Wednesday, 29 January 2020

CAA 2019 से पहले किसी को नागरिकता नहीं मिलता था ?

भ्रम और अफवाह बहुत ही जल्दी फैलता है लेकिन फैक्ट नहीं
पता नहीं लोग व्हाट्सएप ( सोशल मीडिया ) पर वायरल खबरों पर कैसे विश्वास कर लेते है,
 हाथ मे मोबाइल है कम से कम गूगल ही कर किया करो, अगर वायरल फ़ोटो, वीडियो या खबर सही होगा तो किसी ना किसी वेबसाइट पर मिल ही जायेगा !!

भाजपा : मुस्लिम पुराने नियमो के अनुसार भारत की नागरिकता ले सकते है ।
प्रदर्शनकारी : तो फिर धर्म के आधार पर CAA 2019 लाने की जरूरत क्यो पड़ी ? 

जिस नियम से मुसलमानों को नागरिकता दे रहे है, उन्ही नियम से अन्य लोगो को भी नागरिकता दीजिए । 
भारत मे नागरिकता का कानून तो बहुत पहले से ही है ।

भाजपा अपने ही तर्को में उलझती नजर आ रही है ।
भाजपा के अनुसार प्रदर्शनकारियों को कुछ नहीं पता है जबकि भाजपा नेता खुद CAA को CCA लिखते है 
और लोगो को समझाने के बजाए केवल रैली करते है और कहते है कि यह नागरिकता लेने का नहीं बल्कि देने का कानून है 
जबकि मंत्री जी ने ही CAA 2019 + NRC का क्रोनोलॉजी समझाया था 
और लोगो को इसी क्रोनोलॉजी से दिक्कत है । 
खैर "असम" और "पूर्वोत्तर भारत" की समस्या और व्यापक है । 
CAA 2019 का मतलब Citizenship Amendment ACT ( नागरिकता संसोधन कानून ) ।
पूरे नाम से ही स्पष्ट है कि यह एक संसोधन कानून कानून है ना कि मूल कानून
अतः भारत में बहुत पहले से ही नागरिकता देने का कानून है ।
CAA 2019 केवल नागरिकता कानून 1995 में संसोधन मात्र है इससे पहले भी मूल कानून में संसोधन हुआ था लेकिन उनमें " धर्म " का जिक्र नहीं था ।

नागरिकता " संसद " का विषय है , " विधानमंडलों " का नहीं ।

 प्रदर्शकारियों के अनुसार CAA 2019 तो मात्र ऐसे हिंदुओ को नागरिकता देने के लिए लाया गया है जो " असम के NRC " से बाहर हो गए थे

विकिपीडिया :-




भारतीय राष्ट्रिकता विधि (इंडियन नेशनैलिटी लॉ) के अनुसार भारत का संविधान पूरे देश के लिए एकमात्र नागरिकता उपलब्ध कराता है। नागरिकता से सम्बन्धित प्रावधानों को भारत के संविधान के द्वितीय भाग के अनुच्छेद 5 से 11 में दिया गया है। प्रासंगिक भारतीय कानून नागरिकता अधिनियम 1955 है, जिसे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 1986, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 1992, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2003 और नागरिकता (संशोधन) अध्यादेश 2005 के द्वारा संशोधित किया गया है, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2003 को 7 जनवरी 2004 को भारत के राष्ट्रपति के द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी और 3 दिसम्बर 2004 को यह अस्तित्व में आया। नागरिकता (संशोधन) अध्यादेश 2005 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किया गया था और यह 28 जून 2005 को अस्तित्व में आया।
इन सुधारों के बाद, भारतीय राष्ट्रीयता कानून, क्षेत्र के भीतर जन्म के अधिकार के द्वारा नागरिकता (jus soli) के विपरीत काफी सीमा तक रक्त के सम्बन्ध के द्वारा नागरिकता (jus sanguinis) का अनुसरण करता है। 

धन्यवाद 

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Sunday, 26 January 2020

" हिजड़ा " समुदाय और वंशावलि वाली NRC

अभी तक आप " CAA / NPR / NRC " पर कई तरह के ब्लॉग्स पढ़े होंगे , मीडिया के डिबेट भी देखे होंगे लेकिन आप को " हिजड़ा समुदाय " के समस्याओं पर जानकारी नहीं होगा ।
भारत समेत पूरी दुनिया मे महिला और पुरूष के अलावा तीसरा लिंग समुदाय भी रहता है ।
आपको पता ही होगा कि अगर किसी के घर कोई हिजड़ा पैदा होता है तो उसे बचपन मे ही घर से निकाल दिया जाता है ,
और अगर असम के तर्ज पर पूरे भारत मे " NRC " लागू हुआ तो इस समुदाय के लोग अपनी वंशावलि कैसे साबित करेंगे ?
क्या आपको लगता है कि कोई सरे आम यह स्वीकार कर पायेगा की ये " असमान्य " बच्चा हमारा है ?
हिजड़ा समुदाय तो पहले से ही भारत मे गुमनामी का जीवन व्यतीत करते हैं , इन्हें कोई अपने यहाँ नौकरी पर रखना पसन्द नहीं करता है ।
बाकी आप तो सब जानते होंगे कि यह समुदाय किस तरह अपना गुजारा करता है ।
क्या सरकार या विपक्ष ने इस पिछड़े समुदाय के बारे में सोचा है ?
बिकी हुई मीडिया से कुछ उमीद करना ही बेकार है ।

