Thursday, 30 July 2020

अंधभक्तो का "नेहरू ज्ञान"

मैंने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में लिखा कि "हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है" 
तो पढ़िए मेरे एक मित्र ने मुझे क्या रिप्लाई दिया :- 

मैं : हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है
भक्त : होता अगर सरदार पटेल व गांधी ना होते
मैं : तो कौन होता
भक्त : जो शहीद हुए थे
मैं : नाम बताओ कौन
भक्त : तुम कलंक हो 
मैं : अच्छा 
भक्त : नेहरू ( गाली देते हुए ) ना होते तो पाकिस्तान ना होता , गांधी को गाली
मैं : ऐसा कहा लिखा है ?
भक्त : हर जगह लिखा है
मैं : बुक नेम / वेबसाइट लिंक 

तब से उसने मेरे किसी मैसेज का रिप्लाई ही नहीं दिया 

ये रहा चैट का स्क्रीनशॉट 👇 
नोट : हमने कही पर भी "निजता के नियम" का उलंघन नहीं किया है ।
हम "प्रेस से सम्बंधित" नियमों का पालन करते हुए ही अपने "अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता" का उपयोग करते हैं ।

जाते - जाते मेरे यूट्यूब पर "फैक्ट चेक" करने का तरीका देखते जाइए 👇 

धन्यवाद 

Tuesday, 21 July 2020

क्या राजद्रोह के कानून को खत्म कर देना चाहिए ? राजद्रोह व देशद्रोह में अंतर

आज के समय में हर किसी को राजद्रोह और देशद्रोह के बीच के अंतर को समझना ही होगा ।
जैसे 2014 के पहले तत्कालीन सरकार के खिलाफ #भाजपा विरोध प्रदर्शन करती थी ठीक वैसे आज के समय में #कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों को विरोध प्रदर्शन करने का हक है ।


अंग्रेजी हुकूमत ने जनता के आवाज को कुचलने के लिए "राजद्रोह" का कानून बनाया था ।
राजद्रोह, देशद्रोह और राष्ट्रद्रोह में स्पष्ट अंतर है ।

लोकतांत्रिक देश में राजद्रोह जैसे कानून का कोई औचित्य नहीं है ।
#राजतंत्र में राजा का मतलब ही देश होता था इसीलिए राजतंत्र में #राजद्रोह ही #देशद्रोह होता था , राजतंत्र में राजा के किसी भी फैसले के खिलाफ बोलना के अर्थ देश के खिलाफ बोलना था
किंतु लोकतांत्रिक देश मे ऐसा नहीं होता है ।
लोकतांत्रिक देश मे - #सरकार का मतलब देश नहीं होता है और ना ही राजद्रोह का मतलब देशद्रोह होता है । 

राजतंत्र में राजा निरंकुश होता है जबकि #लोकतंत्र में कोई भी निरंकुश नहीं होता है ।

YouTube Video Link 👇
https://youtu.be/D2hS-_-YJdk

Monday, 6 July 2020

Exclusive सिद्धार्थ यादव : एक गरीब परिवार में जन्में , विष्णु यादव से मिली सिद्धार्थ यादव की पहचान

मॉडलिंग से बॉलीवुड तक का सफर :-
12 साल  की उम्र से ही मॉडलिंग का सफ़र शुरू कर दिया था , पर प्रत्येक मिडल क्लास परिवार के तरह इनके परिवार वालो की भी इच्छा थी की ये सरकारी नौकरी में लग जाए
लेकिन विष्णु के अंदर कुछ अलग कर गुजरने की चाहत थी इसीलिए इन्होंने स्कूल के दौरान ही बिना परिवार को बताए , पहला मॉडलिंग शो "घिटोरनी" , न्यू दिल्ली में किया था.
 काफी रुकावटें आई पर हार नहीं मानी,  मॉडलिंग के सफर में बहुत कुछ देखने को मिला,  फैशन डिजाइनर ने पैसे से लेकर हर चीज की डिमांड की परंतु सामान्य परिवार के होने के कारण मॉडलिंग का सफर कुछ समय बाद छोड़ना पड़ा.
जिंदगी में उतार-चढ़ाव आए . लेकिन कहते है ना, "अगर किसी चीज को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश मैं लग जाती है".
और कुछ इस तरह सफर आगे बढ़ा वहां से सफ़र आगे बढ़ता रहा . पर आखिर वो कहते हैं ना "सब्र का फल मीठा होता है"

                 File Pic : Siddharth Yadav 

 कुछ समय बाद दिल्ली के बैंड कंपनियों ने मौका दिया, ब्रांड  प्रिंट शूट किए , Amazon, flipkart, ShopClues, Snapdeal, Paytm etc. मॉडलिंग से थोड़ी सफलता मिली लेकिन पारिवारिक समस्याओं के कारण वह सफर वहीं छोड़ना पड़ा.
किंतु अभी भी सिद्धार्थ के अंदर कुछ कर गुजरने का लगन था इसीलिए मॉडलिंग छोड़ने के बाद किसी तरह एक्टिंग लाइन में एंट्री की और फिर शुरू हुआ एक नया जद्दोजहद ...
शुरुआती टाइम में अच्छी सफलता मिली नई दिल्ली के कनॉट प्लेस से कुछ थिएटर करना शुरू किया,
 फिर ऑडिशन दिए ; विष्णु यह बताते हुए भावुक हो जाते है कि 1 दिन में 50 से 100 ऑडिशन देने के बाद भी कहीं से भी कोई अच्छी सफलता नहीं हाथ नहीं लगा लेकिन विष्णु हार मानने वालों से नहीं थे
आगे चल करके न्यू दिल्ली में ही अनेक मूवी और टीवी सीरिल में किया क्राउड (crowd) रोल किया  ,
 zee TV के ज़िंदगी की महक में किए गए इनके supporting character से थोड़ी सफला मिली ...
 12th की परीक्षा के बाद ही सपनो की नागरी बॉम्बे / Mumbai का सफ़र तय किया.
फिर अनेको ऑडिशंस दिए और अधिक परिश्रम किया लेकिन हार नहीं मानी ,
और फिर इनकी महनत रंग लाई ,
फिल्म डायरेक्ट और राईट ने इनके एक्टिंग व परिश्रम को देखते हुए अपनी पहली फिल्म " Ek step " में हीरो के दोस्त का किरदार यानी कि "सिद्धार्थ" का किरदार दिया और इस प्रकार विष्णु बन गया "सिद्धार्थ" ...

हम विष्णु उर्फ सिद्धार्थ के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है ।

नोट : यह आर्टिकल सिद्धार्थ यादव व भारतेन्दु विमल दुबे के Exclusive बात चीत पर आधारित है ।
इस आर्टिकल के सारे copy right भारतेन्दु विमल दुबे व सिद्धार्थ यादव के पास registered है;
अतः अगर कोई इस आर्टिकल को किसी भी तरह से बिना क्रेडिट दिए पब्लिश करता है तो वह कानूनी तौर पर हर्जे - खर्चे के जिम्मेदार होगा ।

धन्यवाद
टीम #BhartenduVimalDubey