मेरे हिसाब से दुनिया के सभी धर्मों का उद्देश्य "मानव" कल्याण है
किंतु अगर किसी भी धर्म या सम्प्रदाय का उद्देश्य "मानवता" से अलग है तो उस तत्काल उस धर्म या सम्प्रदाय को त्याग देना चाहिए ।
लोगो को खुद अपने धर्म ग्रंथों को पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए
किसी भी फ़र्ज़ी धर्मगुरु यथा मौलाना, पंडित, पादरी आदि के बहकावे में आ करके किसी के भावनाओ को आहत नहीं करना चाहिए क्योंकि प्रायः ये सभी फ़र्ज़ी धर्मगुरु विभिन्न राजनीतिक दलों के कठपुतली होते है ।
स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि दीन दुखियों की सेवा करना ही धर्म है ।
अंधभक्त मतलब ऐसे लोग जो बिना जाने - समझे राजनेताओं के फ़र्ज़ी दावों पर विश्वास कर लेते हैं ।
जिस प्रकार आशाराम बापू, नित्यानंद, नारायण साईं जैसे कुछ लोगो के कारण सनातन / हिन्दू धर्म को दोष नहीं दिया जा सकता है ठीक उसी प्रकार "जमात" के कारण इस्लाम धर्म को दोष नहीं दिया जा सकता है ।
धन्यवाद
भारतेन्दु विमल दुबे
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