Friday, 14 February 2020

जन प्रतिनिधियों की जरूरत क्यों है ?

आपके एरिया के जन प्रतिनिधि :-

◆ तीन स्तरीय पंचायत के प्रतिनिधि ( ग्रामीण ) -
1.   ग्राम पंचायत के सदस्य और ग्राम प्रधान
2.   क्षेत्र पंचायत के सदस्य और ब्लॉक प्रमुख
3.   जिला पंचायत के सदस्य और जिला अध्यक्ष

* ग्रामीण क्षेत्रों से अलग अन्य जगह पर ग्राम पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान के जगह पर नगर पंचायत, नगर पालिका या नगर निगम के सदस्य ( पार्षद ) और अध्यक्ष ( महापौर ) होते है * इतना तो आपको पता होगा ।

★ कानून बनाने वाले जन प्रतिनिधि :-
1.   विधानसभा सदस्य ( MLA )
2.   कुछ राज्यों में विधानपरिषद सदस्य ( MLC )
3.   लोकसभा सदस्य ( MP )
4.    राज्यसभा सदस्य  ( MP )

आप आते है असली मुद्दे पर

क्या आपके एरिया के सभी जन प्रतिनिधियों का #CAA_NRC_NPR पर एक तरीके का ही सोच है ?
या
सभी जन प्रतिनिधि अपने आलाकमान के गुलाम है ?
और
अगर सब आलाकमान के गुलाम है तो फिर इतने जन प्रतिनिधियों का क्या काम ? 

क्या जनप्रतिनिधियों का अपना व्यक्तिगत मत नहीं होता है ? अगर होता है तो फिर उन्हें अपने व्यक्तिगत मत प्रकट करने की छूट क्यो नहीं है ?

क्या भाजपा के सभी सांसदों / विधायकों का विचार भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जैसा ही है ? अगर हाँ तो फिर देश मे इतने जनप्रतिनिधियों की जरूरत क्यों है ? अगर नहीं तो वे अपने विचार जनता के सामने क्यो नहीं रखते है ?

यह केवल एक पार्टी की बात नहीं है 
यह केवल एक कानून की बात नहीं है । 

क्या आपको मेरे सवाल समझ आ रहे है ?
क्या आप मेरे सवाल से सहमत है ?
क्या हमको इन सवालों पर विचार करना चाहिए ?

इन्ही सवालों में भारत देश के सभी समस्याओं का जबाब छिपा हुआ है । 
 जबतक राजनीतिक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तबतक सड़क, पानी, स्कूल, कॉलेज, सुरक्षा आदि समस्याओं का हल नहीं निकलेगा । 

और भी तमाम सवाल है जैसे कबतक अपराधी , रेपिस्ट, अनपढ़ हमारे जनप्रतिनिधि बनते रहेंगे ? 

कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में लिखे
या इंस्टाग्राम पर मुझे DM करे
🙏 धन्यवाद 🙏

" भारतेन्दु विमल दुबे उर्फ उमंग दुबे "

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