Sunday, 15 December 2019

All About CAB 2019 ( नागरिकता कानून 2019 : पूरी जानकारी )

    नागरिकता संसोधन बिल 2019

                  नागरिकता कानून 2019 

→ नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019 लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया और फिर महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ये विधेयक कानून का रूप ले चुका है , अब इस कानून को खत्म करने के लिए केवल दो रास्ता है ; पहला :- अगर यह कानून संविधान विरोधी है तो सुप्रीम कोर्ट इसे शून्य कर देगी और दूसरा :- अगर सरकार संसद के द्वारा इसमें परिवर्तन करे या इसे वापस लेले ।

 आइए समझते है कि इस विधयेक ( अब कानून ) का विरोध क्यो हो रहा है ?

◆ असम के संदर्भ में :- असम के लोग इस बात से नही नाराज है कि इस बिल में मुस्लिमों को क्यो नहीं शामिल किया गया है !  असम के प्रदर्शनकारी चाहते है कि किसी भी घुसपैठियों को नागरिकता ना दिया जाए , असम को डर है कि अगर बाहरी लोगों को नागरिकता दी जाएगी तो असम में ही आसामी लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे ।


● पूर्वोत्तर भारत :- उत्तर भारत के इतर पूर्वोत्तर भारत मे ये लड़ाई हिन्दू - मुस्लिम की ना हो करके संस्कृति बचाने की लड़ाई है !   पूर्वोत्तर भारत का समाज उत्तर भारत से बिल्कुल अलग है इसीलिए संविधान में इन राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है ...

 इसीलिए इस बिल में कुछ क्षेत्रों को छूट भी दिया गया है

प्रायः जिन बाहरी लोगों को नागरीकता दी जाएगी वो इनके समाज ( संस्कृति ) के नहीं होंगे  चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम या कोई अन्य !!



◆ NRC से सम्बंध :- गृह मंत्री ने कहा है कि पूरे देश में एनआरसी लागू होगा !   इस बिल के कानून बन जाने के बाद सभी गैर - मुस्लिमों ( अर्थात हिंदुओ को , ईसाइयों को , बौद्ध , पारसी , जैन सिख लोगो ) को नागरिकता मिल जाएगा , चाहे उनके पास कागज ( दस्तावेज ) हो या नहीं ।

 इस प्रकार देखा जाए तो इस बिल का एनआरसी से घनिष्ठ संबंध है ।   एनआरसी से केवल ऐसे मुस्लिम शरणार्थी बाहर होंगे जो अपनी नागरिकता साबित नही कर पाएंगे ।

अतः NRC का वही लाभ होगा जो नोटबन्दी का हुआ था !


● पूर्वोत्तर भारत को छोड़ दे तो यह लड़ाई संवैधानिक है ... प्रदर्शनकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के 13 जजो की पीठ ने एक फैसला दिया था जिसके अनुसार धर्मनिरपेक्षता भारत के संविधान का मूल है अतः कोई भी कानून धर्मनिरपेक्षता के कानून का उल्लंघन नहीं कर सकता है ।

सरकार का तर्क है कि यह बिल / कानून संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नही करता है ।



◆ अगर आप नागरिकता संसोधन बिल 2019 और एनआरसी को अलग - अलग मानेंगे तो आपको इस कानून में कोई भी दिक्कत नहीं दिखेगा लेकिन आप ऐसा नहीं कर सकते है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में असम में एनआरसी की प्रक्रिया हुई थी , तथाकथित तौर पर उसमे 19 लाख लोग अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पाए थे जिसमें से 13 लाख गैर मुस्लिम थे , अब सरकार इस कानून के माध्यम से इन गैर मुस्लिमों को निर्बाध रूप से नागरिकता देना चाहती है ।



विशेष आग्रह :- किसी भी बिल का समर्थन या विरोध करने से पहले बिल के कॉपी को जरूर पढ़ ले , लोकसभा व राज्यसभा में पक्ष व विपक्ष के नेताओं के चर्चा पर गौर कर ले और माननीय मंत्री जी के जबाब को भी देख ले, उसके बाद आप निश्चित करे की आप को किस बिल का समर्थन करना है और किस बिल का विरोध करना है ।

नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019 

              पक्ष और विपक्ष में पूरी जानकारी



● इस विधयक के कानून बन जाने के बाद सभी गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी ।

◆ गौरतलब हो कि भारतीय संविधान के हमारे देश के संसद ( लोकसभा + राज्यसभा ) में समय समय पर विधेयक आते रहते हैं और फिर संसद से पारित होने के बाद और महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाते है लेकिन कोई भी विधेयक हमारे संविधान के खिलाफ नही हो सकता है ।

 ● इस विधेयक में साफ साफ लिखा है कि सिख धर्म , ईसाई धर्म , पारसी धर्म , हिन्दू धर्म , जैन धर्म , बौद्ध धर्म के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलेगा ।

◆ अगर साफ शब्दों में कहाँ जाए तो यह विधेयक मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता से वंचित करने के लिए लाया गया है

 और यह विधेयक हिंदुओं को एनआरसी से बचायेगा ।

● मेरे विचार में यह विधयेक भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्षता सिद्धांत के खिलाफ है ।

हम धर्म - जाती , लिंग - भेद , गोरा - काला के आधार पर बनाये गए सभी कानूनों का विरोध करते है ।


हिन्दू - मुस्लिम में फर्क क्यो ? : नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019


मैं नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019 का समर्थन करने वाले लोगों से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ ।

●  क्या हिन्दुओं और मुसलमानों के खून का रंग अलग - अलग होता है ?

◆  क्या मुसलमानों के ईद का चांद और हिंदुओं के करवा चौथ , गणेश चतुर्थी के चांद में अंतर होता है ?

