आपके एरिया के जन प्रतिनिधि :-
◆ तीन स्तरीय पंचायत के प्रतिनिधि ( ग्रामीण ) -
1. ग्राम पंचायत के सदस्य और ग्राम प्रधान
2. क्षेत्र पंचायत के सदस्य और ब्लॉक प्रमुख
3. जिला पंचायत के सदस्य और जिला अध्यक्ष
* ग्रामीण क्षेत्रों से अलग अन्य जगह पर ग्राम पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान के जगह पर नगर पंचायत, नगर पालिका या नगर निगम के सदस्य ( पार्षद ) और अध्यक्ष ( महापौर ) होते है * इतना तो आपको पता होगा ।
★ कानून बनाने वाले जन प्रतिनिधि :-
1. विधानसभा सदस्य ( MLA )
2. कुछ राज्यों में विधानपरिषद सदस्य ( MLC )
3. लोकसभा सदस्य ( MP )
4. राज्यसभा सदस्य ( MP )
आप आते है असली मुद्दे पर
क्या आपके एरिया के सभी जन प्रतिनिधियों का #CAA_NRC_NPR पर एक तरीके का ही सोच है ?
या
सभी जन प्रतिनिधि अपने आलाकमान के गुलाम है ?
और
अगर सब आलाकमान के गुलाम है तो फिर इतने जन प्रतिनिधियों का क्या काम ?
क्या जनप्रतिनिधियों का अपना व्यक्तिगत मत नहीं होता है ? अगर होता है तो फिर उन्हें अपने व्यक्तिगत मत प्रकट करने की छूट क्यो नहीं है ?
क्या भाजपा के सभी सांसदों / विधायकों का विचार भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जैसा ही है ? अगर हाँ तो फिर देश मे इतने जनप्रतिनिधियों की जरूरत क्यों है ? अगर नहीं तो वे अपने विचार जनता के सामने क्यो नहीं रखते है ?
यह केवल एक पार्टी की बात नहीं है
यह केवल एक कानून की बात नहीं है ।
क्या आपको मेरे सवाल समझ आ रहे है ?
क्या आप मेरे सवाल से सहमत है ?
क्या हमको इन सवालों पर विचार करना चाहिए ?
इन्ही सवालों में भारत देश के सभी समस्याओं का जबाब छिपा हुआ है ।
जबतक राजनीतिक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तबतक सड़क, पानी, स्कूल, कॉलेज, सुरक्षा आदि समस्याओं का हल नहीं निकलेगा ।
और भी तमाम सवाल है जैसे कबतक अपराधी , रेपिस्ट, अनपढ़ हमारे जनप्रतिनिधि बनते रहेंगे ?
कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में लिखे
या इंस्टाग्राम पर मुझे DM करे
🙏 धन्यवाद 🙏
" भारतेन्दु विमल दुबे उर्फ उमंग दुबे "
◆ तीन स्तरीय पंचायत के प्रतिनिधि ( ग्रामीण ) -
1. ग्राम पंचायत के सदस्य और ग्राम प्रधान
2. क्षेत्र पंचायत के सदस्य और ब्लॉक प्रमुख
3. जिला पंचायत के सदस्य और जिला अध्यक्ष
* ग्रामीण क्षेत्रों से अलग अन्य जगह पर ग्राम पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान के जगह पर नगर पंचायत, नगर पालिका या नगर निगम के सदस्य ( पार्षद ) और अध्यक्ष ( महापौर ) होते है * इतना तो आपको पता होगा ।
★ कानून बनाने वाले जन प्रतिनिधि :-
1. विधानसभा सदस्य ( MLA )
2. कुछ राज्यों में विधानपरिषद सदस्य ( MLC )
3. लोकसभा सदस्य ( MP )
4. राज्यसभा सदस्य ( MP )
आप आते है असली मुद्दे पर
क्या आपके एरिया के सभी जन प्रतिनिधियों का #CAA_NRC_NPR पर एक तरीके का ही सोच है ?
या
सभी जन प्रतिनिधि अपने आलाकमान के गुलाम है ?
और
अगर सब आलाकमान के गुलाम है तो फिर इतने जन प्रतिनिधियों का क्या काम ?
क्या जनप्रतिनिधियों का अपना व्यक्तिगत मत नहीं होता है ? अगर होता है तो फिर उन्हें अपने व्यक्तिगत मत प्रकट करने की छूट क्यो नहीं है ?
क्या भाजपा के सभी सांसदों / विधायकों का विचार भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जैसा ही है ? अगर हाँ तो फिर देश मे इतने जनप्रतिनिधियों की जरूरत क्यों है ? अगर नहीं तो वे अपने विचार जनता के सामने क्यो नहीं रखते है ?
यह केवल एक पार्टी की बात नहीं है
यह केवल एक कानून की बात नहीं है ।
क्या आपको मेरे सवाल समझ आ रहे है ?
क्या आप मेरे सवाल से सहमत है ?
क्या हमको इन सवालों पर विचार करना चाहिए ?
इन्ही सवालों में भारत देश के सभी समस्याओं का जबाब छिपा हुआ है ।
जबतक राजनीतिक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तबतक सड़क, पानी, स्कूल, कॉलेज, सुरक्षा आदि समस्याओं का हल नहीं निकलेगा ।
और भी तमाम सवाल है जैसे कबतक अपराधी , रेपिस्ट, अनपढ़ हमारे जनप्रतिनिधि बनते रहेंगे ?
कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में लिखे
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🙏 धन्यवाद 🙏
" भारतेन्दु विमल दुबे उर्फ उमंग दुबे "
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