नोट :-
लोग हिजड़ो को छक्का और 3rd Gender ( तीसरा लिंग ) भी कहते है ।
मैं जब " हिजड़ा समुदाय " का उपयोग करता हूँ तो उसमें मैं समलैंगिकों ( Gays ) को , Bisexuals को , Bromances आदि को भी शामिल करता हूँ ।

* मैं " असमान्य बच्चा " का उपयोग इसीलिए किया हूँ क्योकि लोग समाज मे केवल " पुरुष " और " महिला " को ही देखना चाहते है और बाकी लोगो को " असमान्य " मानते है ।
इतने पिछड़े समुदाय पर " NRC " जैसे कानून का क्या असर पड़ेगा ?

धन्यवाद

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" भारत माता की जय " का विरोध क्यो ?

अधिकांश लोग सोचते है कि " भारत माता की जय " नहीं बोलना देशद्रोह है , शायद आप भी यही सोचते होंगे ?

क्या आप जानते है कि यह " नारा " कहाँ से आया और कौन से लोग इसे प्रसारित करते है ? 
क्या आप ने कभी " भारत माता " के फोटो को देखा है ? 

आप " आरएसएस " पर विचार करे तो आप पाएंगे कि " भारत माता " की कल्पना ऐसे महिला के तौर पर किया गया है जो बच्चे पैदा करती है , जो घर मे बैठी रहती है , बिल्कुल एक सामान्य गृहणी के तरह । 
अगर कोई महिला बच्चे पैदा ना करे तो उसे भारत माता नहीं कहा जायेगा ? 
इन्ही कारणों से तमाम महिलावादी संगठन " भारत माता की जय " नारा का विरोध करती है , इन महिलावादी संगठनों का मानना है कि " RSS " महिला विरोधी संगठन है और इसीलिए ये महिला विरोधी प्रोपेगैंडा चलाती है । 

दूसरा विचार है यह कि हम अपने माता के चरणों मे स्वर्ग देखते है , ना कि चरणों मे माता को रखे ।

तमाम लोगों के द्वारा सवाल पूछा जाता रहा है कि आखिर अभी तक " RSS " में कोई महिला पदाधिकारी क्यों नहीं हुआ है ?

अतः लोग " भारत माता की जय " नारा को " आरएसएस " स जोड़ करके देखते है ।

निष्कर्ष :-
" भारत माता की जय " बोलना या नहीं बोलना व्यक्तिगत विषय है ।
किसी को एक नारा बोलने या नहीं बोलने के आधार पर देशद्रोही या देशभक्त कहना बिल्कुल उचित नहीं है ।

कोई नारा लगाना या नहीं लगाना यह हर भारतीय इंसान का अपना व्यक्तिगत सोच व विचार है ।

इस पर आपकी क्या राय है ? कमेंट करके हमे बताया ।

धन्यवाद

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NRC पर कुछ शंकाएं व सुझाव ( NRC का विरोध क्यो ? ) Very Important Blog

