Sunday, 23 February 2020

CAA लाने की जरूरत क्यो पड़ी ? Last Blog on CAA, NPR, NRC

CAA 2019 लाने की जरूरत क्यो पड़ी ?

जैसा कि आपको पता है कि असम के NRC से 19 लाख लोग बाहर हो गए थे जिसमे से लगभग 15 लाख गैर मुस्लिम है , तो इन्ही गैर मुसलमानों को वापस भारत की नागरिकता देने के लिए धर्म के आधार पर नागरिकता संसोधन कानून 2019 लाया गया है
और पूरे देश के जितने भी गैर मुस्लिम NRC से बाहर होंगे, उन्हें CAA 2019 का लाभ होगा

[ नियम व शर्तें लागू / Terms & Condition Apply ]

लेकिन 
जो गैर मुस्लिम NRC से बाहर हो गए है उन्हें CAA 2019 का लाभ लेने के लिए साबित करना होगा कि वे पाकिस्तान, बंग्लादेश या अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक है । 

गौर करने वाली बात यह कि भारत के सभी राज्य अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से नहीं लगते है , तो ऐसे राज्यो के गैर मुस्लिम जो एनआरसी से बाहर हुए होंगे कैसे साबित करेंगे कि वे उन देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यक है * 

मतलब की जो गैर मुस्लिम सोच रहे हैं कि अगर हम NRC से बाहर भी हो गए तो CAA का लाभ ले लेंगे ,
उन्हें सोचना चाहिए कि वे अपने आप को उल्लेखित तीन देशों का शरणार्थी कैसे साबित करेंगे ? * 
* मतलब की अगर कोई गैर मुस्लिम NRC से बाहर हो गया तो उसे पहले खुद को शरणार्थी साबित करना होगा

* मतलब की सभी गैर मुस्लिमो को चाहे वे घुसपैठिए हो या शरणार्थी उन्हें इस CAA से भारत की नागरिकता नही मिलेगा ?

तमाम प्रश्न है ... 
क्या अन्य देश के घुसपैठिए अपने आप को इन तीन देशों के अल्पसंख्यक बता करके भारत की नागरिकता नहीं ले सकते है ? 
क्या मुस्लिम गैर मुस्लिम बन करके इस कानून का लाभ नहीं उठा सकते है ? 

अभी तक आपने क्या पढ़ा ?

1. नागरिकता संसोधन कानून 2003 के अनुसार "NPR और जनगणना" एक नहीं है, दोनों अलग अलग प्रोसेस है ।
2. इसके पहले भी देश मे NPR हुआ था लेकिन इस बार के NPR और कांग्रेस के टाइम के NPR के प्रश्नों में अंतर है । 
3. कानून के अनुसार , NPR ही NRC का पहला चरण है । 
4. अभी तक केवल असम में ही NRC हुआ है ।
5. गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार कुछ शर्तो के साथ CAA और NRC में सम्बन्ध है । 
6. NPR के डाटा का NRC में इस्तेमाल होगा या नहीं , इस विषय में भी अभी कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है , कानून कुछ और कहता है और मौजूदा हुकूमत कुछ और ! 
7. NRC के वक्त कौन से डॉक्यूमेंटस लगेंगे ? 
8. क्या पूरे देश में असम के तर्ज पर ही NRC होगा ? मतलब की क्या वंशावलि से अपनी नागरिकता साबित करना होगा ? 
9. गृह मंत्री अमित शाह संसद में स्पष्ट रूप से कह चुके है कि पूरे देश मे NRC आएगा ! 
जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक चुनावी सभा मे कहे थे कि अभी NRC पर कोई चर्चा नहीं हुआ है । 
10. नागरिकता संसोधन कानून 2019 कोई नया कानून नहीं है बल्कि यह नागरिकता कानून 1995 में एक संसोधन मात्र है 
11. गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड, पैन कार्ड आदि नागरिकता का सबूत नहीं है । 
12.- कांग्रेस के समय भी देश में डिस्टेंशन सेंटर बना था और वर्तमान मोदी सरकार के समय भी डिस्टेंशन सेंटर बना है 
जबकि 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी सभा मे कहा था कि देश में कोई डिस्टेंशन कैम्प नहीं है । 
13.  CAA 2019 से पहले भी लोगो को नागरिकता मिलती थी क्योकि देश मे नागरिकता कानून वर्ष 1995 से ही मौजूद है । 
14.  असम के जो हिन्दू NRC से बाहर हो गए है क्या उन्हें CAA 2019 के द्वारा भारत की नागरिकता मिल जाएगी ?
15.  NRC में सभी गैर मुस्लिमों को भी अपनी नागरिकता साबित करना होगा ।
16.  अगर NRC से बाहर हुए गैर मुस्लिमों को CAA 2019 का लाभ लेना होगा तो उन्हें पहले अपने आप को उल्लेखित तीन देशों में से किसी एक देश का गैर मुस्लिम शरणार्थी साबित करना होगा ?
17.  वैसे भारत में अभी कोई शरणार्थी पालिसी नहीं है ।


{ नोट : हमे चुनावी सभा मे कहे बातो पर नही बल्कि संसद में कहे बातो पर विश्वास करना चाहिए 
हमे मौखिक बातो पर नहीं बल्कि लिखित बातों पर विश्वास करना चाहिए }

आप से निवेदन है कि आप व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के बातो पर विश्वास ना करे ,
खुद से कानून को पढ़े और समझे
गूगल का भी इस्तेमाल करे

मेरे पुराने ब्लॉग्स को भी पढ़े ।

धन्यवाद
" भारतेन्दु विमल दुबे " 

Friday, 14 February 2020

जन प्रतिनिधियों की जरूरत क्यों है ?

आपके एरिया के जन प्रतिनिधि :-

◆ तीन स्तरीय पंचायत के प्रतिनिधि ( ग्रामीण ) -
1.   ग्राम पंचायत के सदस्य और ग्राम प्रधान
2.   क्षेत्र पंचायत के सदस्य और ब्लॉक प्रमुख
3.   जिला पंचायत के सदस्य और जिला अध्यक्ष

* ग्रामीण क्षेत्रों से अलग अन्य जगह पर ग्राम पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान के जगह पर नगर पंचायत, नगर पालिका या नगर निगम के सदस्य ( पार्षद ) और अध्यक्ष ( महापौर ) होते है * इतना तो आपको पता होगा ।

★ कानून बनाने वाले जन प्रतिनिधि :-
1.   विधानसभा सदस्य ( MLA )
2.   कुछ राज्यों में विधानपरिषद सदस्य ( MLC )
3.   लोकसभा सदस्य ( MP )
4.    राज्यसभा सदस्य  ( MP )

आप आते है असली मुद्दे पर

क्या आपके एरिया के सभी जन प्रतिनिधियों का #CAA_NRC_NPR पर एक तरीके का ही सोच है ?
या
सभी जन प्रतिनिधि अपने आलाकमान के गुलाम है ?
और
अगर सब आलाकमान के गुलाम है तो फिर इतने जन प्रतिनिधियों का क्या काम ? 

क्या जनप्रतिनिधियों का अपना व्यक्तिगत मत नहीं होता है ? अगर होता है तो फिर उन्हें अपने व्यक्तिगत मत प्रकट करने की छूट क्यो नहीं है ?

