति होनी चाहिए 
  • अहम फैसलों का लाइव टेलीकास्ट होना चाहिए     
  भारत की शिक्षा व्यवस्था एकदम डबाडोल है , शिक्षक केवल कॉपी - पेस्ट करवाते है , विद्यायल प्रबन्धक को केवल पैसों से मतलब होता है और विद्यार्थियों को केवल पासिंग मार्क से मतलब होता है , अभिभावकों को केवल फीस भरने से मतलब होता है ...

  • ऐसे विद्यालयों को बंद कर देना चाहिए जो गांव - देताह में बनाये गए है और केवल परीक्षा के दिन खुलते है 
  • सरकारी विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करके , नियमित निगरानी करवाना चाहिए , अध्यापकों की बायोमैट्रिक हजारी होनी चाहिए 
  • थ्योरी के जगह पर प्रैक्टिकल पर फोकस होना चाहिए 
  • बच्चे पढ़ाई तो कर लेते है लेकिन उनको ये नहीं पता होता है कि इन चीजों का उपयोग कब और कैसे करना है 
  • बच्चे बहुत मेहनत से प्रेक्टिकल की कापियां व फ़ाइल तैयार करते है और शिक्षक एग्जाम के दिन उस पर हस्ताक्षर करके उस फ़ाइल को रद्दी में बेच देते है 
  • समझने से अधिक रटने और पास होने पर ध्यान दिया जाता है 
  • एक क्लास में एक टीचर के भरोसे 60 - 60 बच्चे होते है मतलब 40 मिनट के बेल में एक बच्चे के ऊपर 1 मिनट भी ध्यान नहीं दिया जाता है 
 लोकतांत्रिक देशों में लगभग सभी फैसले राजनेताओं / राजनीतिक दलों द्वारा लिया जाता है इसीलिए सबसे सबसे पहले राजनीति में पारदर्शिता लाना होगा , कौन किसको चंदा दे रहा है ये सब सार्वजनिक किया जाना चाहिए , RTI जैसे कानूनों को कमजोर नही बल्कि मजबूत किया जाना चाहिए . 

★ मूलभूत कानूनों व संवैधानिक व्यवस्थाओं की जानकारी अनिवार्य रूप से सभी विषय वर्ग के विद्यार्थियों को दिया जाना चाहिए . 

 ऐसे तमाम छोटे - छोटे किंतु महत्वपूर्ण परिवर्तनों के माध्यम से ही सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है ।

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