आम लोगो को बजट तो समझ आता नहीं है और मैं भी अर्थव्यवस्था का अधिक जानकार नहीं हूँ , मैं अभी स्नातक का विद्यार्थी हूँ ☺️ फिर भी समझना तो होगा ही,
आइए आम भाषा मे समझते है ।
हाथी के दांत दिखाने के 'और'
और खाने के 'और' ।
निर्मला सीतारमण जी के भाषण से लगता है कि सब कुछ चंगा है , मध्यम वर्गीय लोगो को टैक्स में भारी भरकम छूट मिलेगा , इनकम टैक्स घटा दिया गया है , लोगो को नौकरियां मिलेंगी , 5 स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा
लेकिन क्या आपको पता है कि नए बजट के अनुसार इनकम टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए बहुत सारे if , but है ।
पुराने 100 स्मार्ट सिटी का क्या हुआ ?
नोटबन्दी से क्या फायदा हुआ इसका कहीं भी किसी प्रकार का कोई जिक्र नहीं है ।
LIC में से सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचेगी ।
एक उदाहरण ले करके समझे कि पारले जी बिस्किट का दाम नहीं बढ़ा है लेकिन उसमें से बिस्किट की संख्या जरूर कम हो गई ठीक इसीप्रकार इस बजट का भी हाल है ।
ऐसा नहीं है कि इस बजट का कोई सकारात्मक पहलू नहीं है , इस बजट का सकारात्मक पहलू भी है ।
यह बजट केवल पिछले बजट के दावों को झुठलाने और इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव के लिए लाया गया है ।
गोदी मीडिया तो इस बजट को एकदम इस तरीके से पेश कर रही कि अब हर वर्ष 2 करोड़ लोगों को नौकरी मिलेगी , पिछले 100 स्मार्ट सिटी का कोई उल्लेख नही है ,
किसानों की आय दो गुनी कैसे होगी ? इसका कोई उल्लेख नहीं है ।
बड़े - बड़े उद्योगपतियों को इस बजट से राहत मिलेगा लेकिन इस बजट में मांग बढ़ाने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है ।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जिनके डिग्री का कोई अता पता नहीं है वो बड़े बड़े पत्रकारों व अर्थव्यवस्था के जानकरों में एक झटके में कह देती है इन लोगो को कुछ समझ नहीं आता है 🤷♂️
सबसे बड़ा दिक्कत यह कि भारत के अधिकांश सांसद व विधायक ऐसे है जिनको सही से पढ़ने नहीं आता है तो बजट कहाँ से समझ आता होगा ?
जब तक गाँव का और किसानों का विकास नहीं होगा तब तक भारत केवल भाषणों में ही विश्वगुरु बनेगा ।
शिक्षा पर बजट का कितना प्रतिशत खर्च होगा ?
जो उमीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में महंगाई और बेरोजगारी कम हो जाएगी , वे केवल उमीद ही करते रहे जाएंगे ।
इस बजट में ऐसे कई डाटा है जिनका कोई सोत्र नहीं है और कई जगहों पर सोत्र के रूप में विकिपीडिया का उपयोग किया गया है जिसे कोई भी कभी भी बदलाव कर सकता है ।
आज बजट पेशी के दिन शेयर बाजार गिर करके बंद हुआ है ☺️ .
अच्छे दिन आएंगे बस आप केवल " हिन्दू - मुस्लिम " व " जाती - धर्म " के मुद्दे पर वोट देते रहे ।
Instagram 🆔 " BhartenduVimalDubey "
आइए आम भाषा मे समझते है ।
हाथी के दांत दिखाने के 'और'
और खाने के 'और' ।
निर्मला सीतारमण जी के भाषण से लगता है कि सब कुछ चंगा है , मध्यम वर्गीय लोगो को टैक्स में भारी भरकम छूट मिलेगा , इनकम टैक्स घटा दिया गया है , लोगो को नौकरियां मिलेंगी , 5 स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा
लेकिन क्या आपको पता है कि नए बजट के अनुसार इनकम टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए बहुत सारे if , but है ।
पुराने 100 स्मार्ट सिटी का क्या हुआ ?
नोटबन्दी से क्या फायदा हुआ इसका कहीं भी किसी प्रकार का कोई जिक्र नहीं है ।
LIC में से सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचेगी ।
एक उदाहरण ले करके समझे कि पारले जी बिस्किट का दाम नहीं बढ़ा है लेकिन उसमें से बिस्किट की संख्या जरूर कम हो गई ठीक इसीप्रकार इस बजट का भी हाल है ।
ऐसा नहीं है कि इस बजट का कोई सकारात्मक पहलू नहीं है , इस बजट का सकारात्मक पहलू भी है ।
यह बजट केवल पिछले बजट के दावों को झुठलाने और इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव के लिए लाया गया है ।
गोदी मीडिया तो इस बजट को एकदम इस तरीके से पेश कर रही कि अब हर वर्ष 2 करोड़ लोगों को नौकरी मिलेगी , पिछले 100 स्मार्ट सिटी का कोई उल्लेख नही है ,
किसानों की आय दो गुनी कैसे होगी ? इसका कोई उल्लेख नहीं है ।
बड़े - बड़े उद्योगपतियों को इस बजट से राहत मिलेगा लेकिन इस बजट में मांग बढ़ाने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है ।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जिनके डिग्री का कोई अता पता नहीं है वो बड़े बड़े पत्रकारों व अर्थव्यवस्था के जानकरों में एक झटके में कह देती है इन लोगो को कुछ समझ नहीं आता है 🤷♂️
सबसे बड़ा दिक्कत यह कि भारत के अधिकांश सांसद व विधायक ऐसे है जिनको सही से पढ़ने नहीं आता है तो बजट कहाँ से समझ आता होगा ?
जब तक गाँव का और किसानों का विकास नहीं होगा तब तक भारत केवल भाषणों में ही विश्वगुरु बनेगा ।
शिक्षा पर बजट का कितना प्रतिशत खर्च होगा ?
जो उमीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में महंगाई और बेरोजगारी कम हो जाएगी , वे केवल उमीद ही करते रहे जाएंगे ।
इस बजट में ऐसे कई डाटा है जिनका कोई सोत्र नहीं है और कई जगहों पर सोत्र के रूप में विकिपीडिया का उपयोग किया गया है जिसे कोई भी कभी भी बदलाव कर सकता है ।
आज बजट पेशी के दिन शेयर बाजार गिर करके बंद हुआ है ☺️ .
अच्छे दिन आएंगे बस आप केवल " हिन्दू - मुस्लिम " व " जाती - धर्म " के मुद्दे पर वोट देते रहे ।
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