●  क्या हिंदुत्व और शरीयत मानवता से बड़ी है ?

◆  क्या इस बिल को पेश करने से पहले मुस्लिम विद्वानों से विचार विमर्श किया गया है ?

●   क्या आपको नहीं पता  है कि इस बिल का विरोध केवल मुस्लिम ही नही बल्कि हिन्दू समेत अन्य समुदाय के लोग भी कर रहे है ?

◆  क्या आपको पता नहीं है कि असम जैसे राज्यों के अधिकांश लोग ( हिन्दू भी ) इस बिल का विरोध कर रहे हैं ?

●  क्या आपको नहीं पता है कि इससे भारत की जनसंख्या में कितनी वृद्धि होगी ?

◆  दुनिया मे ( पाकिस्तान , बंग्लादेश और अफगानिस्तान में भी ) अधिकांश ऐसे लोग रहते है जो किसी भी धर्म को नही मानते है ।

तो इस बिल में नास्तिक अल्पसंख्यको के लिए कोई प्रावधान क्यो नही किया गया है ?


ऐसे तमाम ऐसे प्रश्न है जिनके बारे में इस बिल में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है ।
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> पहला भाग

◆  अल्पसंख्यक शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है , अल्प मतलब थोड़ा और संख्यक मतलब जनसंख्या !!  यह बहुसंख्यक का विलोम है ।

 ऐसी मानव आबादी ( धर्म , भाषा आदि के आधार पर ) जो किसी देश या राज्य के बाहुल जनसंख्या से कम कुछ सीमित प्रतिशत में हो , उसे अल्पसंख्यक कहते है ।

● भारत मे सबसे बड़ी आबादी हिंदुओ की है और उसके बाद मुस्लिमो की , प्रायः लोग मुस्लिमो को अल्पसंख्यक कहते है लेकिन ज्ञात हो कि भारत मे मुस्लिम अल्पसंख्यको में बहुसंख्यक आबादी है ।

◆ अल्पसंख्यक केवल जाती - धर्म के आधार पर नही बल्कि भाषा , पहनावा आदि के आधार पर भी होते है , सभी प्रकार के अल्पसंख्यको को भरतीय संविधान में उचित सरंक्षण दिया गया है

● अल्पसंख्यक समुदाय : मुस्लिम , जैन , बौद्ध , पारसी , ईसाई  इत्यादि … नास्तिकों को भी अल्पसंख्यक माना जा सकता है ।

> दूसरा भाग

◆  अल्पसंख्यको की सबसे बड़ी समस्या है अपने तौर तरीकों की रक्षा करना ,  अपने भाषा को जीवित रखना  इसीलिए भारत सहित लगभग दुनिया के सभी देशों के संविधानों में अल्पसंख्यको के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं ।
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धर्म बताओ नागरिकता पाओ

● पक्ष : नागरिकता संसोधन बिल 2019 का समर्थन करने वाले कह रहे है कि हिन्दू शरणार्थी कहाँ जाएंगे ? क्योकि विश्व मे कोई भी हिन्दू राष्ट्र नही है और मुस्लिमों के लिए बहुत सारे इस्लामिक देश है ।

 विपक्ष  : तो फिर इस बिल में ईसाइयों को नागरिकता देने की बात क्यो की गई ? क्या ईसाइयों के लिए भी कोई देश नहींं है ?



◆ पक्ष : ये बिल तीन देेेश के अल्पसंख्यक समुदाय को नागरिकता देगा !

 विपक्ष  :  तो फिर इस बिल में नास्तिक लोगो को स्थान क्यो नहीं मिला है ?

#BVD26

🔴 👉 मसला है की CAB जैसे सरकारी हरकत पर भक्त खुश क्यों हैं ..?

जबकि तय है कि कोई भी भक्त इस बिल का देशहित में एक भी फायदा बता नहीं सकते।

तो भक्त खुश क्यों जाते हैं ..?

रहस्य नहीं बल्कि सामान्य सी बात है। समझ तो उन्हें भी है कि फायदा कुछ होना नहीं। उन्हें यह भी मालूम है कि इस सरकार ने पूर्व में भी जो निर्णय लिए हैं देश का नुकसान ही हुआ है। चाहे नोटबन्दी हो या जीएसटी

या फिर ढह गई अर्थव्यवस्था जो 1.5% पर जीडीपी पहुंच गई।

तो भक्त CAB पर भक्त खुश क्यों हैं ...?

क्यों कि CAB के देशहित में नफा नुकसान को समझने के बाद जब विपक्षी एवं बुद्धिजीवियों ने इसका विरोध शुरू किया तो भक्त खुश हो गए। भक्तों का मानना है कि अगर विपक्षी एवं बुद्धिजीवी सरकार की किसी हरकत का विरोध कर रहे हैं तो ये अच्छा ही होगा।

और सरकार को भक्तों की इस भावना का भान है। उसे भी भक्तो की ज्ञान स्तर की बखूबी अंदाजा है। इसलिए किसी भी तरह की जाहिली बेवकूफी देश विरोधी निर्णय लाती है ताकि विपक्ष या बुद्धिजीवी लोग विरोध करें और भक्त इसपर खुश होकर कहें कि वाह सरकार का मास्टरस्ट्रोक ......!

देशहित में CAB का एक फायदा कोई भक्त बता दें।

ये चुनौती है ....!!!!
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नोट : ये मेरे अपने विचार है ।
    मैं किसी भी प्रकार के अफवाहों का समर्थन नहीं करता हूँ और ना तो मैं हिंसात्मक प्रदर्शन का पक्षधर हूँ ।
 कानून व्यवस्था बनाये रखें ।
  धन्यवाद

#BhartenduVimalDubey

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