2016 से भाजपा नेताओं के द्वारा " टुकड़े - टुकड़े गैंग " शब्द का लगातार इस्तेमाल किया जाता है ...
एक बार याद कीजिए कि किस तरह 2016 से अब तक लगातार इस शब्द का इस्तेमाल हो रहा है और लोग इन बातों पर आंख बंद करके विश्वास भी करते है , पत्रकार भी आंख बंद करके रिपोर्टिंग करते है ...
शायद आपने भी विश्वास कर लिया हो कि वास्तव में कोई ऐसा गैंग है ,
लेकिन ध्यान रहे कि केंद्र में सरकार भाजपा की ही है और दिल्ली पुलिस समेत सभी जरूरी एजेंसियां केंद्र सरकार के ही अधीन होती है और हमारे यहाँ न्यायपालिका भी स्वत्रंत है तो अगर वास्तव में ऐसा कोई गैंग है तो सरकार उसपर कार्यवाही क्यो नहीं करती है ?
आइए आपको कुछ नया और जरूरी जानकारी देते है :-
जब जनवरी 2020 में एक RTI दायर करके केंद्र सरकार से इस गैंग के बारे में कुछ जानकारी माँगा जाता है जैसे टुकड़े टुकड़े गैंग कौन है ? इसके कितने सदस्य है ? इसके खिलाफ कोई एक्शन क्यो नहीं लिया जाता है ? तो
" केंद्रीय गृह मंत्रालय कहता है हमारे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है "
तो क्या इस शब्द का उपयोग केवल वोट बैंक के लिए किया जाता रहा है ?
गोदी मीडिया केवल भाषणों की रिपोर्टिंग करता है, फैक्टस की नहीं ...
एक दूसरे RTI में पूछा गया कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाय बेचने सम्बंधित कुछ जानकारी चाहिए जैसे वे कब चाय बेचते थे , कहाँ बेचते थे ? उस समय का कोई फ़ोटो या कुछ ?
केंद्र सरकार का जबाब आता है कि हमारे पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाय बेचने से सम्बंधित कोई भी जानकारी नहीं है .
इतना ही नहीं समय समय पर नेताओ द्वारा हजारों झूठ बोले जाते है और हम आँख बंद करके जुमलों व झूठ से भरे भाषणों पर विश्वास भी कर लेते हैं .
तो क्या इसीलिए सरकारे शिक्षा पर खर्च नहीं करती है जिससे जनता गवार / अनपढ़ रहे और ऐसी हवा हवाई खबरों की सच्चाई किसी को पता ना चले ❓
बाकी न्यूज़ चैनल तो पैसे ले करके फैक्ट्स को छोड़ केवल भाषण दिखाते है .
" Bhartendu Vimal Dubey "
Follow Me On Instagram .
एक बार याद कीजिए कि किस तरह 2016 से अब तक लगातार इस शब्द का इस्तेमाल हो रहा है और लोग इन बातों पर आंख बंद करके विश्वास भी करते है , पत्रकार भी आंख बंद करके रिपोर्टिंग करते है ...
शायद आपने भी विश्वास कर लिया हो कि वास्तव में कोई ऐसा गैंग है ,
लेकिन ध्यान रहे कि केंद्र में सरकार भाजपा की ही है और दिल्ली पुलिस समेत सभी जरूरी एजेंसियां केंद्र सरकार के ही अधीन होती है और हमारे यहाँ न्यायपालिका भी स्वत्रंत है तो अगर वास्तव में ऐसा कोई गैंग है तो सरकार उसपर कार्यवाही क्यो नहीं करती है ?
आइए आपको कुछ नया और जरूरी जानकारी देते है :-
जब जनवरी 2020 में एक RTI दायर करके केंद्र सरकार से इस गैंग के बारे में कुछ जानकारी माँगा जाता है जैसे टुकड़े टुकड़े गैंग कौन है ? इसके कितने सदस्य है ? इसके खिलाफ कोई एक्शन क्यो नहीं लिया जाता है ? तो
" केंद्रीय गृह मंत्रालय कहता है हमारे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है "
तो क्या इस शब्द का उपयोग केवल वोट बैंक के लिए किया जाता रहा है ?
गोदी मीडिया केवल भाषणों की रिपोर्टिंग करता है, फैक्टस की नहीं ...
एक दूसरे RTI में पूछा गया कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाय बेचने सम्बंधित कुछ जानकारी चाहिए जैसे वे कब चाय बेचते थे , कहाँ बेचते थे ? उस समय का कोई फ़ोटो या कुछ ?
केंद्र सरकार का जबाब आता है कि हमारे पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाय बेचने से सम्बंधित कोई भी जानकारी नहीं है .
इतना ही नहीं समय समय पर नेताओ द्वारा हजारों झूठ बोले जाते है और हम आँख बंद करके जुमलों व झूठ से भरे भाषणों पर विश्वास भी कर लेते हैं .
तो क्या इसीलिए सरकारे शिक्षा पर खर्च नहीं करती है जिससे जनता गवार / अनपढ़ रहे और ऐसी हवा हवाई खबरों की सच्चाई किसी को पता ना चले ❓
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