क्या भाजपा के सभी सांसदों / विधायकों का विचार भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जैसा ही है ? अगर हाँ तो फिर देश मे इतने जनप्रतिनिधियों की जरूरत क्यों है ? अगर नहीं तो वे अपने विचार जनता के सामने क्यो नहीं रखते है ?

यह केवल एक पार्टी की बात नहीं है 
यह केवल एक कानून की बात नहीं है । 

क्या आपको मेरे सवाल समझ आ रहे है ?
क्या आप मेरे सवाल से सहमत है ?
क्या हमको इन सवालों पर विचार करना चाहिए ?

इन्ही सवालों में भारत देश के सभी समस्याओं का जबाब छिपा हुआ है । 
 जबतक राजनीतिक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तबतक सड़क, पानी, स्कूल, कॉलेज, सुरक्षा आदि समस्याओं का हल नहीं निकलेगा । 

और भी तमाम सवाल है जैसे कबतक अपराधी , रेपिस्ट, अनपढ़ हमारे जनप्रतिनिधि बनते रहेंगे ? 

कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में लिखे
या इंस्टाग्राम पर मुझे DM करे
🙏 धन्यवाद 🙏

" भारतेन्दु विमल दुबे उर्फ उमंग दुबे "

Tuesday, 11 February 2020

All About CAA, NPR, NRC Combination In Hindi Part 3

उत्तर भारत मे CAA का विरोध 

अगर आप CAA को NRC से अगल करके देखेंगे तो आपको निम्नलिखित एक दिक्कत ही मिलेगा ।

 भारतीय संविधान के अनुसार भारत में कोई भी कानून धर्म के आधार पर नहीं बन सकता है इसीलिए मुसलमानों व पारसियों को आरक्षण नही मिला था और इस कानून में साफ - साफ धर्मो का उल्लेख है ।

इस कानून के बाद मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर सकता है ।।

[ वैसे किसी कानून के संवैधानिक या असंवैधानिक होने का फैसला भारत की तथाकथित स्वत्रंत न्यायपालिका करती है ]
【 श्रीमती इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा किया था और न्यायपालिका ने उसे संवैधानिक घोषित किया था फिर लोगो ने विशेषकर JP ने आपातकाल का घोर विरोध किया था 】
दूसरी तरफ अगर आप गृह मंत्री अमित शाह के भाषणों पर ध्यान देंगे तो आप पाएंगे कि CAA , NPR और NRC तीनो एक दूसरे से सम्बंधित है ।

   असम व पूर्वोत्तर भारत मे CAA का विरोध

  पूर्वोत्तर भारत विशेष रूप से असम की स्थिति इस से अलग है आप मेरे पुराने ब्लॉग्स में पढ़ सकते है कि किस तरह से CAA का विवाद पूर्वोत्तर भारत के लिए और उत्तर भारत के लिए अलग अलग है ।

आर्टिकल-14 : समानता का अधिकार

भारत के संविधान में यह कहा गया है कि राज्य, भारत के राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता से या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा. भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 के हिसाब से इसका मतलब यह है कि सरकार भारत में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगी.

Keys :-

 * CAB 2019 = नागरिकता संसोधन बिल 2019 / Citizenship Abetment Bill 2019

* संसद से पारित होने के बाद और महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद CAB , CAA हो गया है

CAA 2019 = नागरिकता संसोधन कानून 2019 / Citizenship Abetment Act 2019

" Bhartendu Vimal Dubey "

हिंदुओं को भी #CAA2019 का विरोध करना चाहिए क्योंकि अगर मुसलमानों को छोड़ भी दे तो #caa तमाम हिन्दू शरणार्थियों के भी खिलाफ है ।

1.  ऐसे हिंदुओं को इससे क्या लाभ होगा जो अन्य राज्यो से जा करके असम में बसे थे और #NRC से बाहर हो गए थे ।

2.  तमिल हिन्दू शरणार्थियों को इस कानून से क्या लाभ होगा ?

3.  क्या इस कानून के पहले ऐसा कोई कानून नहीं था जिससे शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जा सके ?

4.  असम जैसे कुछ राज्यो को भारतीय संविधान द्वारा विशेष सरंक्षण दिया गया है जिसके अंतर्गत किसी भी कानून द्वारा वहाँ पर किसी भी घुसपैठियों को नागरिकता नहीं दिया जा सकता है क्योंकि पूर्वोत्तर भारत मे हिन्दू / मुस्लिम से अधिक स्थानीय संस्कृति का महत्व है ।

और भी बहुत सारे कारण है इस कानून के विरोध का !!

 ★ याद रखें कि किसी कानून के खिलाफ या सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं होता है ।

 :- #BhartenduVimalDubey

बीजेपी व गोदी मीडिया कह रही है कि CAA से किसी भी भारतीय का कुछ लेना देना नहीं है ... अरे ये तो हम सबको पता है तीन पेज का CAA कानून है सब लोग पढ़े है ...

 मुख्य मुद्दा यह कि खुद गृह मंत्री ने कहा था कि CAB के ठीक बाद NRC आएगा ( CAB अब CAA है )

 ★ जो गैर मुस्लिम NRC में नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे उन्हें CAA का लाभ होगा और उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगा लेकिन ऐसे मुसलमानों का क्या जो नागरिकता नहीं साबित कर पाएंगे ?

उन्हें शरणार्थी कैम्प में भेज दिया जाएगा , उनके जमीन , घर आदि सरकार द्वारा जब्त कर लिया जाएगा !!

■  नोटबन्दी तो याद ही होगा ??  किस तरह सभी लोगो को लाइन में लगना पड़ा था ?

 खैर लाइन में तो सबको लगना पड़ेगा चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम !!

◆ NRC से सबसे अधिक समस्या किसको होगा ?

अनाथालय में रह रहे बच्चे अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे ?

 झुग्गी बस्तियों में रहने वालों के पास कागज कहाँ से आएगा ?
तो क्या सरकार इन सभी दलित - बंचित लोगो को शरणार्थी कैम्प में मरने के लिए छोड़ देगी ?

और भी बहुत सारी समस्याएं है

 कितना खर्चा होगा ?

 अर्थव्यवस्था नेगेटिव में चला जायेगा !!

Thank You

#BhartenduVimalDubey

All About CAA, NPR, NRC Combination In Hindi Part 2

बिना पूरा ब्लॉग पढ़े आपको आपके प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलेगा !!
पहले हम यहाँ बात करेंगे कि NRC से किसको - किसको दिक्कत है उससे पहले बता दूं कि गृह मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड इत्यादि से नागरिकता साबित नहीं होता है और हमारे पास उदाहरण के तौर पर केवल " असम का NRC " ही मौजूद है और तो क्या पूरे भारत मे असम के तर्ज़ पर ही एनआरसी होगा ?
और यकीन मानिए अगर असम के तर्ज पर NRC हुआ तो स्थिति बहुत ही भयावह होगा ।।

