मैंने अपने पिछले ब्लॉग्स में बहुत सारे प्रश्नों का उत्तर दे दिया है जैसे CAA और NRC में सम्बंध और NPR और NRC में सम्बंध इत्यादि इत्यादि .
हम यहाँ बात करेंगे कि NRC से किसको - किसको दिक्कत है उससे पहले बता दूं कि गृह मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड इत्यादि से नागरिकता साबित नहीं होता है और हमारे पास उदाहरण के तौर पर केवल " असम का NRC " ही मौजूद है और तो क्या पूरे भारत मे असम के तर्ज़ पर ही एनआरसी होगा ?
और यकीन मानिए अगर असम के तर्ज पर NRC हुआ तो स्थिति बहुत ही भयावह होगा प्रस्तुत है कुछ समस्याओं की लिस्ट :-
हम यहाँ बात करेंगे कि NRC से किसको - किसको दिक्कत है उससे पहले बता दूं कि गृह मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड इत्यादि से नागरिकता साबित नहीं होता है और हमारे पास उदाहरण के तौर पर केवल " असम का NRC " ही मौजूद है और तो क्या पूरे भारत मे असम के तर्ज़ पर ही एनआरसी होगा ?
और यकीन मानिए अगर असम के तर्ज पर NRC हुआ तो स्थिति बहुत ही भयावह होगा प्रस्तुत है कुछ समस्याओं की लिस्ट :-
- ★ आधार कार्ड, जनगणना, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड इत्यादि का रिकॉर्ड सरकार के पास है तो क्या सरकार इन पर विश्लेषण करके घुसपैठिए को चिन्हित करके अगल नहीं कर सकती है ? क्या इन रिकॉर्डों का विश्लेषण करके " भारत के नागरिकों की लिस्ट " ( NRC ) तैयार नहीं किया जा सकता है ? ★ आधार कार्ड के द्वारा सरकार के पास लोगो का बियोमैट्री रिकॉर्ड है और करोड़ों खर्च करने पर आधार कार्ड बन करके तैयार हुआ है , NRC में ऐसा क्या होगा जो बियोमैट्री रिकॉर्ड से भी पुख्ता होगा ? वंशावलि साबित करना तो 75 % लोगो के लिए असंभव होगा ।
- आपको याद होगा कि " नोटबन्दी " में किसी भी धर्म के गरीबों को ही दिक्कत हुआ था क्योकि पैसे वाले तो दाएं-बाएं से अपने गैर कानूनी पैसों को भी कानूनी बना लिए थे और गरीब परिवार को तो अपने पैसे निकाले के लिए परेशान थे । मेरे हिसाब से एनआरसी भी नोटबन्दी के तरह ही साबित होगा , आपके पास असम का उदाहरण है ही , असम में किसी भी अमीर व्यक्ति का नाम NRC से बाहर नहीं हुआ है ।
- आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि किस तरीके से अमीर आदमी पैसे दे करके बैक डेट में अपने सारे कागज बनवा लेगा लेकिन गरीब आदमी का क्या होगा ?
- ★ भारत मे तमाम ऐसे लोग है जो अपने पैसों को बैंक से नहीं निकाल पाते है क्योंकि आधार कार्ड में उनका दूसरा नाम है और बैंक में दूसरा जैसे आधार कार्ड में " Bhartendu " हो और बैंक में " Bharatendu " . दोनों नाम एक ही इंसान है लेकिन केवल एक " A " के कारण वह अपना पैसा नहीं निकाल पाता है । ऐसे लोग अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे ?
- उत्तर प्रदेश के तमाम लोग मुंबई जैसे शहरों में जा करके बस गए है , ऐसे लोग NPR में अपने मम्मी के जन्म का स्थान कैसे बताएंगे ?
- मेरे पर दादी की उम्र 85 से अधिक है , वे अपने जन्म स्थान की जानकारी कैसे देंगी ?