मैंने अपने पिछले ब्लॉग्स में बहुत सारे प्रश्नों का उत्तर दे दिया है जैसे CAA और NRC में सम्बंध और NPR और NRC में सम्बंध इत्यादि इत्यादि .
हम यहाँ बात करेंगे कि NRC से किसको - किसको दिक्कत है उससे पहले बता दूं कि गृह मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड इत्यादि से नागरिकता साबित नहीं होता है और हमारे पास उदाहरण के तौर पर केवल " असम का NRC " ही मौजूद है और तो क्या पूरे भारत मे असम के तर्ज़ पर ही एनआरसी होगा ?
और यकीन मानिए अगर असम के तर्ज पर NRC हुआ तो स्थिति बहुत ही भयावह होगा प्रस्तुत है कुछ समस्याओं की लिस्ट :-
  • ★    आधार कार्ड, जनगणना, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड इत्यादि का रिकॉर्ड सरकार के पास है तो क्या सरकार इन पर  विश्लेषण करके घुसपैठिए को चिन्हित करके अगल नहीं कर सकती है ? क्या इन रिकॉर्डों का विश्लेषण करके " भारत के नागरिकों की लिस्ट " ( NRC ) तैयार नहीं किया जा सकता है ? 
  • ★    आधार कार्ड के द्वारा सरकार के पास लोगो का बियोमैट्री रिकॉर्ड है और करोड़ों खर्च करने पर आधार कार्ड बन करके तैयार हुआ है , NRC में ऐसा क्या होगा जो बियोमैट्री रिकॉर्ड से भी पुख्ता होगा ? वंशावलि साबित करना तो 75 % लोगो के लिए असंभव होगा ।  
  • आपको याद होगा कि " नोटबन्दी " में किसी भी धर्म के गरीबों को ही दिक्कत हुआ था क्योकि पैसे वाले तो दाएं-बाएं से अपने गैर कानूनी पैसों को भी कानूनी बना लिए थे और गरीब परिवार को तो अपने पैसे निकाले के लिए परेशान थे । मेरे हिसाब से एनआरसी भी नोटबन्दी के तरह ही साबित होगा , आपके पास असम का उदाहरण है ही , असम में किसी भी अमीर व्यक्ति का नाम NRC से बाहर नहीं हुआ है । 
  • आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि किस तरीके से अमीर आदमी पैसे दे करके बैक डेट में अपने सारे कागज बनवा लेगा लेकिन गरीब आदमी का क्या होगा ? 
  • ★ भारत मे तमाम ऐसे लोग है जो अपने पैसों को बैंक से नहीं निकाल पाते है क्योंकि आधार कार्ड में उनका दूसरा नाम है और बैंक में दूसरा जैसे आधार कार्ड में " Bhartendu " हो और बैंक में " Bharatendu " . दोनों नाम एक ही इंसान है लेकिन केवल एक " A " के कारण वह अपना पैसा नहीं निकाल पाता है । ऐसे लोग अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे ? 
  • उत्तर प्रदेश के तमाम लोग मुंबई जैसे शहरों में जा करके बस गए है , ऐसे लोग NPR में अपने मम्मी के जन्म का स्थान कैसे बताएंगे ? 
  • मेरे पर दादी की उम्र 85 से अधिक है , वे अपने जन्म स्थान की जानकारी कैसे देंगी ? 
  • ऐसे बुजुर्ग लोग जो अपने गांव से दूर शहर में अपने परिवार के साथ रहते है , वे अपने पापा के जन्म स्थान की जानकारी कैसे देंगे ? 
  • हमारे यहाँ हिजड़ा समुदाय की स्थिति आपको पता ही होगी , उन्हें घर से निकाल दिया जाता है । अतः हिजड़ा समुदाय अपनी नागरिकता कैसे सिद्ध करेंगी ? 
  • भारत की अधिकांश जनता झुग्गियों में रहती है और बाढ़ आने पर हर साल तमाम घर उजड़ जाते है , ऐसे लोगो के कागज सही सलामत रहते होंगे क्या ? 
  • पहुँचे हुए लोग पैसे व रूतबे के बल पर पटवारी , तहसीलदार आदि से मिल करके अपने सारे कागज मिनटों में ठीक करवा लेंगे लेकिन गरीब ऐसा नहीं कर पाएंगे ! 
बाकी गृह मंत्री के भाषण से स्पष्ट है कि इससे केवल मुसलमानों को डरने की जरूरत है क्योकि अगर कोई हिन्दू अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पायेगा तो उसे CAA 2019 से दुबारा नागरिकता मिल जाएगा लेकिन क्या फिर वे स्वाभिमान से जिंदा रह पाएंगे ? लोग उस पर हमेशा शक करेंगे कि ये तो घुसपैठिया है ये अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाया था । 
  • NRC करने में करोड़ो रूपये खर्च होगा , मंदी के दौर में करोड़ो रूपये कहाँ से आएगा ? 
  • भारत के कुछ राज्यो से कोई विदेशी सीमा नहीं लगता है तो ऐसे राज्यो में घुसपैठिए कैसे आ सकते है ?
*** *** *** *** *** *** *** 
 मेरा एक प्रश्न है कि हमे लिखित दस्तावेज पर विश्वास करना चाहिए या मौखिक बातो पर ?
जाहिर है कि अधिकांश लोग कहेंगे कि लिखत बातो पर ही विश्वास करना चाहिए क्योकि मौखिक बातो से तो आसानी से पलटा जा सकता है । 

अब बात करते है की ( CAA , NPR व NRC ) से दिक्कत क्या है ? 

