Friday, 28 August 2020

मोदी सरकार देश के लिए हानिकारक है :- भारत में बढ़ा भुखमरी और प्रेस की स्वतंत्रता हुई खत्म !! विश्व भुखमरी सूचकांक और विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में हुआ खुलासा ।।

मोदी सरकार के बाद भारत मे बेरोजगारी, भुखमरी, रेप, महिलाओं व अल्पसंख्यकों के प्रति हिंसा में जबरदस्त वृद्धि हुई है । 
ठहरिए, यह राहुल गांधी या किसी विपक्षी पार्टी का बेबुनियाद आरोप नहीं है बल्कि हकीकत है हकीकत ।  2014 के बाद भुखमरी इंडेक्स, मीडिया इंडेक्स, बेरोजगारी इंडेक्स आदि सभी मे भारत लगातार पिछड़ता जा रहा है ।

यहाँ हम वर्ल्ड हंगर इंडेक्स और वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे कि कैसे मोदी सरकार मीडिया पर कंट्रोल करके अपने नाकामियों को छिपा रही है । 

           ☆     भारत में बढ़ गया है भुखमरी      ☆

 2014 के बाद से ग्लोबल हंगर इंडेक्स ( विश्व भुखमरी सूचकांक ) में भारत की रैंकिंग में लगातार गिरावट आई है :-  

वर्ष 2014 में भारत जहां 55वें पायदान पर था, तो वहीं 2015 में 80वें, 2016 में 97वें और 2017 में 100वें पायदान पर आ गया. वर्ष 2018 की रैंकिंग में भारत पिछले वर्ष की तुलना में तीन पायदान और गिरकर 103वें स्थान पर आ गया है ।  

ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2019 में कुल 117 देशों को शामिल किया गया, जिसमें भारत 102वें पायदान पर है । यह दक्षिण एशियाई देशों में सबसे निचला स्थान है। भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2019 में पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका से भी पीछे है । 

डेटा - Global Hunger Index

ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2018 में कुल 119 देशों को शामिल किया गया था जिसमें भारत 103वें पायदान पर था. भारत नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों से पीछे था, लेकिन पाकिस्तान से आगे था. पाकिस्तान इस रिपोर्ट में 106वें स्थान पर मौजूद था जबकि भारत पिछले वर्ष 100वें स्थान पर था । 

15 अक्टूबर 2020 के आसपास ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) रिपोर्ट-2020 भी जारी हो गया है जिसे मैं आज 23 अक्टूबर को इस ब्लॉग में जोड़ रहा हूँ जिसके अनुसार भारत में अब भी काफी भुखमरी मौजूद है । 107 देशों के लिए की गई रैंकिंग में भारत 94वें पायदान पर आया है । भारत कई सारे पड़ोसी देशों यथा नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, श्रीलंका, म्यामांर से भी पीछे चल रहा है । केवल 13 देश ऐसे हैं जो हंगर इंडेक्स में भारत से पीछे है । रिपोर्ट के मुताबिक भारत की करीब 14% जनसंख्या कुपोषण का शिकार है. भारत में बच्चों में कुपोषण की स्थिति भयावह है । 

           ☆  भारत मे प्रेस की स्वतंत्रता ? 

मीडिया का काम पैसे ले करके सरकारी विज्ञापन करना नहीं है क्योकि उसके लिए सरकार के पास भारी - भरकम बजट वाला "सूचना प्रसारण मंत्रालय" और "प्रसार भारती" है 
लेकिन 2014 के बाद मीडिया यही काम कर रहा है । 

न्यूज़ चैनलों पर से खेती - किसानी, ग्राउंड रिपोर्ट, बेरोजगारी आदि की खबरे पूरी तरीके से गायब हो गयी है । 
अब न्यूज़ चैनलों पर केवल प्रायोजित डिबेट होता है । 

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक ( वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स ) में भारत साल 2017 में 136वें स्थान पर और साल 2018 में 138वें स्थान पर था और साल 2019 में दो अंक कम होकर 140 पर पहुंच गया था. इस सर्वेक्षण में कुल 180 देशों को शामिल किया गया था. 