- ऐसे बुजुर्ग लोग जो अपने गांव से दूर शहर में अपने परिवार के साथ रहते है , वे अपने पापा के जन्म स्थान की जानकारी कैसे देंगे ?
- हमारे यहाँ हिजड़ा समुदाय की स्थिति आपको पता ही होगी , उन्हें घर से निकाल दिया जाता है । अतः हिजड़ा समुदाय अपनी नागरिकता कैसे सिद्ध करेंगी ?
- भारत की अधिकांश जनता झुग्गियों में रहती है और बाढ़ आने पर हर साल तमाम घर उजड़ जाते है , ऐसे लोगो के कागज सही सलामत रहते होंगे क्या ?
- पहुँचे हुए लोग पैसे व रूतबे के बल पर पटवारी , तहसीलदार आदि से मिल करके अपने सारे कागज मिनटों में ठीक करवा लेंगे लेकिन गरीब ऐसा नहीं कर पाएंगे !
- NRC करने में करोड़ो रूपये खर्च होगा , मंदी के दौर में करोड़ो रूपये कहाँ से आएगा ?
- भारत के कुछ राज्यो से कोई विदेशी सीमा नहीं लगता है तो ऐसे राज्यो में घुसपैठिए कैसे आ सकते है ?
मेरा एक प्रश्न है कि हमे लिखित दस्तावेज पर विश्वास करना चाहिए या मौखिक बातो पर ?
जाहिर है कि अधिकांश लोग कहेंगे कि लिखत बातो पर ही विश्वास करना चाहिए क्योकि मौखिक बातो से तो आसानी से पलटा जा सकता है ।
अब बात करते है की ( CAA , NPR व NRC ) से दिक्कत क्या है ?
1. भारतीय संविधान के अनुसार भारत में कोई भी कानून धर्म के आधार पर नहीं बन सकता है इसीलिए मुसलमानों व पारसियों को आरक्षण नही मिला था और इस कानून में साफ - साफ धर्मो का उल्लेख है ।
इस कानून के बाद मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर सकता है ।
2. गृह मंत्री अमित शाह ने साफ - साफ बताया था कि पहले CAB आएगा फिर NRC आएगा ...
पहले CAB के द्वारा 6 गैर मुस्लिम समुदाय के लोगो को भारत की नागरिकता दी जाएगी उसके बाद NRC से घुसपैठिए को बाहर किया जाएगा ।
मतलब CAB के द्वारा सभी गैर मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी जाएगी चाहे उनके पास कोई कागज हो या नही !
★ मैंने अपने पिछले ब्लॉग्स में बताया है कि आखिर CAB की जरूरत क्यो पड़ी , इसीलिए यहाँ केवल समस्याओं को बता रहा हूँ .
Ok
3. इस कानून के समर्थकों का कहना है कि मुसलमानों के लिए बहुत सारे देश है लेकिन हिंदुओ के लिए केवल भारत है,
हाँ यह सही है कि विश्व में एक मात्र हिन्दू नेपाल भी अब धर्मनिरपेक्ष बन चुका है
लेकिन फिर इस आधार पर CAA में ईसाइयों और बौद्धों को भी नहीं शामिल करना चाहिए था क्योकि विश्व मे बहुत सारे ईसाई व बौद्ध राष्ट्र है ।
4. समर्थक :- ये पड़ोसी देश के अल्पसंख्यक लोगो की बात करता है
हकीकत :- आप एक बार तीन पेज के CAA कानून को पढ़ लीजिए, अगर अल्पसंख्यक शब्द लिखा होता तो फिर विवाद ही नहीं होता .
और भारत के केवल तीन पड़ोसी देश नहीं है ।
5. सरकार :- हमने 2016 से ले करके तमाम मुसलमानों को नागरिकता दिया है
सवाल :- तो फिर CAA 2019 की क्या जरूरत पड़ी ? उसी नियम से अन्य शरणार्थियों को भी नागरिकता दिया जा सकता था ।
6. सरकार : ये नागरिकता देने का कानून है लेने का नहीं !
