Tuesday, 11 February 2020

All About CAA, NPR, NRC Combination In Hindi Part 2

बिना पूरा ब्लॉग पढ़े आपको आपके प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलेगा !!
पहले हम यहाँ बात करेंगे कि NRC से किसको - किसको दिक्कत है उससे पहले बता दूं कि गृह मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड इत्यादि से नागरिकता साबित नहीं होता है और हमारे पास उदाहरण के तौर पर केवल " असम का NRC " ही मौजूद है और तो क्या पूरे भारत मे असम के तर्ज़ पर ही एनआरसी होगा ?
और यकीन मानिए अगर असम के तर्ज पर NRC हुआ तो स्थिति बहुत ही भयावह होगा ।।

★  आधार कार्ड, जनगणना, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड इत्यादि का रिकॉर्ड सरकार के पास है तो क्या सरकार इन पर  विश्लेषण करके घुसपैठिए को चिन्हित करके अगल नहीं कर सकती है ? क्या इन रिकॉर्डों का विश्लेषण करके " भारत के नागरिकों की लिस्ट " ( NRC ) तैयार नहीं किया जा सकता है ?
★    आधार कार्ड के द्वारा सरकार के पास लोगो का बियोमैट्री रिकॉर्ड है और करोड़ों खर्च करने पर आधार कार्ड बन करके तैयार हुआ है , NRC में ऐसा क्या होगा जो बियोमैट्री रिकॉर्ड से भी पुख्ता होगा ? वंशावलि साबित करना तो 75 % लोगो के लिए असंभव होगा ।
आपको याद होगा कि " नोटबन्दी " में किसी भी धर्म के गरीबों को ही दिक्कत हुआ था क्योकि पैसे वाले तो दाएं-बाएं से अपने गैर कानूनी पैसों को भी कानूनी बना लिए थे और गरीब परिवार तो अपने पैसे निकाले के लिए भी परेशान थे । मेरे हिसाब से एनआरसी भी नोटबन्दी के तरह ही साबित होगा , आपके पास असम का उदाहरण है ही , असम में किसी भी अमीर व्यक्ति का नाम NRC से बाहर नहीं हुआ है ?
आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि किस तरीके से अमीर आदमी पैसे दे करके बैक डेट में अपने सारे कागज बनवा लेगा लेकिन गरीब आदमी का क्या होगा ?
★ भारत मे तमाम ऐसे लोग है जो अपने पैसों को बैंक से नहीं निकाल पाते है क्योंकि आधार कार्ड में उनका दूसरा नाम है और बैंक में दूसरा जैसे आधार कार्ड में " Bhartendu " हो और बैंक में " Bharatendu " . दोनों नाम एक ही इंसान है लेकिन केवल एक " A " के कारण वह अपना पैसा नहीं निकाल पाता है । ऐसे लोग अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे ?
उत्तर प्रदेश के तमाम लोग मुंबई जैसे शहरों में जा करके बस गए है , ऐसे लोग NPR में अपने मम्मी के जन्म का स्थान कैसे बताएंगे ?
मेरे पर दादी की उम्र 85 से अधिक है , वे अपने जन्म स्थान की जानकारी कैसे देंगी ?
ऐसे बुजुर्ग लोग जो अपने गांव से दूर शहर में अपने परिवार के साथ रहते है , वे अपने पापा के जन्म स्थान की जानकारी कैसे देंगे ?
हमारे यहाँ हिजड़ा समुदाय की स्थिति आपको पता ही होगी , उन्हें घर से निकाल दिया जाता है । अतः हिजड़ा समुदाय अपनी नागरिकता कैसे सिद्ध करेंगी ?
भारत की अधिकांश जनता झुग्गियों में रहती है और बाढ़ आने पर हर साल तमाम घर उजड़ जाते है , ऐसे लोगो के कागज सही सलामत रहते होंगे क्या ?
पहुँचे हुए लोग पैसे व रूतबे के बल पर पटवारी , तहसीलदार आदि से मिल करके अपने सारे कागज मिनटों में ठीक करवा लेंगे लेकिन गरीब ऐसा नहीं कर पाएंगे !
बाकी गृह मंत्री के भाषण से स्पष्ट है कि इससे केवल मुसलमानों को डरने की जरूरत है क्योकि अगर कोई हिन्दू अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पायेगा तो उसे CAA 2019 से दुबारा नागरिकता मिल जाएगा लेकिन क्या फिर वे स्वाभिमान से जिंदा रह पाएंगे ? लोग उस पर हमेशा शक करेंगे कि ये तो घुसपैठिया है ये अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाया था ।

NRC करने में करोड़ो रूपये खर्च होगा , मंदी के दौर में करोड़ो रूपये कहाँ से आएगा ?
भारत के कुछ राज्यो से कोई विदेशी सीमा नहीं लगता है तो ऐसे राज्यो में घुसपैठिए कैसे आ सकते है ?
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 मेरा एक प्रश्न है कि हमे लिखित दस्तावेज पर विश्वास करना चाहिए या मौखिक बातो पर ?