1. भारतीय संविधान के अनुसार भारत में कोई भी कानून धर्म के आधार पर नहीं बन सकता है इसीलिए मुसलमानों व पारसियों को आरक्षण नही मिला था और इस कानून में साफ - साफ धर्मो का उल्लेख है ।
इस कानून के बाद मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर सकता है ।
2. गृह मंत्री अमित शाह ने साफ - साफ बताया था कि पहले CAB आएगा फिर NRC आएगा ...
पहले CAB के द्वारा 6 गैर मुस्लिम समुदाय के लोगो को भारत की नागरिकता दी जाएगी उसके बाद NRC से घुसपैठिए को बाहर किया जाएगा ।
मतलब CAB के द्वारा सभी गैर मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी जाएगी चाहे उनके पास कोई कागज हो या नही !
★ मैंने अपने पिछले ब्लॉग्स में बताया है कि आखिर CAB की जरूरत क्यो पड़ी , इसीलिए यहाँ केवल समस्याओं को बता रहा हूँ .
Ok
3. इस कानून के समर्थकों का कहना है कि मुसलमानों के लिए बहुत सारे देश है लेकिन हिंदुओ के लिए केवल भारत है,
हाँ यह सही है कि विश्व में एक मात्र हिन्दू नेपाल भी अब धर्मनिरपेक्ष बन चुका है
लेकिन फिर इस आधार पर CAA में ईसाइयों और बौद्धों को भी नहीं शामिल करना चाहिए था क्योकि विश्व मे बहुत सारे ईसाई व बौद्ध राष्ट्र है ।
4. समर्थक :- ये पड़ोसी देश के अल्पसंख्यक लोगो की बात करता है
हकीकत :- आप एक बार तीन पेज के CAA कानून को पढ़ लीजिए, अगर अल्पसंख्यक शब्द लिखा होता तो फिर विवाद ही नहीं होता .
और भारत के केवल तीन पड़ोसी देश नहीं है ।
5. सरकार :- हमने 2016 से ले करके तमाम मुसलमानों को नागरिकता दिया है
सवाल :- तो फिर CAA 2019 की क्या जरूरत पड़ी ? उसी नियम से अन्य शरणार्थियों को भी नागरिकता दिया जा सकता था ।
6. सरकार : ये नागरिकता देने का कानून है लेने का नहीं !
हकीकत : गृह मंत्री ने बार बार कहा है की क्रोनोलॉजी समझिए CAA और NRC एक दूसरे से सम्बंधित है ।
7. सरकार : प्रधानमंत्री ने कह दिया कि NRC पर कोई बात नहीं हुआ है
हकीकत : महामहिम राष्ट्रपति का अभिभाषण केंद्रीय मंत्रिमंडल ही लिख करके देता है और गृह मंत्री ने संसद के रिकॉर्ड में बोला था कि NRC आएगा ..
अब लोग लिखित बातो पर ही विश्वास करेंगे ना कि मौखिक बातो पर ।
8. BJP : NPR और NRC में सम्बंध नहीं है ।
गृह मंत्रालय वेबसाइट : NPR ही NRC का पहला चरण है ।

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Thursday, 23 January 2020

क्या NPR ही NRC है ?

  ■    क्या NPR और जनगणना में अंतर है ❓
     
      जैसा कि आप सभी को पता है कि 1951 से हर दस साल के अंतराल पर भारत मे जनगणना होता है, 2011 में जनगणना हुआ था तो यह जायज है कि फिर 2021 में जनगणना होगा , जनगणना एक सामान्य प्रक्रिया है इसीलिए इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए ।
         NPR का मूल नागरिकता संसोधन कानून 2003  है जिसे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ले करके आयी थी ।
      अतः NPR और जनगणना को एक समझना मूर्खता होगी ।

◆  क्या 2015 के NPR और 2020 के लिए प्रस्तावित NPR में अंतर है ❓
   
    पहला एनपीआर 2010 में तैयार किया गया था। इसे 2015 में अपडेट किया गया था। अब इसे एक बार फिर अपड़ेट किया जाएगा। इसके लिए अप्रैल 2020 से सितंबर 2021 की जनगणना में हाउसलिस्टिंग फेज के साथ काम शुरू किया जाएगा। 
 इस बार के NPR में कुछ नए प्रश्न जोड़े गए है जैसे आपके पिता का जन्म कहाँ हुआ था ? , आपके माता का जन्म कहाँ हुआ था ? 
हम गृह मंत्रालय के वेबसाइट पर NPR में पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची देख सकते हैं ।  
अतः प्रश्नों के लिहाज से कांग्रेस शासन में आये NPR और अब भाजपा सरकार में आये NPR में अंतर है ।  

★    क्या NPR ही NRC है  ❓  

  गृह मंत्री व भाजपा के अनुसार NPR और NRC में कोई सम्बंध नहीं है 
जबकि CAA 2003 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि NPR ही NRC का पहला कदम होगा । 