हकीकत : गृह मंत्री ने बार बार कहा है की क्रोनोलॉजी समझिए CAA और NRC एक दूसरे से सम्बंधित है ।
7. सरकार : प्रधानमंत्री ने कह दिया कि NRC पर कोई बात नहीं हुआ है
हकीकत : महामहिम राष्ट्रपति का अभिभाषण केंद्रीय मंत्रिमंडल ही लिख करके देता है और गृह मंत्री ने संसद के रिकॉर्ड में बोला था कि NRC आएगा ..
अब लोग लिखित बातो पर ही विश्वास करेंगे ना कि मौखिक बातो पर ।
8. BJP : NPR और NRC में सम्बंध नहीं है ।
गृह मंत्रालय वेबसाइट : NPR ही NRC का पहला चरण है ।
◆ Instagram 🆔 " Bhartendu Vimal Dubey "
इस कानून के बाद मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर सकता है ।
2. गृह मंत्री अमित शाह ने साफ - साफ बताया था कि पहले CAB आएगा फिर NRC आएगा ...
पहले CAB के द्वारा 6 गैर मुस्लिम समुदाय के लोगो को भारत की नागरिकता दी जाएगी उसके बाद NRC से घुसपैठिए को बाहर किया जाएगा ।
मतलब CAB के द्वारा सभी गैर मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी जाएगी चाहे उनके पास कोई कागज हो या नही !
★ मैंने अपने पिछले ब्लॉग्स में बताया है कि आखिर CAB की जरूरत क्यो पड़ी , इसीलिए यहाँ केवल समस्याओं को बता रहा हूँ .
Ok
3. इस कानून के समर्थकों का कहना है कि मुसलमानों के लिए बहुत सारे देश है लेकिन हिंदुओ के लिए केवल भारत है,
हाँ यह सही है कि विश्व में एक मात्र हिन्दू नेपाल भी अब धर्मनिरपेक्ष बन चुका है
लेकिन फिर इस आधार पर CAA में ईसाइयों और बौद्धों को भी नहीं शामिल करना चाहिए था क्योकि विश्व मे बहुत सारे ईसाई व बौद्ध राष्ट्र है ।
4. समर्थक :- ये पड़ोसी देश के अल्पसंख्यक लोगो की बात करता है
हकीकत :- आप एक बार तीन पेज के CAA कानून को पढ़ लीजिए, अगर अल्पसंख्यक शब्द लिखा होता तो फिर विवाद ही नहीं होता .
और भारत के केवल तीन पड़ोसी देश नहीं है ।
5. सरकार :- हमने 2016 से ले करके तमाम मुसलमानों को नागरिकता दिया है
सवाल :- तो फिर CAA 2019 की क्या जरूरत पड़ी ? उसी नियम से अन्य शरणार्थियों को भी नागरिकता दिया जा सकता था ।
6. सरकार : ये नागरिकता देने का कानून है लेने का नहीं !
हकीकत : गृह मंत्री ने बार बार कहा है की क्रोनोलॉजी समझिए CAA और NRC एक दूसरे से सम्बंधित है ।
7. सरकार : प्रधानमंत्री ने कह दिया कि NRC पर कोई बात नहीं हुआ है
हकीकत : महामहिम राष्ट्रपति का अभिभाषण केंद्रीय मंत्रिमंडल ही लिख करके देता है और गृह मंत्री ने संसद के रिकॉर्ड में बोला था कि NRC आएगा ..
अब लोग लिखित बातो पर ही विश्वास करेंगे ना कि मौखिक बातो पर ।
8. BJP : NPR और NRC में सम्बंध नहीं है ।
गृह मंत्रालय वेबसाइट : NPR ही NRC का पहला चरण है ।
◆ Instagram 🆔 " Bhartendu Vimal Dubey "
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