जाहिर है कि अधिकांश लोग कहेंगे कि लिखत बातो पर ही विश्वास करना चाहिए क्योकि मौखिक बातो से तो आसानी से पलटा जा सकता है ।

अब बात करते है की ( CAA , NPR व NRC ) से दिक्कत क्या है ?

1. भारतीय संविधान के अनुसार भारत में कोई भी कानून धर्म के आधार पर नहीं बन सकता है इसीलिए मुसलमानों व पारसियों को आरक्षण नही मिला था और इस कानून में साफ - साफ धर्मो का उल्लेख है ।

इस कानून के बाद मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर सकता है ।

2. गृह मंत्री अमित शाह ने साफ - साफ बताया था कि पहले CAB आएगा फिर NRC आएगा ...

पहले CAB के द्वारा 6 गैर मुस्लिम समुदाय के लोगो को भारत की नागरिकता दी जाएगी उसके बाद NRC से घुसपैठिए को बाहर किया जाएगा ।

मतलब CAB के द्वारा सभी गैर मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी जाएगी चाहे उनके पास कोई कागज हो या नही !
★ मैंने अपने पिछले ब्लॉग्स में बताया है कि आखिर CAB की जरूरत क्यो पड़ी , इसीलिए यहाँ केवल समस्याओं को बता रहा हूँ .

Ok

3. इस कानून के समर्थकों का कहना है कि मुसलमानों के लिए बहुत सारे देश है लेकिन हिंदुओ के लिए केवल भारत है,

हाँ यह सही है कि विश्व में एक मात्र हिन्दू नेपाल भी अब धर्मनिरपेक्ष बन चुका है

लेकिन फिर इस आधार पर CAA में ईसाइयों और बौद्धों को भी नहीं शामिल करना चाहिए था क्योकि विश्व मे बहुत सारे ईसाई व बौद्ध राष्ट्र है ।

4. समर्थक :- ये पड़ोसी देश के अल्पसंख्यक लोगो की बात करता है

हकीकत :- आप एक बार तीन पेज के CAA कानून को पढ़ लीजिए, अगर अल्पसंख्यक शब्द लिखा होता तो फिर विवाद ही नहीं होता , इस कानून में अल्पसंख्यक के जगह धर्मों का उल्लेख है ।

और भारत के केवल तीन पड़ोसी देश नहीं है ।

5. सरकार :- हमने 2016 से ले करके तमाम मुसलमानों को नागरिकता दिया है

सवाल :- तो फिर CAA 2019 की क्या जरूरत पड़ी ? उसी नियम से अन्य शरणार्थियों को भी नागरिकता दिया जा सकता था ।

6. सरकार : ये नागरिकता देने का कानून है लेने का नहीं !

हकीकत : गृह मंत्री ने बार बार कहा है की क्रोनोलॉजी समझिए CAA और NRC एक दूसरे से सम्बंधित है ।

7. सरकार : प्रधानमंत्री ने कह दिया कि NRC पर कोई बात नहीं हुआ है

हकीकत : महामहिम राष्ट्रपति का अभिभाषण केंद्रीय मंत्रिमंडल ही लिख करके देता है और गृह मंत्री ने संसद के रिकॉर्ड में बोला था कि NRC आएगा ..

अब लोग लिखित बातो पर ही विश्वास करेंगे ना कि मौखिक बातो पर ।

8. BJP : NPR और NRC में सम्बंध नहीं है ।

गृह मंत्रालय वेबसाइट : NPR ही NRC का पहला चरण है ।

■    क्या NPR और जनगणना में अंतर है ❓
      जैसा कि आप सभी को पता है कि 1951 से हर दस साल के अंतराल पर भारत मे जनगणना होता है, 2011 में जनगणना हुआ था तो यह जायज है कि फिर 2021 में जनगणना होगा , जनगणना एक सामान्य प्रक्रिया है इसीलिए इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए ।

         NPR का मूल नागरिकता संसोधन कानून 2003  है जिसे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ले करके आयी थी ।

      अतः NPR और जनगणना को एक समझना मूर्खता होगी ।

◆  क्या 2015 के NPR और 2020 के लिए प्रस्तावित NPR में अंतर है ❓
    पहला एनपीआर 2010 में तैयार किया गया था। इसे 2015 में अपडेट किया गया था। अब इसे एक बार फिर अपड़ेट किया जाएगा। इसके लिए अप्रैल 2020 से सितंबर 2021 की जनगणना में हाउसलिस्टिंग फेज के साथ काम शुरू किया जाएगा।

 इस बार के NPR में कुछ नए प्रश्न जोड़े गए है जैसे आपके पिता का जन्म कहाँ हुआ था ? , आपके माता का जन्म कहाँ हुआ था ?