गृह मंत्री और भाजपा के अनुसार NRC के लिए NPR के डाटा का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा 
जबकि गृह मंत्रालय के नवीनतम रिपोर्ट में उल्लेखित है कि NPR ही NRC का पहला चरण है अर्थात बिना NPR के NCR नहीं हो सकता है । 

अतः स्पष्ट रूप से NPR ही NRC नहीं है 
परंतु दोनों में समानता है । 
  जो लोग कह रहे है कि NPR ही NRC है वे आपको गुमराह कर रहे है
 और जो लोग ये कह रहे है कि NPR और NRC में कोई सम्बंध नहीं है वे भी आपको गुमराह कर रहे है । 

Full Forms :- 

1. NPR = The National Population Register / राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर 
2. CAA 2003 = Citizenship Amendment Act 2003 / नागरिकता संसोधन कानून 2003 
* CAA 2003 या CAA 2019 ये दोनों कानून नागरिकता के मूल कानून 1955 में संसोधन करके बनाया गया है *
3. NRC = The National Register of Citizens / राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर  

नोट :- अन्य जानकारी के लिए हमारे पुराने ब्लॉग्स को पढ़े और कोई प्रश्न हो तो कमेंट में पूछे . 

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क्या CAA और NRC में अटूट सम्बंध है ?

  क्या CAA और NRC एक दूसरे से सम्बंधित है ? 
मैं यहाँ मान करके चल रहा हूँ कि आपको CAA 2019 की मूलभूत बाते पता होगी । 
◆ CAA 2019 लाने की जरूरत इसीलिए पड़ी क्योकि असम के NRC में अधिकांश गैर मुस्लिम बाहर हुए थे ।
 ( इस सम्बंध में आप मेरे पुराने ब्लॉग्स को पढ़ सकते है ) 
● गृह मंत्री अमित शाह ने समझाते हुए कहा था कि पहले हम CAB के द्वारा 6 गैर मुस्लिम समुदाय ( जैन, पारसी, बौद्ध, हिन्दू, ईसाई, सिख ) के शरणार्थियों को नागरिकता देंगे और फिर NRC के द्वारा घुसपैठिए को बाहर करेंगे . 
अब आप एक मिनट ठरह के सोचिए कि अमित शाह कहना क्या चाहते है ? 
तो क्या अमित शाह का मतलब है कि गैर मुस्लिम घुसपैठिए को भी नागरिकता मिलेगा और शरणार्थी मुसलमान भी घुसपैठिए है ? 
◆ कुछ लोगो के अनुसार अगर कोई अब्दुल खान और भारतेन्दु दुबे NRC में अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पायेगा तो दोनों से नागरिकता के सारे अधिकार छीन लिए जाएंगे और उन्हें डिटेंशन कैम्प में डाल दिया जाएगा लेकिन CAA के माध्यम से भारतेन्दु दुबे को वापस भारत की नागरिकता मिल जाएगी लेकिन अब्दुल खान को नहीं । 
★ 
 सवाल :- सबसे पहले CAA और NRC में सम्बंध किसने बताया ? 
जबाब :- तत्कालीन भापज अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 
◆ 
सवाल :- क्या असम में NRC से बाहर हुए गैर मुसलमानों को नागरिकता देने के लिए CAA लाया गया है ? 
जबाब :- गृह मंत्री और भाजपा के अनुसार " हाँ  "
● 
सवाल :- प्रधानमंत्री ने कहा है कि NRC की चर्चा नहीं हुई है 
जबाब :- प्रधानमंत्री ने झूठ कहा था क्योकि NRC की चर्चा संसद में गृह मंत्री ने किया था । 
◆ 
सवाल : प्रधानमंत्री और गृह मंत्री में से कौन सही बोल रहा है ? 
जबाब : हमे मौखिक बातो पर विश्वास नहीं करना चाहिए । 
हमे गृह मंत्रालय और सरकार के वेबसाइट , सरकारी पत्र , न्यायालय के आदेश या संसद के रिकॉर्ड पर विश्वास करना चाहिए । 
● 
सवाल : अभी तो NRC का ड्राफ्ट वैगरा नहीं हुआ है तो विरोध प्रदर्शन क्यो ? 
जबाब : तो महामहिम राष्ट्रपति के लिखित अभिभाषण पर विश्वास ना करे ? संसद के रिकॉर्ड पर विश्वास ना करे ? 
● 
मैं यहाँ किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचना चाहता हूँ, आप खुद एक बार तीन पेज का " CAA 2019 " कानून पढ़ लीजिए और गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के भाषणों में तुलना कर लीजिए , ध्यान रहे कि मोदी जी ने CAA पर संसद में हुए बहस में बिल्कुल भी हिस्सा नहीं लिया था , CAA गृह मंत्री ने पेश किया था और अमित शाह ने ही इस चर्चा पर जबाब भी दिया था , 
तो आप खुद तय कर ले किस पर विश्वास करे और किस पर नहीं ।
आप खुद से पढ़े और समझे फिर किसी निष्कर्ष पर पहुंचे 

नोट : आप अधिक जानकारी के लिए मेरे पुराने ब्लॉग्स भी पढ़ सकते है ।
कमेंट करके अपनी राय दे 

🙏 धन्यवाद 🙏 

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केवल CAA से क्या परेशानी है ?