★  आधार कार्ड, जनगणना, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड इत्यादि का रिकॉर्ड सरकार के पास है तो क्या सरकार इन पर  विश्लेषण करके घुसपैठिए को चिन्हित करके अगल नहीं कर सकती है ? क्या इन रिकॉर्डों का विश्लेषण करके " भारत के नागरिकों की लिस्ट " ( NRC ) तैयार नहीं किया जा सकता है ?
★    आधार कार्ड के द्वारा सरकार के पास लोगो का बियोमैट्री रिकॉर्ड है और करोड़ों खर्च करने पर आधार कार्ड बन करके तैयार हुआ है , NRC में ऐसा क्या होगा जो बियोमैट्री रिकॉर्ड से भी पुख्ता होगा ? वंशावलि साबित करना तो 75 % लोगो के लिए असंभव होगा ।
आपको याद होगा कि " नोटबन्दी " में किसी भी धर्म के गरीबों को ही दिक्कत हुआ था क्योकि पैसे वाले तो दाएं-बाएं से अपने गैर कानूनी पैसों को भी कानूनी बना लिए थे और गरीब परिवार तो अपने पैसे निकाले के लिए भी परेशान थे । मेरे हिसाब से एनआरसी भी नोटबन्दी के तरह ही साबित होगा , आपके पास असम का उदाहरण है ही , असम में किसी भी अमीर व्यक्ति का नाम NRC से बाहर नहीं हुआ है ?
आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि किस तरीके से अमीर आदमी पैसे दे करके बैक डेट में अपने सारे कागज बनवा लेगा लेकिन गरीब आदमी का क्या होगा ?
★ भारत मे तमाम ऐसे लोग है जो अपने पैसों को बैंक से नहीं निकाल पाते है क्योंकि आधार कार्ड में उनका दूसरा नाम है और बैंक में दूसरा जैसे आधार कार्ड में " Bhartendu " हो और बैंक में " Bharatendu " . दोनों नाम एक ही इंसान है लेकिन केवल एक " A " के कारण वह अपना पैसा नहीं निकाल पाता है । ऐसे लोग अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे ?
उत्तर प्रदेश के तमाम लोग मुंबई जैसे शहरों में जा करके बस गए है , ऐसे लोग NPR में अपने मम्मी के जन्म का स्थान कैसे बताएंगे ?
मेरे पर दादी की उम्र 85 से अधिक है , वे अपने जन्म स्थान की जानकारी कैसे देंगी ?
ऐसे बुजुर्ग लोग जो अपने गांव से दूर शहर में अपने परिवार के साथ रहते है , वे अपने पापा के जन्म स्थान की जानकारी कैसे देंगे ?
हमारे यहाँ हिजड़ा समुदाय की स्थिति आपको पता ही होगी , उन्हें घर से निकाल दिया जाता है । अतः हिजड़ा समुदाय अपनी नागरिकता कैसे सिद्ध करेंगी ?
भारत की अधिकांश जनता झुग्गियों में रहती है और बाढ़ आने पर हर साल तमाम घर उजड़ जाते है , ऐसे लोगो के कागज सही सलामत रहते होंगे क्या ?
पहुँचे हुए लोग पैसे व रूतबे के बल पर पटवारी , तहसीलदार आदि से मिल करके अपने सारे कागज मिनटों में ठीक करवा लेंगे लेकिन गरीब ऐसा नहीं कर पाएंगे !
बाकी गृह मंत्री के भाषण से स्पष्ट है कि इससे केवल मुसलमानों को डरने की जरूरत है क्योकि अगर कोई हिन्दू अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पायेगा तो उसे CAA 2019 से दुबारा नागरिकता मिल जाएगा लेकिन क्या फिर वे स्वाभिमान से जिंदा रह पाएंगे ? लोग उस पर हमेशा शक करेंगे कि ये तो घुसपैठिया है ये अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाया था ।

NRC करने में करोड़ो रूपये खर्च होगा , मंदी के दौर में करोड़ो रूपये कहाँ से आएगा ?
भारत के कुछ राज्यो से कोई विदेशी सीमा नहीं लगता है तो ऐसे राज्यो में घुसपैठिए कैसे आ सकते है ?
*** *** *** *** *** *** ***

 मेरा एक प्रश्न है कि हमे लिखित दस्तावेज पर विश्वास करना चाहिए या मौखिक बातो पर ?

जाहिर है कि अधिकांश लोग कहेंगे कि लिखत बातो पर ही विश्वास करना चाहिए क्योकि मौखिक बातो से तो आसानी से पलटा जा सकता है ।

अब बात करते है की ( CAA , NPR व NRC ) से दिक्कत क्या है ?

1. भारतीय संविधान के अनुसार भारत में कोई भी कानून धर्म के आधार पर नहीं बन सकता है इसीलिए मुसलमानों व पारसियों को आरक्षण नही मिला था और इस कानून में साफ - साफ धर्मो का उल्लेख है ।

इस कानून के बाद मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर सकता है ।

2. गृह मंत्री अमित शाह ने साफ - साफ बताया था कि पहले CAB आएगा फिर NRC आएगा ...

पहले CAB के द्वारा 6 गैर मुस्लिम समुदाय के लोगो को भारत की नागरिकता दी जाएगी उसके बाद NRC से घुसपैठिए को बाहर किया जाएगा ।

मतलब CAB के द्वारा सभी गैर मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी जाएगी चाहे उनके पास कोई कागज हो या नही !
★ मैंने अपने पिछले ब्लॉग्स में बताया है कि आखिर CAB की जरूरत क्यो पड़ी , इसीलिए यहाँ केवल समस्याओं को बता रहा हूँ .

Ok

3. इस कानून के समर्थकों का कहना है कि मुसलमानों के लिए बहुत सारे देश है लेकिन हिंदुओ के लिए केवल भारत है,

हाँ यह सही है कि विश्व में एक मात्र हिन्दू नेपाल भी अब धर्मनिरपेक्ष बन चुका है

लेकिन फिर इस आधार पर CAA में ईसाइयों और बौद्धों को भी नहीं शामिल करना चाहिए था क्योकि विश्व मे बहुत सारे ईसाई व बौद्ध राष्ट्र है ।

4. समर्थक :- ये पड़ोसी देश के अल्पसंख्यक लोगो की बात करता है

हकीकत :- आप एक बार तीन पेज के CAA कानून को पढ़ लीजिए, अगर अल्पसंख्यक शब्द लिखा होता तो फिर विवाद ही नहीं होता , इस कानून में अल्पसंख्यक के जगह धर्मों का उल्लेख है ।

और भारत के केवल तीन पड़ोसी देश नहीं है ।

5. सरकार :- हमने 2016 से ले करके तमाम मुसलमानों को नागरिकता दिया है

सवाल :- तो फिर CAA 2019 की क्या जरूरत पड़ी ? उसी नियम से अन्य शरणार्थियों को भी नागरिकता दिया जा सकता था ।

6. सरकार : ये नागरिकता देने का कानून है लेने का नहीं !

हकीकत : गृह मंत्री ने बार बार कहा है की क्रोनोलॉजी समझिए CAA और NRC एक दूसरे से सम्बंधित है ।

7. सरकार : प्रधानमंत्री ने कह दिया कि NRC पर कोई बात नहीं हुआ है

हकीकत : महामहिम राष्ट्रपति का अभिभाषण केंद्रीय मंत्रिमंडल ही लिख करके देता है और गृह मंत्री ने संसद के रिकॉर्ड में बोला था कि NRC आएगा ..

