Wednesday, 21 October 2020

मुस्लिम शासक, मुगल या अंग्रेज कौन विदेशी थे ? क्या RSS / BJP इस सम्बंध में भी झूठ बोलती है ?

ताजमहल को लेकर छिड़े विवाद में मुस्लिम शासकों और उनके दौर पर भी बहस चल रही है. भारतीय जनता पार्टी के कई नेता मुग़लों से जुड़ी पहचानों पर सवाल उठाते रहे हैं. इसमें चाहे ताजमहल हो या सड़कों के नाम :- 

इस तरह की बहस भारतीय राजनीति में कोई नई नहीं है. लेकिन इस बार की बहस में ख़ास बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी काफ़ी मज़बूत है. केंद्र के साथ ज़्यादातर राज्यों में भी उसकी सरकार है. ऐसे में बीजेपी का कोई नेता बयान देता है तो उसके कई मायने निकाले जाते हैं.

सवाल यह उठता है कि बीजेपी नेता मुग़ल शासकों को लेकर जो बाते कहते हैं उनका आधार क्या होता है? उन बातों का सच से सरोकार कितना होता है?

भारत मे साम्प्रदायिकता ब्रिटिश शासन की देन है क्योंकि इससे पूर्व अर्थात मुस्लिम शासकों के राज्य में इस प्रकार की प्रवृत्ति का अभाव था, मुस्लिम शासकों के वंशज यहीं भारत में ही बस गए 
फिर भी RSS व भाजपा मुगलों को विदेशी, शत्रु, बुरा, विनाशकारी कहते हुए कोसती है और जो अंग्रेज भारत को लूट करके वापस यूरोप चली गए उसे हितकारी कहती है । 
मुस्लिम शासकों व हिंदुओ के मध्य वैवाहिक संबंध भी थे । 
यह बात सही है कि मुस्लिम शासकों में से अधिकतर ने हिंदुओ के प्रति कभी बहुत उदारता, सहयोग तथा मानवता की नीति का पालन नहीं किया और इतना ही नहीं, उनमें भी अनेक के व्यवहार क्रूर और अमानवीय थे परंतु मुस्लिम शासकों के इस प्रकार के व्यवहार के बावजूद हिन्दू और मुसलमानों के बीच साम्प्रदायिकता की कोई भावना नहीं थी क्योंकि रक्त व वंश की दृष्टि से मूलतः दोनों एक ही थे  
बाहरी मुसलमानों के आक्रमण और उसके शासन की स्थापना कब पूर्व लगभग सभी भारतीय हिन्दू थे । यह सही है कि हिन्दू समाज विभिन्न मत - मतान्तरों में बंटा हुआ था, सवर्णों कब द्वारा दलितों पर अत्याचार होते थे किंतु उनके बीच कभी साम्प्रदायिकता की भावना नहीं पनपी । 
यही कारण है कि आपसी घृणा, कटुता और अविश्वास के बावजूद मुस्लिम शासनकाल में हिंदुओं तथा मुसलमानों के उस साम्प्रदायिकता का जन्म व विकास नहीं हुआ जिसका ब्रिटिश शासन में उसकी 'फूट डालो और शासन करो' की नीति के कारण बीजारोपण तथा विकास हुआ । 
भारत मे किसी तरह साम्राज्यवादी शासन कायम रखने की बदनीयती के कारण ब्रिटिश शासकों ने साम्प्रदायिकता की जो आग लगाई, वह आज जंगल की बन पूरे भारतीय समाज को राख कर देने का कार्य कर रही है । 
यह वीडियो इसका साक्ष्य है - मुस्लिम होने के कारण नौकरी नहीं मिल रहा है . 
जर्मन-अमरीकी इतिहासकार एंड्रे गंडर फ्रैंक ने 'रीओरिएंट: ग्लोबल इकॉनमी इन द एशियन एज' नाम की किताब 1998 में लिखी थी. फ्रैंक का कहना था कि अठारहवीं शताब्दी के दूसरे हिस्से तक भारत और चीन का आर्थिक रूप से दबदबा था. ज़ाहिर है इसी दौर में सारे मुस्लिम शासक भी हुए. 
अब आप खुद सोचिए, पूर्वाग्रह को छोड़ करके सोचिए - 
 ''मेरे लिए हैरान करने वाली बात यह है कि जो अकबर से नफ़रत करते हैं, उन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी के रॉबर्ट क्लाइव से समस्या नहीं है. जो जहांगीर से नफ़रत करते हैं उन्हें वॉरेन हेस्टिंग से दिक़्क़त नहीं है जबकि वो वास्तविक लुटेरे थे.'' 
हरबंस मुखिया कहते हैं, ''मध्यकाल में आर्थिक प्रगति जमकर हुई थी. इसका अंदाज़ा हम इसी से लगा सकते हैं कि उस वक़्त चीन और भारत की जीडीपी दुनिया की कुल जीडीपी की क़रीब 50 फ़ीसदी थी. मध्यकाल में टेक्नोलॉजी भी काफ़ी बदली. मध्यकाल की कुछ टेक्नोलॉजी तो आज तक चल रही है. रेहट और कोल्हू मध्यकाल में ही आए. आज भी कोल्हू के नाम पर तेल बेचा जा रहा है.'' 
अगर इतना कुछ था तो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के मन में नकारात्मकता क्यों है ? 
क्या बीजेपी की असल समस्या मुग़लों के मुसलमान होने से है ? 
हालांकि गिने चुने दक्षिणपंथी इतिहासकारों के अनुसार - ''मुग़ल वंश में अकबर ने लैंड रेवेन्यू पॉलिसी बनाई थी. उस दौर में कई विदेश यात्री भारत आए थे. इन्होंने भारत के कई हिस्सों को देखा था. इन्होंने लिखा है कि किसान मुश्किलों के कारण खेती का काम छोड़ रहे थे. डच ट्रेडर पेनसार्ट और पीटर मुंडी ने लिखा है कि खेती उजड़ रही थी. यूरोपियन यात्रियों ने उस दौर के बारे में लिखा है कि ग्रामीणों और किसानों की स्थिति ठीक नहीं थी.'' 

जैसा कि आपको भी पता है कि ये स्थिति आज भी है । व्यापारियों को MRP मिलता है किंतु किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य ( MSP ) नहीं मिल पाता है । 

बाबर बाहर से आए थे और हुमायूं का भी जन्म भारत से बाहर हुआ था. लेकिन अकबर समेत जितने मुग़ल शासक हुए सबका जन्म यहीं हुआ था. ये कभी विदेश नहीं गए जबकि अंग्रेज आये , लुटे और चले गए । 
 ''हर शासक अपने साम्राज्य का विस्तार करता है. अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य से लेकर अकबर तक ने यही किया.'' 
मैं RSS / BJP का विरोध या वामपंथियों का समर्थन नहीं कर रहा हूँ । मेरा कहना केवल इतना है कि फर्जी खबरों पर विश्वास ना करे । खुद से सत्यता की परख करे । नेताओ के बयानों पर आंख बंद करके विश्वास ना करे । 
आप मेरे द्वारा लिखे गए इस ब्लॉग के तथ्यों को भी जांच - परख ले । 


Instagram :- Bhartendu Vimal Dubey

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