हम गृह मंत्रालय के वेबसाइट पर NPR में पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची देख सकते हैं ।

अतः प्रश्नों के लिहाज से कांग्रेस शासन में आये NPR और अब भाजपा सरकार में आये NPR में अंतर है ।

★    क्या NPR ही NRC है  ❓
  गृह मंत्री व भाजपा के अनुसार NPR और NRC में कोई सम्बंध नहीं है

जबकि CAA 2003 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि NPR ही NRC का पहला कदम होगा ।

गृह मंत्री और भाजपा के अनुसार NRC के लिए NPR के डाटा का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा

जबकि गृह मंत्रालय के नवीनतम रिपोर्ट में उल्लेखित है कि NPR ही NRC का पहला चरण है अर्थात बिना NPR के NCR नहीं हो सकता है ।

अतः स्पष्ट रूप से NPR ही NRC नहीं है

परंतु दोनों में समानता है ।

  जो लोग कह रहे है कि NPR ही NRC है वे आपको गुमराह कर रहे है

 और जो लोग ये कह रहे है कि NPR और NRC में कोई सम्बंध नहीं है वे भी आपको गुमराह कर रहे है ।

क्या CAA और NRC एक दूसरे से सम्बंधित है ?

मैं यहाँ मान करके चल रहा हूँ कि आपको CAA 2019 की मूलभूत बाते पता होगी ।

◆ CAA 2019 लाने की जरूरत इसीलिए पड़ी क्योकि असम के NRC में अधिकांश गैर मुस्लिम बाहर हुए थे ।

गृह मंत्री अमित शाह ने समझाते हुए कहा था कि पहले हम CAB के द्वारा 6 गैर मुस्लिम समुदाय ( जैन, पारसी, बौद्ध, हिन्दू, ईसाई, सिख ) के शरणार्थियों को नागरिकता देंगे और फिर NRC के द्वारा घुसपैठिए को बाहर करेंगे .

अब आप एक मिनट ठरह के सोचिए कि अमित शाह कहना क्या चाहते है ?

तो क्या अमित शाह का मतलब है कि गैर मुस्लिम घुसपैठिए को भी नागरिकता मिलेगा और शरणार्थी मुसलमान भी घुसपैठिए है ?

◆ कुछ लोगो के अनुसार अगर कोई अब्दुल खान और भारतेन्दु दुबे NRC में अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पायेगा तो दोनों से नागरिकता के सारे अधिकार छीन लिए जाएंगे और उन्हें डिटेंशन कैम्प में डाल दिया जाएगा लेकिन CAA के माध्यम से भारतेन्दु दुबे को वापस भारत की नागरिकता मिल जाएगी लेकिन अब्दुल खान को नहीं ।

सवाल :- सबसे पहले CAA और NRC में सम्बंध किसने बताया ?
जबाब :- तत्कालीन भापज अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने

सवाल :- क्या असम में NRC से बाहर हुए गैर मुसलमानों को नागरिकता देने के लिए CAA लाया गया है ?
जबाब :- गृह मंत्री और भाजपा के अनुसार " हाँ  "

सवाल :- प्रधानमंत्री ने कहा है कि NRC की चर्चा नहीं हुई है
जबाब :- प्रधानमंत्री ने झूठ कहा था क्योकि NRC की चर्चा संसद में गृह मंत्री ने किया था ।

सवाल : प्रधानमंत्री और गृह मंत्री में से कौन सही बोल रहा है ?
जबाब : हमे मौखिक बातो पर विश्वास नहीं करना चाहिए ।

हमे गृह मंत्रालय और सरकार के वेबसाइट , सरकारी पत्र , न्यायालय के आदेश या संसद के रिकॉर्ड पर विश्वास करना चाहिए ।

सवाल : अभी तो NRC का ड्राफ्ट वैगरा नहीं हुआ है तो विरोध प्रदर्शन क्यो ?
जबाब : तो महामहिम राष्ट्रपति के लिखित अभिभाषण पर विश्वास ना करे ? संसद के रिकॉर्ड पर विश्वास ना करे ?

मैं यहाँ किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचना चाहता हूँ, आप खुद एक बार तीन पेज का " CAA 2019 " कानून पढ़ लीजिए और गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के भाषणों में तुलना कर लीजिए , ध्यान रहे कि मोदी जी ने CAA पर संसद में हुए बहस में बिल्कुल भी हिस्सा नहीं लिया था , CAA गृह मंत्री ने पेश किया था और अमित शाह ने ही इस चर्चा पर जबाब भी दिया था ,
तो आप खुद तय कर ले किस पर विश्वास करे और किस पर नहीं ।
आप खुद से पढ़े और समझे फिर किसी निष्कर्ष पर पहुंचे

Full Forms :-

1. NPR = The National Population Register / राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर

2. CAA 2003 = Citizenship Amendment Act 2003 / नागरिकता संसोधन कानून 2003

* CAA 2003 या CAA 2019 ये दोनों कानून नागरिकता के मूल कानून 1955 में संसोधन करके बनाया गया है *

3. NRC = The National Register of Citizens / राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

नोट : आप अधिक जानकारी के लिए मेरे पुराने ब्लॉग्स भी पढ़ सकते है ।

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