अब लोग लिखित बातो पर ही विश्वास करेंगे ना कि मौखिक बातो पर ।

8. BJP : NPR और NRC में सम्बंध नहीं है ।

गृह मंत्रालय वेबसाइट : NPR ही NRC का पहला चरण है ।

■    क्या NPR और जनगणना में अंतर है ❓
      जैसा कि आप सभी को पता है कि 1951 से हर दस साल के अंतराल पर भारत मे जनगणना होता है, 2011 में जनगणना हुआ था तो यह जायज है कि फिर 2021 में जनगणना होगा , जनगणना एक सामान्य प्रक्रिया है इसीलिए इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए ।

         NPR का मूल नागरिकता संसोधन कानून 2003  है जिसे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ले करके आयी थी ।

      अतः NPR और जनगणना को एक समझना मूर्खता होगी ।

◆  क्या 2015 के NPR और 2020 के लिए प्रस्तावित NPR में अंतर है ❓
    पहला एनपीआर 2010 में तैयार किया गया था। इसे 2015 में अपडेट किया गया था। अब इसे एक बार फिर अपड़ेट किया जाएगा। इसके लिए अप्रैल 2020 से सितंबर 2021 की जनगणना में हाउसलिस्टिंग फेज के साथ काम शुरू किया जाएगा।

 इस बार के NPR में कुछ नए प्रश्न जोड़े गए है जैसे आपके पिता का जन्म कहाँ हुआ था ? , आपके माता का जन्म कहाँ हुआ था ?

हम गृह मंत्रालय के वेबसाइट पर NPR में पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची देख सकते हैं ।

अतः प्रश्नों के लिहाज से कांग्रेस शासन में आये NPR और अब भाजपा सरकार में आये NPR में अंतर है ।

★    क्या NPR ही NRC है  ❓
  गृह मंत्री व भाजपा के अनुसार NPR और NRC में कोई सम्बंध नहीं है

जबकि CAA 2003 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि NPR ही NRC का पहला कदम होगा ।

गृह मंत्री और भाजपा के अनुसार NRC के लिए NPR के डाटा का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा

जबकि गृह मंत्रालय के नवीनतम रिपोर्ट में उल्लेखित है कि NPR ही NRC का पहला चरण है अर्थात बिना NPR के NCR नहीं हो सकता है ।

अतः स्पष्ट रूप से NPR ही NRC नहीं है

परंतु दोनों में समानता है ।

  जो लोग कह रहे है कि NPR ही NRC है वे आपको गुमराह कर रहे है

 और जो लोग ये कह रहे है कि NPR और NRC में कोई सम्बंध नहीं है वे भी आपको गुमराह कर रहे है ।

क्या CAA और NRC एक दूसरे से सम्बंधित है ?

मैं यहाँ मान करके चल रहा हूँ कि आपको CAA 2019 की मूलभूत बाते पता होगी ।

◆ CAA 2019 लाने की जरूरत इसीलिए पड़ी क्योकि असम के NRC में अधिकांश गैर मुस्लिम बाहर हुए थे ।

गृह मंत्री अमित शाह ने समझाते हुए कहा था कि पहले हम CAB के द्वारा 6 गैर मुस्लिम समुदाय ( जैन, पारसी, बौद्ध, हिन्दू, ईसाई, सिख ) के शरणार्थियों को नागरिकता देंगे और फिर NRC के द्वारा घुसपैठिए को बाहर करेंगे .

अब आप एक मिनट ठरह के सोचिए कि अमित शाह कहना क्या चाहते है ?

तो क्या अमित शाह का मतलब है कि गैर मुस्लिम घुसपैठिए को भी नागरिकता मिलेगा और शरणार्थी मुसलमान भी घुसपैठिए है ?

◆ कुछ लोगो के अनुसार अगर कोई अब्दुल खान और भारतेन्दु दुबे NRC में अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पायेगा तो दोनों से नागरिकता के सारे अधिकार छीन लिए जाएंगे और उन्हें डिटेंशन कैम्प में डाल दिया जाएगा लेकिन CAA के माध्यम से भारतेन्दु दुबे को वापस भारत की नागरिकता मिल जाएगी लेकिन अब्दुल खान को नहीं ।

सवाल :- सबसे पहले CAA और NRC में सम्बंध किसने बताया ?
जबाब :- तत्कालीन भापज अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने

सवाल :- क्या असम में NRC से बाहर हुए गैर मुसलमानों को नागरिकता देने के लिए CAA लाया गया है ?
जबाब :- गृह मंत्री और भाजपा के अनुसार " हाँ  "

सवाल :- प्रधानमंत्री ने कहा है कि NRC की चर्चा नहीं हुई है
जबाब :- प्रधानमंत्री ने झूठ कहा था क्योकि NRC की चर्चा संसद में गृह मंत्री ने किया था ।

सवाल : प्रधानमंत्री और गृह मंत्री में से कौन सही बोल रहा है ?
जबाब : हमे मौखिक बातो पर विश्वास नहीं करना चाहिए ।

हमे गृह मंत्रालय और सरकार के वेबसाइट , सरकारी पत्र , न्यायालय के आदेश या संसद के रिकॉर्ड पर विश्वास करना चाहिए ।

सवाल : अभी तो NRC का ड्राफ्ट वैगरा नहीं हुआ है तो विरोध प्रदर्शन क्यो ?
जबाब : तो महामहिम राष्ट्रपति के लिखित अभिभाषण पर विश्वास ना करे ? संसद के रिकॉर्ड पर विश्वास ना करे ?

मैं यहाँ किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचना चाहता हूँ, आप खुद एक बार तीन पेज का " CAA 2019 " कानून पढ़ लीजिए और गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के भाषणों में तुलना कर लीजिए , ध्यान रहे कि मोदी जी ने CAA पर संसद में हुए बहस में बिल्कुल भी हिस्सा नहीं लिया था , CAA गृह मंत्री ने पेश किया था और अमित शाह ने ही इस चर्चा पर जबाब भी दिया था ,
तो आप खुद तय कर ले किस पर विश्वास करे और किस पर नहीं ।
आप खुद से पढ़े और समझे फिर किसी निष्कर्ष पर पहुंचे

Full Forms :-

1. NPR = The National Population Register / राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर

2. CAA 2003 = Citizenship Amendment Act 2003 / नागरिकता संसोधन कानून 2003

* CAA 2003 या CAA 2019 ये दोनों कानून नागरिकता के मूल कानून 1955 में संसोधन करके बनाया गया है *

3. NRC = The National Register of Citizens / राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

नोट : आप अधिक जानकारी के लिए मेरे पुराने ब्लॉग्स भी पढ़ सकते है ।

कमेंट करके अपनी राय दे

🙏 धन्यवाद 🙏

Instagram 🆔 " BhartenduVimalDubey "

All About CAA , NPR , NRC Combination In Hindi Part 1

नागरिकता संसोधन बिल 2019 ( CAB 2019 ) / नागरिकता संसोधन कानून 2019 ( CAA 2019 )

→ नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019 लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया और फिर महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ये विधेयक कानून का रूप ले चुका है , अब इस कानून को खत्म करने के लिए केवल दो रास्ता है ; पहला :- अगर यह कानून संविधान विरोधी है तो सुप्रीम कोर्ट इसे शून्य कर देगी और दूसरा :- अगर सरकार संसद के द्वारा इसमें परिवर्तन करे या इसे वापस लेले ।

 आइए समझते है कि इस विधयेक ( अब कानून ) का विरोध क्यो हो रहा है ?