             उत्तर भारत मे CAA का विरोध    

अगर आप CAA को NRC से अगल करके देखेंगे तो आपको निम्नलिखित एक दिक्कत ही मिलेगा ।

भारतीय संविधान के अनुसार भारत में कोई भी कानून धर्म के आधार पर नहीं बन सकता है इसीलिए मुसलमानों व पारसियों को आरक्षण नही मिला था और इस कानून में साफ - साफ धर्मो का उल्लेख है ।
इस कानून के बाद मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर सकता है ।।

[ वैसे किसी कानून के संवैधानिक या असंवैधानिक होने का फैसला भारत की तथाकथित स्वत्रंत न्यायपालिका करती है ]
【 श्रीमती इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा किया था और न्यायपालिका ने उसे संवैधानिक घोषित किया था फिर लोगो ने विशेषकर JP ने आपातकाल का घोर विरोध किया था 】

दूसरी तरफ अगर आप गृह मंत्री अमित शाह के भाषणों पर ध्यान देंगे तो आप पाएंगे कि CAA , NPR और NRC तीनो एक दूसरे से सम्बंधित है ।

        असम व पूर्वोत्तर भारत मे CAA का विरोध  
◆  पूर्वोत्तर भारत विशेष रूप से असम की स्थिति इस से अलग है आप मेरे पुराने ब्लॉग्स में पढ़ सकते है कि किस तरह से CAA का विवाद पूर्वोत्तर भारत के लिए और उत्तर भारत के लिए अलग अलग है ।

आर्टिकल-14 : समानता का अधिकार
भारत के संविधान में यह कहा गया है कि राज्य, भारत के राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता से या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा. भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 के हिसाब से इसका मतलब यह है कि सरकार भारत में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगी. 

Keys :-
 * CAB 2019 = नागरिकता संसोधन बिल 2019 / Citizenship Abetment Bill 2019
* संसद से पारित होने के बाद और महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद CAB , CAA हो गया है
CAA 2019 = नागरिकता संसोधन कानून 2019 / Citizenship Abetment Act 2019

👇 अगर कोई सवाल या सुझाव हो तो कमेंट करके बताए

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Wednesday, 22 January 2020

तो क्या लोकतंत्र खतरे में है ?

जब सरकार के विरोध को देशद्रोह कहा जाने लगा जाए तो शक होता है क्या लोकतंत्र खतरे में है ?
और ये शक जायज भी है क्योंकि लोकतंत्र में सभी को शान्तिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की छूट होती है, आप हाल के घटनाक्रम को देखेंगे तो आप पाएंगे कि कुछ विशेष लोगों द्वारा हर उस शख्स को देशद्रोही कह दिया जा रहा है जो सरकार से प्रश्न करता है
और EIU की रिपोर्ट इन सन्देहों को पुष्ट करती हुई नजर आ रही है ...
◆ हाल ही में इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) ने 167 देशों के सन्दर्भ में लोकतंत्र सूचकांक जारी किया है, इसमें 5 श्रेणियों के 60 सूचकों के आधार देशों को रैंकिंग प्रदान की गयी है । यह श्रेणियां हैं : चुनावी प्रक्रिया व बहुवाद, सरकार का कार्य, राजनीतिक प्रतिभागिता, लोकतान्त्रिक राजनीतिक संस्कृति तथा नागरिक स्वतंत्रता ।
★ इस सूचकांक में भारत को 41वां स्थान प्राप्त हुआ .
● इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) के अनुसार सम्पूर्ण एशिया प्रशांत क्षेत्र में केवल ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ही पूर्ण लोकतांत्रिक देश हैं।
अल्जीरिया, कांगो का लोकतान्त्रिक गणराज्य, तिमोर-लेस्ते, एथिपिया, उत्तरी कोरिया, लाओस, नेपाल तथा श्रीलंका के सन्दर्भ में कहा गया है “नाम में लोकतान्त्रिक परन्तु पूर्ण रूप से लोकतान्त्रिक नहीं” ।
★ चिंताजनक बात यह कि आज तक EIU के रिपोर्ट में भारत प्रत्येक वर्ष सुधार करता रहा है जबकि इस वर्ष भारत की रैंकिंग पिछले वर्ष से बहुत कम है
और यह भारत का आज तक सबसे खराब प्रदर्शन है ।

