आज के समय में हर किसी को राजद्रोह और देशद्रोह के बीच के अंतर को समझना ही होगा ।
जैसे 2014 के पहले तत्कालीन सरकार के खिलाफ #भाजपा विरोध प्रदर्शन करती थी ठीक वैसे आज के समय में #कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों को विरोध प्रदर्शन करने का हक है ।
अंग्रेजी हुकूमत ने जनता के आवाज को कुचलने के लिए "राजद्रोह" का कानून बनाया था ।
राजद्रोह, देशद्रोह और राष्ट्रद्रोह में स्पष्ट अंतर है ।
लोकतांत्रिक देश में राजद्रोह जैसे कानून का कोई औचित्य नहीं है ।
#राजतंत्र में राजा का मतलब ही देश होता था इसीलिए राजतंत्र में #राजद्रोह ही #देशद्रोह होता था , राजतंत्र में राजा के किसी भी फैसले के खिलाफ बोलना के अर्थ देश के खिलाफ बोलना था
किंतु लोकतांत्रिक देश मे ऐसा नहीं होता है ।
लोकतांत्रिक देश मे - #सरकार का मतलब देश नहीं होता है और ना ही राजद्रोह का मतलब देशद्रोह होता है ।
राजतंत्र में राजा निरंकुश होता है जबकि #लोकतंत्र में कोई भी निरंकुश नहीं होता है ।
YouTube Video Link 👇
https://youtu.be/D2hS-_-YJdk
जैसे 2014 के पहले तत्कालीन सरकार के खिलाफ #भाजपा विरोध प्रदर्शन करती थी ठीक वैसे आज के समय में #कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों को विरोध प्रदर्शन करने का हक है ।
अंग्रेजी हुकूमत ने जनता के आवाज को कुचलने के लिए "राजद्रोह" का कानून बनाया था ।
राजद्रोह, देशद्रोह और राष्ट्रद्रोह में स्पष्ट अंतर है ।
लोकतांत्रिक देश में राजद्रोह जैसे कानून का कोई औचित्य नहीं है ।
#राजतंत्र में राजा का मतलब ही देश होता था इसीलिए राजतंत्र में #राजद्रोह ही #देशद्रोह होता था , राजतंत्र में राजा के किसी भी फैसले के खिलाफ बोलना के अर्थ देश के खिलाफ बोलना था
किंतु लोकतांत्रिक देश मे ऐसा नहीं होता है ।
लोकतांत्रिक देश मे - #सरकार का मतलब देश नहीं होता है और ना ही राजद्रोह का मतलब देशद्रोह होता है ।
राजतंत्र में राजा निरंकुश होता है जबकि #लोकतंत्र में कोई भी निरंकुश नहीं होता है ।
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