◆ असम के संदर्भ में :- असम के लोग इस बात से नही नाराज है कि इस बिल में मुस्लिमों को क्यो नहीं शामिल किया गया है !  असम के प्रदर्शनकारी चाहते है कि किसी भी घुसपैठियों को नागरिकता ना दिया जाए , असम को डर है कि अगर बाहरी लोगों को नागरिकता दी जाएगी तो असम में ही आसामी लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे ।

● पूर्वोत्तर भारत :- उत्तर भारत के इतर पूर्वोत्तर भारत मे ये लड़ाई हिन्दू – मुस्लिम की ना हो करके संस्कृति बचाने की लड़ाई है !   पूर्वोत्तर भारत का समाज उत्तर भारत से बिल्कुल अलग है इसीलिए संविधान में इन राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है …

 इसीलिए इस बिल में कुछ क्षेत्रों को छूट भी दिया गया है

प्रायः जिन बाहरी लोगों को नागरीकता दी जाएगी वो इनके समाज ( संस्कृति ) के नहीं होंगे  चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम या कोई अन्य !!

◆ NRC से सम्बंध :- गृह मंत्री ने कहा है कि पूरे देश में एनआरसी लागू होगा !   इस बिल के कानून बन जाने के बाद सभी गैर – मुस्लिमों ( अर्थात हिंदुओ को , ईसाइयों को , बौद्ध , पारसी , जैन सिख लोगो ) को नागरिकता मिल जाएगा , चाहे उनके पास कागज ( दस्तावेज ) हो या नहीं ।

 इस प्रकार देखा जाए तो इस बिल का एनआरसी से घनिष्ठ संबंध है ।   एनआरसी से केवल ऐसे मुस्लिम शरणार्थी बाहर होंगे जो अपनी नागरिकता साबित नही कर पाएंगे ।

अतः NRC का वही लाभ होगा जो नोटबन्दी का हुआ था !

● पूर्वोत्तर भारत को छोड़ दे तो यह लड़ाई संवैधानिक है … प्रदर्शनकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के 13 जजो की पीठ ने एक फैसला दिया था जिसके अनुसार धर्मनिरपेक्षता भारत के संविधान का मूल है अतः कोई भी कानून धर्मनिरपेक्षता के कानून का उल्लंघन नहीं कर सकता है ।

सरकार का तर्क है कि यह बिल / कानून संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नही करता है ।

◆ अगर आप नागरिकता संसोधन बिल 2019 और एनआरसी को अलग – अलग मानेंगे तो आपको इस कानून में कोई भी दिक्कत नहीं दिखेगा लेकिन आप ऐसा नहीं कर सकते है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में असम में एनआरसी की प्रक्रिया हुई थी , तथाकथित तौर पर उसमे 19 लाख लोग अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पाए थे जिसमें से 13 लाख गैर मुस्लिम थे , अब सरकार इस कानून के माध्यम से इन गैर मुस्लिमों को निर्बाध रूप से नागरिकता देना चाहती है ।

विशेष आग्रह :- किसी भी बिल का समर्थन या विरोध करने से पहले बिल के कॉपी को जरूर पढ़ ले , लोकसभा व राज्यसभा में पक्ष व विपक्ष के नेताओं के चर्चा पर गौर कर ले और माननीय मंत्री जी के जबाब को भी देख ले, उसके बाद आप निश्चित करे की आप को किस बिल का समर्थन करना है और किस बिल का विरोध करना है ।

      पक्ष और विपक्ष में पूरी जानकारी

● इस विधयक के कानून बन जाने के बाद सभी गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी ।

◆ गौरतलब हो कि भारतीय संविधान के हमारे देश के संसद ( लोकसभा + राज्यसभा ) में समय समय पर विधेयक आते रहते हैं और फिर संसद से पारित होने के बाद और महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाते है लेकिन कोई भी विधेयक हमारे संविधान के खिलाफ नही हो सकता है ।

 ● इस विधेयक में साफ साफ लिखा है कि सिख धर्म , ईसाई धर्म , पारसी धर्म , हिन्दू धर्म , जैन धर्म , बौद्ध धर्म के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलेगा ।

◆ अगर साफ शब्दों में कहाँ जाए तो यह विधेयक मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता से वंचित करने के लिए लाया गया है

 और यह विधेयक हिंदुओं को एनआरसी से बचायेगा ।

● मेरे विचार में यह विधयेक भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्षता सिद्धांत के खिलाफ है ।

हम धर्म – जाती , लिंग – भेद , गोरा – काला के आधार पर बनाये गए सभी कानूनों का विरोध करते है ।

हिन्दू – मुस्लिम में फर्क क्यो ? : नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019

मैं नागरिकता संसोधन बिल ( CAB ) 2019 का समर्थन करने वाले लोगों से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ ।

●  क्या हिन्दुओं और मुसलमानों के खून का रंग अलग – अलग होता है ?

◆  क्या मुसलमानों के ईद का चांद और हिंदुओं के करवा चौथ , गणेश चतुर्थी के चांद में अंतर होता है ?

●  क्या हिंदुत्व और शरीयत मानवता से बड़ी है ?

◆  क्या इस बिल को पेश करने से पहले मुस्लिम विद्वानों से विचार विमर्श किया गया है ?

●   क्या आपको नहीं पता  है कि इस बिल का विरोध केवल मुस्लिम ही नही बल्कि हिन्दू समेत अन्य समुदाय के लोग भी कर रहे है ?

◆  क्या आपको पता नहीं है कि असम जैसे राज्यों के अधिकांश लोग ( हिन्दू भी ) इस बिल का विरोध कर रहे हैं ?

●  क्या आपको नहीं पता है कि इससे भारत की जनसंख्या में कितनी वृद्धि होगी ?

◆  दुनिया मे ( पाकिस्तान , बंग्लादेश और अफगानिस्तान में भी ) अधिकांश ऐसे लोग रहते है जो किसी भी धर्म को नही मानते है ।

तो इस बिल में नास्तिक अल्पसंख्यको के लिए कोई प्रावधान क्यो नही किया गया है ?

ऐसे तमाम ऐसे प्रश्न है जिनके बारे में इस बिल में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है ।

 ________________

> पहला भाग

◆  अल्पसंख्यक शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है , अल्प मतलब थोड़ा और संख्यक मतलब जनसंख्या !!  यह बहुसंख्यक का विलोम है ।

 ऐसी मानव आबादी ( धर्म , भाषा आदि के आधार पर ) जो किसी देश या राज्य के बाहुल जनसंख्या से कम कुछ सीमित प्रतिशत में हो , उसे अल्पसंख्यक कहते है ।

● भारत मे सबसे बड़ी आबादी हिंदुओ की है और उसके बाद मुस्लिमो की , प्रायः लोग मुस्लिमो को अल्पसंख्यक कहते है लेकिन ज्ञात हो कि भारत मे मुस्लिम अल्पसंख्यको में बहुसंख्यक आबादी है ।

◆ अल्पसंख्यक केवल जाती – धर्म के आधार पर नही बल्कि भाषा , पहनावा आदि के आधार पर भी होते है , सभी प्रकार के अल्पसंख्यको को भरतीय संविधान में उचित सरंक्षण दिया गया है

● अल्पसंख्यक समुदाय : मुस्लिम , जैन , बौद्ध , पारसी , ईसाई  इत्यादि … नास्तिकों को भी अल्पसंख्यक माना जा सकता है ।

> दूसरा भाग

◆  अल्पसंख्यको की सबसे बड़ी समस्या है अपने तौर तरीकों की रक्षा करना ,  अपने भाषा को जीवित रखना  इसीलिए भारत सहित लगभग दुनिया के सभी देशों के संविधानों में अल्पसंख्यको के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं ।

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धर्म बताओ नागरिकता पाओ

● पक्ष : नागरिकता संसोधन बिल 2019 का समर्थन करने वाले कह रहे है कि हिन्दू शरणार्थी कहाँ जाएंगे ? क्योकि विश्व मे कोई भी हिन्दू राष्ट्र नही है और मुस्लिमों के लिए बहुत सारे इस्लामिक देश है ।

 विपक्ष  : तो फिर इस बिल में ईसाइयों को नागरिकता देने की बात क्यो की गई ? क्या ईसाइयों के लिए भी कोई देश नहींं है ?

