पढ़े Part - 1 कौन - कौन खुद को मुख्यमंत्री पद उम्मीदवार बता रहा है.
1. CAA, 370 पर भाजपा सरकार के विरोधियों व समर्थकों का अनैतिक गठबंधन :-
जैसा कि आप सभी को पता है कि असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन "AIMIM", CAA, 370 जैसे मुद्दों पर भाजपा नीत केंद्र सरकार का जबरदस्त विरोध की थी , ओवैसी ने तो लोकसभा में CAB को फाड़ दिया था
और दूसरी ओर मायावती और बहुजन समाज पार्टी CAA, 370 समेत लगभग सभी मुद्दों पर मोदी सरकार का साथ देती है .
तो ऐसे में ये दोनों पार्टियां साथ मे बिहार चुनाव क्यो लड़ रही है ? क्या यह जनता के साथ धोखा नहीं है ? क्या ओवैसी किसी भी मुद्दे पर केवल ध्रुवीकरण करके भाजपा को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से बोलते है ?
2. पुराने Tweets व Videos को कैसे छिपाएंगे ? :- जैसा कि आप सभी को पता है कि 2015 में BJP और JDU + आमने सामने थी, ऐसे में उस समय भाजपा के नेताओ ने सभी नीचताओ को पार करते हुए नीतीश कुमार पर प्रधानमंत्री मोदी के हत्या तक का आरोप लगाया था
गिरिराज सिंह जी अब केंद्रीय कैबिनेट मंत्री है - ये कह रहे है कि नीतीश कुमार का सम्बंध IM से है, अब अगर IM कोई उग्रवादी संगठन है तो मोदी सरकार इसे प्रतिबंधित क्यो नहीं करती है ?
ये लोग रेखा शर्मा, अमित मालवीय आदि की तरह अपने पुराने ट्वीट डिलीट ना कर दे इसीलिए हमने Archive कर लिया है - BJP बनाम JDU .
3. सुशील मोदी ने BJP के पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार दी ? :-
जब तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर RJD + कांग्रेस + Left गठबंधन सत्ता में आएगी तो हम 10 लाख से अधिक लोगो को रोजगार देंगे तो भाजपा ने प्रधानमंत्री मोदी, स्मृति ईरानी व अन्य के फर्जी डिग्री को भूलते हुए कहा कि जो खुद 9वी फेल है, वह दुसरो को नौकरी कैसे देगा .
उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने तो यहाँ तक कहा था कि ये केवल डपोरशंखी वादा है, उतना बिहार का बजट ही नहीं है
और अब जब भाजपा ने 19 लाख रोजगार देने का वादा किया है तो फिर सुशील मोदी को जबाब देते नहीं बन रहा है .
4. नीतीश से ऊब गए है लेकिन दूसरा विकल्प नहीं :-
मैं Bhartendu Vimal Dubey चाहता हूँ कि बिहार में भाजपा की या JDU की सरकार ना बने,
नीतीश सरकार ने सृजन घोटाले समेत 55 से अधिक घोटालों के अलावा किया ही क्या है ?
लेकिन BJP + नही तो कौन ? विपक्ष ट्वीटर के अलावा है ही कहा ?
Ground Reporters के बातो को सुनने से लग रहा है कि लोग "BJP + JDU सरकार" से तो बहुत नाराज है किंतु उनको कोई बेहतर विकल्प ही नहीं दिख रहा है ।
"Work From Home" अभी कोरोना काल मे चालू हुआ है लेकिन भारत की विपक्षी पार्टियां मई 2014 से ही Work From Home कर रही है ।
विपक्षी नेताओं ने ट्वीट करने के अलावा और किया ही क्या है ?
Lockdown के समय मे तेजस्वी यादव ने कुछ जगहों पर "पूड़ी" बाटीं थी, बस ...
पिछले पाँच सालों में बिहार या देश के कितने बड़े नेताओं ने लोगो के मुद्दों को उठाया है ? क्या किसी भी बिहारी को विपक्षी नेता जमीन पर दिखा है ? जवाब है नहीं ।
कुछ इलाकों में पप्पू यादव जी का क्रेज है लेकिन वोटों में तब्दील नहीं हो पायेगा क्योकि पप्पू यादव जी तो फेमस है लेकिन इनकी पार्टी नहीं, पप्पू यादव ने Lockdown में भी प्रवासी मजदूरो की मदद की थी ।
ऐसा बिल्कुल नहीं है लेकिन नीतीश सरकार ने बिहार को लंदन बना दिया है, अभी भी बिहार बहुत पिछड़ा हुआ है .. सड़को में गड्ढे नहीं है बल्कि गड्ढों में सड़के है .. बेरोजगारी चरम पर है .. भ्रष्टाचार, महँगाई, पलायन सब चरम पर है
किंतु सवाल वही है कि BJP + से अच्छा विकल्प ही कहा है ?