नोट :- 

इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU)

यह एक आर्थिक विश्लेषक तथा सलाहकार संस्था है, इसकी स्थापना 1946 में की गयी थी। इसका मुख्यालय यूनाइटेड किंगडम के लन्दन में स्थित है। यह संस्था मासिक राष्ट्रीय रिपोर्ट, पंच वर्षीय आर्थिक पूर्वानुमान तथा औद्योगिक रिपोर्ट इत्यादि प्रकाशित करती है। इसका स्वामित्व इकोनॉमिस्ट ग्रुप के अधीन है। इसकी प्रमुख सब्सिडियरी बेज़ियन, क्लियरस्टेट तथा कैनबैक कंसल्टिंग हैं।

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Sunday, 19 January 2020

टुकड़े - टुकड़े गैंग , भाषण और पत्रकारिता

2016 से भाजपा नेताओं के द्वारा " टुकड़े - टुकड़े गैंग " शब्द का लगातार इस्तेमाल किया जाता है ...
एक बार याद कीजिए कि किस तरह 2016 से अब तक लगातार इस शब्द का इस्तेमाल हो रहा है और लोग इन बातों पर आंख बंद करके विश्वास भी करते है , पत्रकार भी आंख बंद करके रिपोर्टिंग करते है ...
शायद आपने भी विश्वास कर लिया हो कि वास्तव में कोई ऐसा गैंग है ,
लेकिन ध्यान रहे कि केंद्र में सरकार भाजपा की ही है और दिल्ली पुलिस समेत सभी जरूरी एजेंसियां केंद्र सरकार के ही अधीन होती है और हमारे यहाँ न्यायपालिका भी स्वत्रंत है तो अगर वास्तव में ऐसा कोई गैंग है तो सरकार उसपर कार्यवाही क्यो नहीं करती है ?
आइए आपको कुछ नया और जरूरी जानकारी देते है :-

जब जनवरी 2020 में एक RTI दायर करके केंद्र सरकार से इस गैंग के बारे में  कुछ जानकारी माँगा जाता है जैसे टुकड़े टुकड़े गैंग कौन है ? इसके कितने सदस्य है ? इसके खिलाफ कोई एक्शन क्यो नहीं लिया जाता है ? तो
" केंद्रीय गृह मंत्रालय कहता है हमारे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है " 
तो क्या इस शब्द का उपयोग केवल वोट बैंक के लिए किया जाता रहा है ?
गोदी मीडिया केवल भाषणों की रिपोर्टिंग करता है, फैक्टस की नहीं ...
  एक दूसरे RTI में पूछा गया कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाय बेचने सम्बंधित कुछ जानकारी चाहिए जैसे वे कब चाय बेचते थे , कहाँ बेचते थे ? उस समय का कोई फ़ोटो या कुछ ?
 केंद्र सरकार का जबाब आता है कि हमारे पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाय बेचने से सम्बंधित कोई भी जानकारी नहीं है .

इतना ही नहीं समय समय पर नेताओ द्वारा हजारों झूठ बोले जाते है और हम आँख बंद करके जुमलों व झूठ से भरे भाषणों पर विश्वास भी कर लेते हैं .
तो क्या इसीलिए सरकारे शिक्षा पर खर्च नहीं करती है जिससे जनता गवार / अनपढ़ रहे और ऐसी हवा हवाई खबरों की सच्चाई किसी को पता ना चले ❓
बाकी न्यूज़ चैनल तो पैसे ले करके फैक्ट्स को छोड़ केवल भाषण दिखाते है .

 " Bhartendu Vimal Dubey "

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अपराधी, निरक्षर व अनपढ़ नेता करेंगे समस्याओं का समाधान ?

 कुछ बुनियादी किंतु गम्भीर प्रश्न :-

  •  एक मतदाता दो जगहों पर मतदान नहीं कर सकता है तो फिर एक व्यक्ति दो जगहों से चुनाव कैसे लड़ सकता है ? 
  •  क्या बलात्कार के आरोपियों को चुनाव लड़ने या वोट देने का अधिकार होना चाहिए ?

सांसदों और विधायकों का मुख्य काम होता है कानून का निर्माण करना ...