◆ पक्ष : ये बिल तीन देेेश के अल्पसंख्यक समुदाय को नागरिकता देगा !

 विपक्ष  :  तो फिर इस बिल में नास्तिक लोगो को स्थान क्यो नहीं मिला है ?

#BVD26

🔴 👉 मसला है की CAB जैसे सरकारी हरकत पर भक्त खुश क्यों हैं ..?

जबकि तय है कि कोई भी भक्त इस बिल का देशहित में एक भी फायदा बता नहीं सकते।

तो भक्त खुश क्यों जाते हैं ..?

रहस्य नहीं बल्कि सामान्य सी बात है। समझ तो उन्हें भी है कि फायदा कुछ होना नहीं। उन्हें यह भी मालूम है कि इस सरकार ने पूर्व में भी जो निर्णय लिए हैं देश का नुकसान ही हुआ है। चाहे नोटबन्दी हो या जीएसटी

या फिर ढह गई अर्थव्यवस्था जो 1.5% पर जीडीपी पहुंच गई।

तो भक्त CAB पर भक्त खुश क्यों हैं …?

क्यों कि CAB के देशहित में नफा नुकसान को समझने के बाद जब विपक्षी एवं बुद्धिजीवियों ने इसका विरोध शुरू किया तो भक्त खुश हो गए। भक्तों का मानना है कि अगर विपक्षी एवं बुद्धिजीवी सरकार की किसी हरकत का विरोध कर रहे हैं तो ये अच्छा ही होगा।

और सरकार को भक्तों की इस भावना का भान है। उसे भी भक्तो की ज्ञान स्तर की बखूबी अंदाजा है। इसलिए किसी भी तरह की जाहिली बेवकूफी देश विरोधी निर्णय लाती है ताकि विपक्ष या बुद्धिजीवी लोग विरोध करें और भक्त इसपर खुश होकर कहें कि वाह सरकार का मास्टरस्ट्रोक ……!

देशहित में CAB का एक फायदा कोई भक्त बता दें।

ये चुनौती है ….!!!!
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अभी तक आप " CAA / NPR / NRC " पर कई तरह के ब्लॉग्स पढ़े होंगे , मीडिया के डिबेट भी देखे होंगे लेकिन आप को " हिजड़ा समुदाय " के समस्याओं पर जानकारी नहीं होगा ।
भारत समेत पूरी दुनिया मे महिला और पुरूष के अलावा तीसरा लिंग समुदाय भी रहता है ।

आपको पता ही होगा कि अगर किसी के घर कोई हिजड़ा पैदा होता है तो उसे बचपन मे ही घर से निकाल दिया जाता है ,

और अगर असम के तर्ज पर पूरे भारत मे " NRC " लागू हुआ तो इस समुदाय के लोग अपनी वंशावलि कैसे साबित करेंगे ?

क्या आपको लगता है कि कोई सरे आम यह स्वीकार कर पायेगा की ये " असमान्य " बच्चा हमारा है ?

हिजड़ा समुदाय तो पहले से ही भारत मे गुमनामी का जीवन व्यतीत करते हैं , इन्हें कोई अपने यहाँ नौकरी पर रखना पसन्द नहीं करता है ।

बाकी आप तो सब जानते होंगे कि यह समुदाय किस तरह अपना गुजारा करता है ।


क्या सरकार या विपक्ष ने इस पिछड़े समुदाय के बारे में सोचा है ?

बिकी हुई मीडिया से कुछ उमीद करना ही बेकार है ।

नोट :-
लोग हिजड़ो को छक्का और 3rd Gender ( तीसरा लिंग ) भी कहते है ।

मैं जब " हिजड़ा समुदाय " का उपयोग करता हूँ तो उसमें मैं समलैंगिकों ( Gays ) को , Bisexuals को , Bromances आदि को भी शामिल करता हूँ ।

* मैं " असमान्य बच्चा " का उपयोग इसीलिए किया हूँ क्योकि लोग समाज मे केवल " पुरुष " और " महिला " को ही देखना चाहते है और बाकी लोगो को " असमान्य " मानते है ।

इतने पिछड़े समुदाय पर " NRC " जैसे कानून का क्या असर पड़ेगा ?

भ्रम और अफवाह बहुत ही जल्दी फैलता है लेकिन फैक्ट नहीं

पता नहीं लोग व्हाट्सएप ( सोशल मीडिया ) पर वायरल खबरों पर कैसे विश्वास कर लेते है,

 हाथ मे मोबाइल है कम से कम गूगल ही कर किया करो, अगर वायरल फ़ोटो, वीडियो या खबर सही होगा तो किसी ना किसी वेबसाइट पर मिल ही जायेगा !!

भाजपा : मुस्लिम पुराने नियमो के अनुसार भारत की नागरिकता ले सकते है ।

प्रदर्शनकारी : तो फिर धर्म के आधार पर CAA 2019 लाने की जरूरत क्यो पड़ी ?

जिस नियम से मुसलमानों को नागरिकता दे रहे है, उन्ही नियम से अन्य लोगो को भी नागरिकता दीजिए ।

भारत मे नागरिकता का कानून तो बहुत पहले से ही है ।

भाजपा अपने ही तर्को में उलझती नजर आ रही है ।

भाजपा के अनुसार प्रदर्शनकारियों को कुछ नहीं पता है जबकि भाजपा नेता खुद CAA को CCA लिखते है

और लोगो को समझाने के बजाए केवल रैली करते है और कहते है कि यह नागरिकता लेने का नहीं बल्कि देने का कानून है

जबकि मंत्री जी ने ही CAA 2019 + NRC का क्रोनोलॉजी समझाया था

और लोगो को इसी क्रोनोलॉजी से दिक्कत है ।

खैर "असम" और "पूर्वोत्तर भारत" की समस्या और व्यापक है ।
CAA 2019 का मतलब Citizenship Amendment ACT ( नागरिकता संसोधन कानून ) ।

पूरे नाम से ही स्पष्ट है कि यह एक संसोधन कानून कानून है ना कि मूल कानून

अतः भारत में बहुत पहले से ही नागरिकता देने का कानून है ।

CAA 2019 केवल नागरिकता कानून 1995 में संसोधन मात्र है इससे पहले भी मूल कानून में संसोधन हुआ था लेकिन उनमें " धर्म " का जिक्र नहीं था ।

नागरिकता " संसद " का विषय है , " विधानमंडलों " का नहीं ।
 प्रदर्शकारियों के अनुसार CAA 2019 तो मात्र ऐसे हिंदुओ को नागरिकता देने के लिए लाया गया है जो " असम के NRC " से बाहर हो गए थे ।

विकिपीडिया :-
विधि (इंडियन नेशनैलिटी लॉ) के अनुसार भारत का संविधान पूरे देश के लिए एकमात्र नागरिकता उपलब्ध कराता है। नागरिकता से सम्बन्धित प्रावधानों को भारत के संविधान के द्वितीय भाग के अनुच्छेद 5 से 11 में दिया गया है। प्रासंगिक भारतीय कानून नागरिकता अधिनियम 1955 है, जिसे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 1986, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 1992, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2003 और नागरिकता (संशोधन) अध्यादेश 2005 के द्वारा संशोधित किया गया है, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2003 को 7 जनवरी 2004 को भारत के राष्ट्रपति के द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी और 3 दिसम्बर 2004 को यह अस्तित्व में आया। नागरिकता (संशोधन) अध्यादेश 2005 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किया गया था और यह 28 जून 2005 को अस्तित्व में आया।