 2020 में भारत 142वे स्थान पर आया है जो आजतक का सबसे खराब प्रदर्शन है । 

👉 कश्मीर की स्थिति ने इस साल की रिपोर्ट को बहुत हद तक प्रभावित किया है. जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त 2019 को आर्टिकिल 370 हटाए जाने के बाद वहां की स्थिति तनावपूर्ण बानी हुई है.

जम्मू-कश्मीर में अपनी कार्रवाई से पहले, सरकार ने राज्य में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की, इंटरनेट और फोन बंद कर दिए और मनमाने ढंग से हजारों कश्मीरियों को हिरासत में ले लिया, जिनमें राजनीतिक नेता, कार्यकर्ता, पत्रकार, वकील और बच्चों सहित संभावित प्रदर्शनकारी शामिल थे. 

👉 अगर केवल न्यूज़ चैनलों TV की बात की जाए तो भारत को 142वां स्थान भी नसीब ना हो क्योकि भारत के 80% इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अम्बानी का पैसा लगा हुआ है जो कि सत्ताधारी दल भाजपा के समर्थक के रूप में देखे जाते हैं । 

👉 इस सूची में लगातार चौथी बार नॉर्वे पहले स्थान पर है और नॉर्थ कोरिया सबसे निचले स्थान पर है । 2007 से 2012 तक नॉर्वे लगातार टॉप पर रहा था । अब तक जारी हुई कुल 18 रैंकिंग में से 13 बार नॉर्वे ही नंबर एक रहा है।

👉 दक्षिण एशिया में सामान्य तौर पर सूचकांक में खराब प्रदर्शन नजर आया. इसमें पाकिस्तान तीन स्थान गिरकर 145 और बांग्लादेश एक स्थान गिरकर 151 पर आ गया है. चीन 177वें स्थान पर उत्तर कोरिया से महज तीन स्थान ऊपर है. अर्थात 180वें स्थान पर उत्तर कोरिया है. 

 आने वाले समय में भी भारत में प्रेस पर अघोषित प्रतिबंध जारी ही रहेगा :- 

👉 मोदी सरकार की आलोचना करने वाली अनेकों वेबसाइटों को बिना किसी कारण के बंद किया जा चुका है । 

👉 हाल ही में Wall Street Journal ने अपने लेख में खुलासा किया है कि फेसबुक अपने प्लेटफार्म पर भाजपा से जुड़े लोगों को अधिक views, like व शेयर मुहैया करवाता है और यहाँ तक कि BJP से जुड़े लोगों के सांप्रदायिक पोस्ट को हटाता भी नहीं है ।  दिल्ली विधानसभा के सद्भावना कमेटी जिसके अध्यक्ष राघव चड्ढा है ने भी इस मामले में फेसबुक को दोषी माना है । 

RTI कार्यकर्ता साकेत गोखले, राहुल गांधी आदि ने भी इस सम्बंध में फेसबुक व भाजपा की आलोचना की है । 

गौरतलब हो कि जम्मू कश्मीर में अभी भी अनेकों तरह के प्रतिबंध जारी है । 

Image - जनज्वार.कॉम  

उत्तर प्रदेश समेत भारत के अन्य हिस्सों में पत्रकारों ( फोटोग्राफर, सहायकों, कार्यकर्ताओं सहित ) को काम नहीं करने दिया जा रहा है । कुछ की संदिग्ध हालात में मौत भी हुई है । 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2020 जारी हो गया है -   

जिसके अनुसार भारत में अब भी काफी भुखमरी मौजूद है । 107 देशों के लिए की गई रैंकिंग में भारत 94वें पायदान पर आया है । भारत कई सारे पड़ोसी देशों यथा नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, श्रीलंका, म्यामांर से भी पीछे चल रहा है । केवल 13 देश ऐसे हैं जो हंगर इंडेक्स में भारत से पीछे है । रिपोर्ट के मुताबिक भारत की करीब 14% जनसंख्या कुपोषण का शिकार है. भारत में बच्चों में कुपोषण की स्थिति भयावह है ।  ( 23 अक्टूबर 2020 ) 

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Credit - #BhartenduVimalDubey 




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