  • तो क्या गवार / निरक्षर सांसद व विधायक कानून का निर्माण कर सकते है ? 
  • क्या अपराधी नेतागण अपराध को रोकने का कानून बना सकते है ? 
  • क्या सत्तारूढ़ पार्टी के पास अपने नेताओ के ऊपर लगे आरोपों को वापस लेने का अधिकार होना चाहिए ? 
  • क्या नेताओ के पास खुद के बेटे या रिश्तेदारों को ठेका देने का अधिकार होना चाहिए ? 
न्याय में देरी का अर्थ होता है न्याय का ना मिलना ... आजकल गरीबो के लिए पाना असंभव सा हो गया है ... देरी ... वकीलों का भारीभरकम फीस ... सरकारी वकीलों का सही से काम ना करना ...
 क्लोजिएम प्रणाली में भाई - भतीजावाद ...
सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के जजों पर विश्लेषण कर लीजिए , एकदम मन चाहा नियुक्ति होती है , निश्चित नियम - कानूनों का घोर अभाव है ...
  • निश्चित टाइम में न्याय मिल जाये , इसके लिए व्यवस्था करना चाहिए 
  • पारदर्शी तरीके से जजों की नियुक्ति होनी चाहिए 
  • अहम फैसलों का लाइव टेलीकास्ट होना चाहिए     
  भारत की शिक्षा व्यवस्था एकदम डबाडोल है , शिक्षक केवल कॉपी - पेस्ट करवाते है , विद्यायल प्रबन्धक को केवल पैसों से मतलब होता है और विद्यार्थियों को केवल पासिंग मार्क से मतलब होता है , अभिभावकों को केवल फीस भरने से मतलब होता है ...

  • ऐसे विद्यालयों को बंद कर देना चाहिए जो गांव - देताह में बनाये गए है और केवल परीक्षा के दिन खुलते है 
  • सरकारी विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करके , नियमित निगरानी करवाना चाहिए , अध्यापकों की बायोमैट्रिक हजारी होनी चाहिए 
  • थ्योरी के जगह पर प्रैक्टिकल पर फोकस होना चाहिए 
  • बच्चे पढ़ाई तो कर लेते है लेकिन उनको ये नहीं पता होता है कि इन चीजों का उपयोग कब और कैसे करना है 
  • बच्चे बहुत मेहनत से प्रेक्टिकल की कापियां व फ़ाइल तैयार करते है और शिक्षक एग्जाम के दिन उस पर हस्ताक्षर करके उस फ़ाइल को रद्दी में बेच देते है 
  • समझने से अधिक रटने और पास होने पर ध्यान दिया जाता है 
  • एक क्लास में एक टीचर के भरोसे 60 - 60 बच्चे होते है मतलब 40 मिनट के बेल में एक बच्चे के ऊपर 1 मिनट भी ध्यान नहीं दिया जाता है 
 लोकतांत्रिक देशों में लगभग सभी फैसले राजनेताओं / राजनीतिक दलों द्वारा लिया जाता है इसीलिए सबसे सबसे पहले राजनीति में पारदर्शिता लाना होगा , कौन किसको चंदा दे रहा है ये सब सार्वजनिक किया जाना चाहिए , RTI जैसे कानूनों को कमजोर नही बल्कि मजबूत किया जाना चाहिए . 

★ मूलभूत कानूनों व संवैधानिक व्यवस्थाओं की जानकारी अनिवार्य रूप से सभी विषय वर्ग के विद्यार्थियों को दिया जाना चाहिए . 

 ऐसे तमाम छोटे - छोटे किंतु महत्वपूर्ण परिवर्तनों के माध्यम से ही सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है ।

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Thursday, 2 January 2020

CAA / NRC का मुद्दा हिन्दू - मुस्लिम वाला नहीं है । ( संक्षिप्त )


हिंदुओं को भी #CAA2019 का विरोध करना चाहिए क्योंकि अगर मुसलमानों को छोड़ भी दे तो #caa तमाम हिन्दू शरणार्थियों के भी खिलाफ है ।

1.  ऐसे हिंदुओं को इससे क्या लाभ होगा जो अन्य राज्यो से जा करके असम में बसे थे और #NRC से बाहर हो गए थे ।
2.  तमिल हिन्दू शरणार्थियों को इस कानून से क्या लाभ होगा ?
3.  क्या इस कानून के पहले ऐसा कोई कानून नहीं था जिससे शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जा सके ?
4.  असम जैसे कुछ राज्यो को भारतीय संविधान द्वारा विशेष सरंक्षण दिया गया है जिसके अंतर्गत किसी भी कानून द्वारा वहाँ पर किसी भी घुसपैठियों को नागरिकता नहीं दिया जा सकता है क्योंकि पूर्वोत्तर भारत मे हिन्दू / मुस्लिम से अधिक स्थानीय संस्कृति का महत्व है ।

और भी बहुत सारे कारण है इस कानून के विरोध का !!
 
★ याद रखें कि किसी कानून के खिलाफ या सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं होता है । 

  पूरी जानकारी के लिए मेरे अन्य ब्लॉग को पढ़े . 

:-  #BhartenduVimalDubey