इन सुधारों के बाद, भारतीय राष्ट्रीयता कानून, क्षेत्र के भीतर जन्म के अधिकार के द्वारा नागरिकता (jus soli) के विपरीत काफी सीमा तक रक्त के सम्बन्ध के द्वारा नागरिकता (jus sanguinis) का अनुसरण करता है ।


नोट : ये मेरे अपने विचार है ।

    मैं किसी भी प्रकार के अफवाहों का समर्थन नहीं करता हूँ और ना तो मैं हिंसात्मक प्रदर्शन का पक्षधर हूँ ।

 कानून व्यवस्था बनाये रखें ।

◆ असम के संदर्भ में :- असम के लोग इस बात से नही नाराज है कि इस बिल में मुस्लिमों को क्यो नहीं शामिल किया गया है !  असम के प्रदर्शनकारी चाहते है कि किसी भी घुसपैठियों को नागरिकता ना दिया जाए , असम को डर है कि अगर बाहरी लोगों को नागरिकता दी जाएगी तो असम में ही आसामी लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे ।

● पूर्वोत्तर भारत :- उत्तर भारत के इतर पूर्वोत्तर भारत मे ये लड़ाई हिन्दू – मुस्लिम की ना हो करके संस्कृति बचाने की लड़ाई है !   पूर्वोत्तर भारत का समाज उत्तर भारत से बिल्कुल अलग है इसीलिए संविधान में इन राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है …

 इसीलिए इस बिल में कुछ क्षेत्रों को छूट भी दिया गया है

प्रायः जिन बाहरी लोगों को नागरीकता दी जाएगी वो इनके समाज ( संस्कृति ) के नहीं होंगे  चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम या कोई अन्य !!

◆ NRC से सम्बंध :- गृह मंत्री ने कहा है कि पूरे देश में एनआरसी लागू होगा !   इस बिल के कानून बन जाने के बाद सभी गैर – मुस्लिमों ( अर्थात हिंदुओ को , ईसाइयों को , बौद्ध , पारसी , जैन सिख लोगो ) को नागरिकता मिल जाएगा , चाहे उनके पास कागज ( दस्तावेज ) हो या नहीं ।

 इस प्रकार देखा जाए तो इस बिल का एनआरसी से घनिष्ठ संबंध है ।   एनआरसी से केवल ऐसे मुस्लिम शरणार्थी बाहर होंगे जो अपनी नागरिकता साबित नही कर पाएंगे ।

अतः NRC का वही लाभ होगा जो नोटबन्दी का हुआ था !

● पूर्वोत्तर भारत को छोड़ दे तो यह लड़ाई संवैधानिक है … प्रदर्शनकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के 13 जजो की पीठ ने एक फैसला दिया था जिसके अनुसार धर्मनिरपेक्षता भारत के संविधान का मूल है अतः कोई भी कानून धर्मनिरपेक्षता के कानून का उल्लंघन नहीं कर सकता है ।

सरकार का तर्क है कि यह बिल / कानून संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नही करता है ।

◆ अगर आप नागरिकता संसोधन बिल 2019 और एनआरसी को अलग – अलग मानेंगे तो आपको इस कानून में कोई भी दिक्कत नहीं दिखेगा लेकिन आप ऐसा नहीं कर सकते है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में असम में एनआरसी की प्रक्रिया हुई थी , तथाकथित तौर पर उसमे 19 लाख लोग अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पाए थे जिसमें से 13 लाख गैर मुस्लिम थे , अब सरकार इस कानून के माध्यम से इन गैर मुस्लिमों को निर्बाध रूप से नागरिकता देना चाहती है ।

विशेष आग्रह :- किसी भी बिल का समर्थन या विरोध करने से पहले बिल के कॉपी को जरूर पढ़ ले , लोकसभा व राज्यसभा में पक्ष व विपक्ष के नेताओं के चर्चा पर गौर कर ले और माननीय मंत्री जी के जबाब को भी देख ले, उसके बाद आप निश्चित करे की आप को किस बिल का समर्थन करना है और किस बिल का विरोध करना है ।

नागरिकता बिल 2019 को और अच्छे से समझने के लिए मेरे पुराने ब्लॉग्स को जरूर पढ़ें ।

#BhartenduVimalDubey 

Monday, 10 February 2020

आम आदमी पार्टी को मेरा सपोर्ट क्यो ?

मेरा नाम भारतेन्दु विमल दुबे उर्फ उमंग दुबे है
मैं दिल्ली का नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ
और ना तो मैं किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ हूँ 
मैं मात्र तो एक साधारण स्टूडेंट व मतदाता हूँ  

तो अब आप पूछ सकते कि फिर तुम ब्राम्हण हिन्दू होने के बाद भी भाजपा का समर्थन क्यो नहीं करते हो ? तुम आम आदमी पार्टी का , अरविंद केजरीवाल का समर्थन क्यो करते हो ? 

मेरे हिसाब से धर्म - जाती की राजनीति करने वालो को कभी भी वोट नहीं देना चाहिए ।
भारत एक लोकतांत्रिक व संवैधानिक देश है, यहाँ लगभग सभी धर्म - जाती के लोग रहते है इसीलिए वोट तो विकास के मुद्दे पर ही होना चाहिए ।
भारत की तुलना अमेरिका जैसे देशों से होना चाहिए ना कि गरीब पाकिस्तान या गरीब नेपाल से ।

एक बार आप "आप" व अन्य पार्टीयो का तुलना कर ले आपको सब स्पष्ट हो जाएगा कि "आप" के सभी नेता पढ़े लिखे हैं ।
आप खुद सोचिए कि देश को पढा लिखा नेता आगे बढ़ा सकता है या फिर अशक्षित नेता ? 
"आप" के तमाम नेता एक्स बैंकर , इंजीनियर , वकील , शिक्षक आदि है । 

सफाईकर्मी के नौकरी के लिए भी स्नातक होना जरूरी है तो फिर आंगुठा टेक को मंत्री या विधायक बनने का हक होना चाहिए है क्या ? 

देश मे 543 लोकसभा सांसद है लेकिन उसमें से अधिकांश 12वी भी पास नहीं है ।
आप खुद सोचिए क्या 12वी फेल सांसद कानून का निर्माण कर सकते है ?

"आप" शिक्षा को ले करके व भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करती है
और "आप" के लगभग सभी नेता शिक्षित है इसीलिए मैं आम आदमी पार्टी व अरविंद केजरीवाल का समर्थन करता हूँ ।

आपकी क्या राय है ?
क्या अशिक्षितों को सांसद, विधायक व मंत्री बनने का हक होना चाहिए ?

धन्यवाद
भारतेन्दु विमल दुबे 

कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में होती हिंसा पर खामोशी क्यो ?

आज मैं किस मुद्दों पर लिखना चाह रहा हूँ , आपको पता ही होगा ।
क्या हमारे भाई - बहन यूनिवर्सिटीज व कॉलेजों में सुरक्षित है ?