युवा पीढ़ी "RJD + कांग्रेस + लेफ्ट" के पक्ष में दिख रही है किंतु बड़े लोग लालू राज से तुलना कर रहे है इसीलिए वे BJP + के पक्ष में है ।
आप खुद सोचिए कि राहुल गांधी या बिहार कांग्रेस के नेता, तेजस्वी, कुशवाहा आदि ने कितने धरना प्रदर्शनों में भाग लिया है ?
मानदेय पर काम करने वाले कर्मी, आंगनवाड़ी कार्यक्रतियों, छात्रों, बेरोजगारों, नर्शो आदि ने अनेकों धरना प्रदर्शन किया है, लेकिन क्या कोई भी विपक्षी नेता इन धरना प्रदर्शनों में शामिल हुआ है ?
अब तुलना कीजिए कि मई 2014 से पहले क्या भाजपा के बड़े नेता भी केवल ट्वीट ही करते थे, नहीं बिल्कुल नहीं ... भाजपा का बड़े से बड़ा नेता अधिकांश समय सड़को पर लोगो के बीच मे ही रहता था, गैस, पेट्रोल का दाम बढ़ना हो, महँगाई, भ्रष्टाचार कोई भी मुद्दा हो भाजपा सड़को पर रहती थी ...
कुछ राजनीतिक दल तो ऐसे है जो ना तो सत्ता पक्ष के है और ना ही विपक्ष के, वे बस मौकापरस्त है, "बिन पेंदी के लोटे" .. खैर ये दूसरी बात है ।
चुनाव बाद भी BJP - कांग्रेस को छोड़ करके और कोई भी दल कभी भी एक दूसरे से मिल करके सरकार बना सकती है, महाराष्ट्र, हरियाणा, 2015 बिहार का उदाहरण है ही ... राजनीति सम्भावनाओं का खेल है, इसका नाम ही है - "राज" करने की "नीति" ... सेवानीति थोड़े है ।
वैसे सरकार के लिए कांग्रेस या आम आदमी पार्टी और विपक्ष के लिए भाजपा से बेहतर विकल्प कोई और नहीं है ।
5. जमीन पर तेजस्वी और मीडिया में नीतीश :-
तेजस्वी के रैलियों में जबरदस्त भीड़ हो रही है, NDA के रैलियों में कुर्सियां खाली पड़ी रह जा रही है
फिर भी मीडिया के सर्वे में NDA आगे है ...
क्या चुनाव के बीच मे रिजल्ट के पहले के एग्जिट पोल किसी विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुँचाने के लिए किया जाता है ?
TRP घोटाला सामने आने के बाद मीडिया पर भरोसा करना मुश्किल है,
वैसे भी प्रेस इंडेक्स में भारत एकदम पीछे होते जा रहा है ।
6. सृजन घोटाला बिहार का व्यापमं घोटाला है ? :-
यह घोटाला एक एनजीओ, नेताओं, सरकारी विभागों और अधिकारियों के गठजोड़ की कहानी है ।
इसके तहत शहरी विकास के लिए भेजे गए पैसे को गैर-सरकारी संगठन के एकाउंट में पहुंचाया गया और वहां से बंदरबांट हुई ।
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी छानबीन में पाया कि एक छोटा सा एनजीओ सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड भागलपुर जिला प्रशासन के आधा दर्जन सरकारी विकास योजनाओं का पैसा चोरी कर रहा था .
यह सब अधिकारियों, बैंक कर्मियों और सृजन के सदस्यों द्वारा किया जा रहा था .
आखिर क्यों और कैसे आॅडिटर्स ने सरकारी पैसे की इस ठगी को नजरअंदाज किया ?
नोट - नीतीश कुमार ( JDU ) कांग्रेस, भाजपा, LJP, RJD चारो पार्टीयों के सहयोग से सरकार बना चुके है ...
तेजस्वी यादव घोटाला करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ 2015 में उपमुख्यमंत्री भी रह चुके है ।
YouTube Videos :- चुनाव बाद हरियाणा के तरह विरोधी मिल गए तो ?
Twitter :- चिराग पासवान के पुस्तैनी गाँव का हाल बेहाल .
Facebook :- हिन्दू - मुस्लिम जैसे भाषणों से सावधान रहें - सतर्क रहें .
धन्यवाद
Contact :- Bhartendu Vimal Dubey
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