कहा से शुरू करू ?
कहा से ना शुरू करू ?
क्या लिखूं ?
क्या ना लिखूं ?
किसके लिए लिखूं ?
किसके लिए ना लिखूं ?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में विद्यार्थियों पर हमला हुआ तो मेरे घर वालो ने कहा कि उस मे मुस्लिम छात्र पढ़ते है, तुम क्यो लिख रहे हो ? मीडिया ने भी दबे जुबान से यही कहा इसीलिए मैंने जामिया के मुद्दे पर नहीं लिखा ।

JNU में स्टूडेंट्स के साथ बदसलूकी हुआ , मुझे समझाया गया कि भारतेन्दु वहाँ तो गद्दार, वामपंथी , अर्बन नक्सली पढ़ते है इसीलिए मैं फिर चुप हो गया ।

AMU के स्टूडेंट्स पर अत्याचार हुआ तो कहा गया कि आखिर ये पढ़ने जाते है या आंदोलन करने ? मैं फिर चुप हो गया ।

लेकिन अभी तक किसी ने भी किसी तरीके से गार्गी में छात्राओं के साथ हुए "यौन शोषण" का बचाव नहीं किया है इसीलिए मैं इस ब्लॉग के माध्यम से जानना चाहता हूँ कि क्या छात्राओं के साथ यौन शोषण उचित है ?

वैसे एक सवाल और है कि गार्गी के बाद किस यूनिवर्सिटी या कॉलेज का नम्बर है ?

आपके जबाब के इंतेज़ार में एक स्टूडेंट
- भारतेन्दु विमल दुबे

Sunday, 2 February 2020

नाबालिगों द्वारा अपराध और कानून का गलत इस्तेमाल

नाबालिक कौन है ?
 जो 18 साल से कम उम्र होता है उन्हें ही नाबालिग कहते है ।
अगर कोई नाबालिक अपराध करता है तो उसे बालिक अपराधियों से कम सजा होती है , प्रायः इसी का गलत फायदा उठाया जाता है ।
जो इंसान अपराध करना जानता है वो नाबालिग कैसे हो सकते है ? इसी पर चंद लाइन

" रेप करना जानता हूँ ।
हत्या करना जानता हूँ ।
सोशल मीडिया इस्तेमाल करना जानता हूँ ।
गोली चलाना जानता हूँ ।
नशा करना जानता हूँ ।

दाढ़ी और मुछ छिलना शुरू कर दिया हूँ ।
दो चार बार मतदान भी कर चुका हूँ ।
मम्मी - पापा को उनकी औकात दिखाना शुरू कर दिया हूँ ।

लेकिन मैं अभी नाबालिग हूँ । "  

आप खुद सोचिए कि जो सब कुछ जानता है वो नाबालिग कैसे हुआ ?
क्या केवल क्लास 10 के रिजल्ट के आधार पर किसी को नाबालिग कहना सही होगा ? या डॉक्टर के टीम के द्वारा आरोपी के असली उम्र का पता लगाया जाना चाहिए ?

एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह कि आखिर नाबालिग किसी अपराध को अंजाम देने के लिए तत्पर कैसे होते है ? 
क्या रेप के अपराधों को रोकने के लिए अनिवार्य रूप से " सेक्स एजुकेशन " दिया जाना चाहिए ?
क्या विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा दिया जाना चाहिए ?

मेरे हिसाब से सबसे बड़ी समस्या " टीवी पर आने वाले हिन्दू - मुस्लिम डिबेट है "
नेताओ और गणमान्य लोगों के द्वारा दिया जाने वाला भड़काऊ भाषणों को कैसे रोका जाए ?
प्रश्न बहुत सारे है लेकिन भ्रष्ट राजनीति तंत्र के होते किसी भी प्रश्न का जबाब नहीं मिलने वाला है ।

और हाँ अपने लिए और अपने बच्चों के लिए " हिन्दू - मुस्लिम " डिबेट से दूर रहिए 🙏

धन्यवाद

" BhartenduVimalDubey "
" #BVD26 " 

Saturday, 1 February 2020

2020 - 2021 के लिए 1 फरवरी 2020 को संसद में बजट पेश हुआ ।

आम लोगो को बजट तो समझ आता नहीं है और मैं भी अर्थव्यवस्था का अधिक जानकार नहीं हूँ , मैं अभी स्नातक का विद्यार्थी हूँ ☺️ फिर भी समझना तो होगा ही,
आइए आम भाषा मे समझते है ।

हाथी के दांत दिखाने के 'और' 
और खाने के 'और' ।

निर्मला सीतारमण जी के भाषण से लगता है कि सब कुछ चंगा है , मध्यम वर्गीय लोगो को टैक्स में भारी भरकम छूट मिलेगा , इनकम टैक्स घटा दिया गया है , लोगो को नौकरियां मिलेंगी , 5 स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा

लेकिन क्या आपको पता है कि नए बजट के अनुसार इनकम टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए बहुत सारे if , but है ।

पुराने 100 स्मार्ट सिटी का क्या हुआ ?

नोटबन्दी से क्या फायदा हुआ इसका कहीं भी किसी प्रकार का कोई जिक्र नहीं है ।

LIC में से सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचेगी । 

एक उदाहरण ले करके समझे कि पारले जी बिस्किट का दाम नहीं बढ़ा है लेकिन उसमें से बिस्किट की संख्या जरूर कम हो गई ठीक इसीप्रकार इस बजट का भी हाल है ।

ऐसा नहीं है कि इस बजट का कोई सकारात्मक पहलू नहीं है , इस बजट का सकारात्मक पहलू भी है ।

यह बजट केवल पिछले बजट के दावों को झुठलाने और इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव के लिए लाया गया है । 

गोदी मीडिया तो इस बजट को एकदम इस तरीके से पेश कर रही कि अब हर वर्ष 2 करोड़ लोगों को नौकरी मिलेगी , पिछले 100 स्मार्ट सिटी का कोई उल्लेख नही है ,
किसानों की आय दो गुनी कैसे होगी ? इसका कोई उल्लेख नहीं है ।
बड़े - बड़े उद्योगपतियों को इस बजट से राहत मिलेगा लेकिन इस बजट में मांग बढ़ाने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है । 
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जिनके डिग्री का कोई अता पता नहीं है वो बड़े बड़े पत्रकारों व अर्थव्यवस्था के जानकरों में एक झटके में कह देती है इन लोगो को कुछ समझ नहीं आता है 🤷‍♂️
सबसे बड़ा दिक्कत यह कि भारत के अधिकांश सांसद व विधायक ऐसे है जिनको सही से पढ़ने नहीं आता है तो बजट कहाँ से समझ आता होगा ?

जब तक गाँव का और किसानों का विकास नहीं होगा तब तक भारत केवल भाषणों में ही विश्वगुरु बनेगा ।
शिक्षा पर बजट का कितना प्रतिशत खर्च होगा ?
जो उमीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में महंगाई और बेरोजगारी कम हो जाएगी , वे केवल उमीद ही करते रहे जाएंगे । 
इस बजट में ऐसे कई डाटा है जिनका कोई सोत्र नहीं है और कई जगहों पर सोत्र के रूप में विकिपीडिया का उपयोग किया गया है जिसे कोई भी कभी भी बदलाव कर सकता है ।



आज बजट पेशी के दिन शेयर बाजार गिर करके बंद हुआ है ☺️ .
अच्छे दिन आएंगे बस आप केवल " हिन्दू - मुस्लिम " व " जाती - धर्म " के मुद्दे पर वोट देते रहे । 

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